डॉ भारती छिब्बर। Bihar Chunav 2020 बिहार चुनाव नतीजों के आकलन से कई आयाम सामने आते हैं। बिहार चुनाव न केवल क्षेत्रीय राजनीति अपितु राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा सरकार की लोकप्रियता को दर्शाता है। यह चुनाव बहुत ही कठिन था। पिछले 15 वर्षों से बिहार में नीतीश कुमार के शासन के कारण एंटी इनकंबेंसी घटक के पश्चात भी राजग को बहुमत मिलना जहां एक तरफ सुशासन बाबू के सार्थक प्रयासों को दर्शाता है वहीं इस बार इस गठबंधन में 125 सीट में से 74 सीट भाजपा को मिलना और 43 सीट जदयू को मिलना, भाजपा को एक वरिष्ठ सहयोगी के रूप में सामने लाता है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री का सबका साथ, सबका विकास मॉडल सबके विश्वास में तब्दील हो चुका है।

बिहार चुनाव से पहले कोरोना संक्रमण के दौरान पूरे देश ने अप्रवासी मजदूरों का पलायन देखा। बिहार चुनाव में श्रमिकों का पलायन बहुत बड़ा मुद्दा था जिसे लगभग सभी पार्टियों ने प्रमुखता से उठाया। बावजूद इसके राजग को बहुमत मिला, इसलिए यह कहा जा सकता है कि मतदाताओं की नजर में देश और राज्य के विकास के लिए मोदी सरकार ही एकमात्र विकल्प है। इन चुनावों में महिला और पिछड़े वर्ग के मतदान को अति महत्वपूर्ण माना जा सकता है। महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान में भाग लिया और स्वतंत्र रूप से स्वयं महिलाओं के विकास से जुड़े मुद्दों पर मतदान किया। चाहे वह केंद्र की शिक्षा नीति रही हो या उज्ज्वला नीति या राज्य सरकार की बालिकाओं को शिक्षा देने के लिए साइकिल देना, महिलाओं के लिए पंचायत में 50 फीसद आरक्षण या नीतीश सरकार की शराबबंदी की 2016 की नीति, जिससे घरेलू उत्पीड़न में व्यापक कमी आई है। इससे महिलाओं का प्रभावी सशक्तीकरण हुआ। इन्हें साइलेंट वोटर्स के रूप में देखा गया है। साइलेंट वोटर्स पिछले 5 दशकों से उन मतदाताओं के लिए प्रचलित है जिनका मत पहले से निश्चित नहीं होता परंतु चुनाव के नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भविष्य में हम यह भी देखना चाहेंगे कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी भी बढ़े।

बिहार चुनाव यह भी स्पष्ट करते हैं कि चुनाव में क्षेत्रीय दल और विषयों के साथ साथ भाजपा और केंद्रीय विषय भी प्रभावी हो रहे हैं। एक मतदाता के लिए स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दे जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा भी महत्व रखते हैं। राष्ट्रीय हित और निजी हित में सामंजस्य है। मतदाता का विश्वास है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मोदी एकमात्र विकल्प है और वह इन परिस्थितियों में बेहतर कार्य कर रहे हैं। विरोधी दलों द्वारा सरकार की आलोचना रचनात्मक है या केवल विरोधी दल होने के कारण आलोचना कर रहे हैं यह भी अंतर जनता समझती है। ऐसा बिहार समेत कर्नाटक, गुजरात, यूपी इत्यादि में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन से भी जाहिर होता है।

कई राज्यों में तो पिछले चुनावों में जो सीट पहले कांग्रेस के पक्ष में गई थी वह भी उपचुनावों में भाजपा को मिली है, अर्थात मतदाता ने भाजपा की सक्रिय और सकारात्मक नीतियों और कार्यों में आस्था जताई है। भविष्य में यदि कांग्रेस को पुन: सार्थक बनना है तो अपनी नीति और संरचना को बदलना होगा क्योंकि बिहार चुनाव के नतीजे स्पष्ट करते हैं कि महागठबंधन को लोगों ने विकल्प के रूप में अस्वीकार किया है।

[विशेषज्ञ, भारतीय राजनीति, दिल्ली विश्वविद्यालय]

Edited By: Sanjay Pokhriyal