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बिहार में महिला दारोगा ने JDU महासचिव को दी 40 लाख घूस, बेटे को BPSC पास कराने की डील; EOU ने शुरू की जांच

Published: Wed, 20 May 2026 10:39 PM (GMT+05:30)

बिहार में एक महिला दारोगा ने अपने बेटे को बीपीएससी परीक्षा में पास कराने के लिए डॉक्टर दंपती को 40 ...और पढ़ें

ईओयू ने पांच लोगों पर दर्ज की प्राथमिकी

ईओयू ने पांच लोगों पर दर्ज की प्राथमिकी

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार पुलिस की एक महिला दारोगा ने अपने बेटे को बीपीएससी परीक्षा में पास कराकर सरकारी नौकरी दिलाने के लिए डॉक्टर दंपती को 40 लाख रुपये घूस दिए, लेकिन जब काम नहीं बना तो मामला पुलिस और अदालत तक पहुंच गया। अब आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

ईओयू ने पांच लोगों पर दर्ज की प्राथमिकी

ईओयू ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ए), 8 और 12 के तहत पटना जिला बल की सब-इंस्पेक्टर आशा सिंह, उनके बेटे रितेश कुमार उर्फ सोनू तथा डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार, उनकी पत्नी डॉ. रजनी और उनके पिता ब्रजकिशोर प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

डॉक्टर धर्मेंद्र कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र से RJD के टिकट से चुनाव भी लड़ चुके हैं। अभी वो JDU के प्रदेश महासचिव है

 

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JDU के प्रदेश महासचिव डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार

 

40 लाख एडवांस लेकर दी थी सफलता की गारंटी

प्राथमिकी के अनुसार, कृष्णा डेंटल अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर दंपती ने रितेश कुमार को बीपीएससी परीक्षा में सफलता दिलाने की गारंटी दी थी।

इसके एवज में 40 लाख रुपये नकद एडवांस लिए गए। हालांकि, जब रितेश का नाम मेरिट सूची में नहीं आया तो विवाद शुरू हो गया।

बाउंस हुआ 25 लाख रुपये का चेक

आरोप है कि डॉक्टर दंपती ने 25 लाख रुपये लौटाने के लिए चेक दिया, लेकिन हस्ताक्षर मेल नहीं खाने के कारण वह बाउंस हो गया।

शेष 15 लाख रुपये लौटाने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

जक्कनपुर थाने में दर्ज हुआ धोखाधड़ी का केस

रितेश कुमार ने 21 जनवरी 2024 को जक्कनपुर थाने में डॉक्टर दंपती और उनके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था।

जांच के बाद जुलाई 2024 में पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।

पारिवारिक संबंधों के जरिए हुआ संपर्क

प्राथमिकी में रितेश ने बताया कि उनके परिवार के डॉक्टर धर्मेंद्र के पिता ब्रजकिशोर प्रसाद से पुराने संबंध थे।

उनकी मां आशा सिंह अक्सर उनके घर जाया करती थीं। इसी दौरान रितेश की बीपीएससी तैयारी की जानकारी मिलने पर डॉक्टर दंपती से संपर्क कराया गया।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी जांच

डॉक्टर धर्मेंद्र ने 13 अगस्त 2025 को पटना हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान 11 सितंबर 2025 को अदालत ने एसएसपी से पूछा कि रितेश कुमार ने 40 लाख रुपये नकद कहां से जुटाए और इसकी जांच क्यों नहीं हुई।

महिला दारोगा ने दिया लोन का हवाला

पटना पुलिस द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर महिला दारोगा आशा सिंह ने बताया कि उन्होंने एसबीआई की मौर्यालोक शाखा से हाउसिंग लोन, पर्सनल लोन और अपनी बचत मिलाकर 22 लाख रुपये बेटे को दिए थे।

'पिछले दरवाजे' से नौकरी दिलाने की कोशिश

पटना पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि पुलिस पदाधिकारी होने के बावजूद आशा सिंह ने विभिन्न स्रोतों से राशि जुटाकर अपने बेटे को 'पिछले दरवाजे' से सरकारी नौकरी दिलाने का प्रयास किया।

रिश्वत देना और लेना दोनों अपराध

पटना एसएसपी ने पुलिस मुख्यालय से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की थी। पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद ईओयू ने केस दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली है।