बोधगया से वैशाली तक... बिहार में बौद्ध सर्किट के 5 प्रमुख स्थल, जानिए कैसे पहुंचे और क्या है खासियत
बिहार का 'बौद्ध सर्किट' उन सभी प्रमुख बौद्ध स्थलों को जोड़ता है जहां भगवान बुद्ध ने अपना जीवन बिताया, ज्ञान ...और पढ़ें

बिहार का बौद्ध सर्किट: भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रमुख स्थलों की यात्रा (AI Generated Image)
HighLights
बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान मिला।
राजगीर, नालंदा, वैशाली बुद्ध के उपदेश और शिक्षा केंद्र।
सरकार की 'स्वदेश दर्शन योजना' से सर्किट का विकास हुआ।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार को भगवान बुद्ध की धरती कहा जाता है। टूरिस्ट डिपार्टमेंट ने पर्यटकों के लिए 'बौद्ध सर्किट' (Buddhist Circuit in Bihar) बनाया है, जो उन सभी जगहों को आपस में जोड़ता है जहां बुद्ध ने अपना जीवन बिताया, ज्ञान पाया और लोगों को शिक्षा दी।
बिहार में बौद्ध सर्किट के मुख्य स्थल
बोधगया (ज्ञान की जगह): यह बौद्ध सर्किट का सबसे मुख्य हिस्सा है। करीब 2600 साल पहले, यहीं पर एक पेड़ (बोधि वृक्ष) के नीचे सिद्धार्थ को तपस्या के बाद ज्ञान मिला था और वे 'बुद्ध' कहलाए। यहां का महाबोधि मंदिर बहुत मशहूर है।

- महाबोधि मंदिर कैसे पहुंचें?: बोधगया के भीतर ऑटो-रिक्शा और साइकिल-रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं।
- समय: सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक
- प्रवेश शुल्क: निःशुल्क (फ्री)
राजगीर (उपदेश की जगह): बुद्ध ने यहां कई साल बिताए थे। यहां एक पहाड़ी है जहां उन्होंने अपने शिष्यों को महत्वपूर्ण उपदेश दिए थे। मगध के राजा ने बुद्ध को यहां एक मठ (वेणुवन) भी उपहार में दिया था।

- वेणुवन कैसे पहुंचें? : राजगीर से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी उपलब्ध हैं।
- समय : सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक
- प्रवेश शुल्क : निःशुल्क (फ्री)
नालंदा (पढ़ाई का केंद्र): यह पुराने समय में बौद्ध शिक्षा की बहुत बड़ी जगह थी। यहां आपको प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर देखने को मिलेंगे। चीन से आए यात्री ह्वेनसांग ने भी यहीं से पढ़ाई की थी।

- अशोक स्तूप कैसे पहुंचें?: नालंदा से स्थानीय बसों और टैक्सियों द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
- समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक
- प्रवेश शुल्क: निःशुल्क
वैशाली (आखिरी उपदेश): यहीं पर भगवान बुद्ध ने अपना आखिरी उपदेश दिया था और बताया था कि वे जल्द ही अपना शरीर छोड़ देंगे। यहां सम्राट अशोक का बनवाया हुआ एक स्तंभ और बुद्ध की अस्थियों (राख) पर बना एक स्तूप मौजूद है।

- अशोक स्तंभ (कोल्हुआ, वैशाली) कैसे पहुंचें?
- हवाई मार्ग: सबसे करीबी हवाई अड्डा पटना (लगभग 65 किमी दूर) है। वहां से आप टैक्सी बुक कर सकते हैं।
- रेल मार्ग: हाजीपुर जंक्शन (35 किमी) और मुजफ्फरपुर (40 किमी) सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं।
- सड़क मार्ग: पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर से वैशाली के लिए बसें, टैक्सियां और ऑटो:रिक्शा आसानी से मिल जाते हैं।
- समय: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक।
- प्रवेश शुल्क: कोल्हुआ परिसर में प्रवेश के लिए ₹25 शुल्क लागू है।
केसरिया स्तूप (आराम की जगह): चंपारण में स्थित यह स्तूप दुनिया के सबसे ऊंचे बौद्ध स्तूपों में से एक है। माना जाता है कि कुशीनगर जाते समय बुद्ध ने यहां रास्ते में कुछ देर आराम किया था।

- केसरिया स्तूप कैसे पहुंचें? मोतिहारी या मुजफ्फरपुर से बसों और निजी वाहनों द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
- समय: सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक
- प्रवेश शुल्क: निःशुल्क
भारत सरकार की 'स्वदेश दर्शन योजना' के तहत इस सर्किट को बहुत अच्छी तरह से विकसित किया गया है। बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए इसे गया के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ा गया है।
इसके अलावा, रेलवे (IRCTC) भी तीर्थयात्रियों के लिए 'महापरिनिर्वाण एक्सप्रेस' नाम की एक खास ट्रेन चलाता है, जिससे लोग आसानी से इन सभी जगहों की यात्रा कर सकते हैं।
सोर्स- https://tourism.bihar.gov.in/en/circuits/buddhist-circuit
