यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 04, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
डोमिसाइल नीति हटाने पर नीतीश सरकार ने दी सफाई, कहा- बिहारियों को कोई नुकसान नहीं, प्रतिभा के आधार पर होगा चयन
बिहार में शिक्षक नियुक्ति में डोमिसाइल हटाने को लेकर विवाद के बीच मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा कि देश ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, पटना : बिहार में शिक्षक नियुक्ति में डोमिसाइल हटाने के बाद से उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। बिहार में शिक्षक अभ्यर्थी नियुक्ति में डोमिसाइल को लेकर लगातार जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच प्रदेश के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा कि देश के संविधान में किए गए प्रविधानों के अनुसार किसी भी नागरिक को उसके जन्म स्थान, निवास के आधार पर अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।
सुबहानी ने शिक्षा मंत्री के उस बयान को भी खारिज किया कि बिहार में गणित और विज्ञान के शिक्षकों की कमी है। सुबहानी सोमवार को मुख्य सचिवालय में प्रेस को संबोधित कर रहे थे। उनके साथ शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक भी मौजूद थे।
मुख्य सचिव ने कहा-
सरकार ने शिक्षक नियुक्ति नियमावली में हाल ही में संशोधन किया है। जिसके तहत राज्य का स्थायी निवासी होने की शर्त हटाई गई है। इस शर्त को इसलिए हटाया गया कि न तो यह व्यवहारिक है न ही विधि सम्मत। मुख्य सचिव ने संविधान के अनुच्छेद 16 की उपधारा का हवाला देकर कहा कि यह अनुच्छेद कहता है कि देश के किसी भी नागरिक को केवल धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान के अलावा निवासी होने के आधार पर उसका अधिकार नहीं छीना जा सकता। ऐसा कोई भी प्रयोग गैर कानूनी होगा। वैसे भी किसी भी व्यक्ति का किसी भी नौकरी में चयन उसकी प्रतिभा और मेरिट के आधार पर होता है।
1994, 1999 और 2000 में भी नहीं था डोमिसाइल
सुबहानी ने कहा कि बिहार लोक सेवा आयोग ने 1991 में जो नियमावली बनी, उसमें भी डोमिसाइल का प्रविधान नहीं था। आयोग ने 1994, 1999 और वर्ष 2000 में जो बहाली की वह पूर्व की नियमावली के के अनुसार ही थी। उन्होंने कहा 2012 में जो नियमावली बनी, उसके तहत 1.68 लाख की बहाली हुई जिसमें अन्य राज्य से चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या मात्र 3413 थी। शेष चयन बिहार के नागरिकों का हुआ था।
सब ऐसा करने लगे तो बिहारियों को भी नहीं मिलेगा मौका
उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों का हवाला देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि किसी प्रदेश में डोमिसाइल लागू है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं। यदि सभी राज्य ऐसा नियम लागू कर देंगे तो बिहार के नागरिकों को भी बाहर के प्रदेशों में नौकरी नहीं मिल सकेगी।
बिहारियों के हित में नहीं आएगी कमी
उन्होंने कहा कि सरकार ने यह निर्णय काफी सोच-समझ कर लिया है। इस निर्णय से बिहार के नागरिकों के हित में कोई कमी नहीं आएगी। इस निर्णय से शिक्षा-व्यवस्था सुदृढ़ ही होगी। उन्होंने कहा वैसे भी राज्य की नौकरियों में 50 प्रतिशत रिक्तियां आरक्षित होती हैं। आरक्षण का लाभ सिर्फ राज्य के नागरिकों को मिलता है।
एक प्रश्न के जवाब में मुख्य सचिव ने नियमावली बनने के बाद संशोधन को लेकर कहा कई बार कई चीजों पर ध्यान नहीं जाता है। जैसे-जैसी चीजें संज्ञान में आती हैं तो संशोधन होते हैं। देश के संविधान तक में आज तक कई संशोधन हो चुके हैं।
शिक्षा मंत्री के बयान से सरकार ने पल्ला झाड़ा
उन्होंने शिक्षा मंत्री के उस बयान को नकारते हुए कहा गणित और विज्ञान में बिहार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। हर वर्ष बिहार में हजारों छात्र आइआइटी, जेई, नीट जैसी परीक्षाएं देते हैं और अग्रणी रहते हैं। लगातार हो रहे प्रदर्शनों पर मुख्य सचिव ने कहा इस देश में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन निर्णय कानून के दायरे में ही लिए जाते हैं।
