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बिहार में रबी खेती का बढ़ेगा दायरा, 48 लाख हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य; CM सम्राट चौधरी ने रवाना किया जागरूकता रथ

Published: Thu, 15 Oct 2026 01:04 PM (GMT+05:30)

बिहार में रबी फसलों की खेती का दायरा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जागरूकता रथ को हरी झंडी ...और पढ़ें

गेहूं की खेती के लिए 24 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य

गेहूं की खेती के लिए 24 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य

HighLights

  1. मुख्यमंत्री ने रबी महाअभियान जागरूकता रथ को रवाना किया।

  2. इस वर्ष 48 लाख हेक्टेयर में रबी खेती का लक्ष्य।

  3. दलहन, तिलहन और प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में रबी फसलों की खेती का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को वासंतिक (रबी) महाअभियान जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ विभिन्न जिलों में जाकर किसानों को रबी फसलों की खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करेगा। इस साल राज्य में 48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी खेती का लक्ष्य तय किया गया है।

गेहूं की खेती के लिए 24 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य

पिछले वर्ष बिहार में करीब 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वासंतिक फसलों की खेती हुई थी। इस बार लक्ष्य बढ़ाकर 48 लाख हेक्टेयर किया गया है। इसमें 24 लाख हेक्टेयर में गेहूं, छह लाख हेक्टेयर में वासंतिक मक्का और पांच लाख हेक्टेयर में दलहन की खेती का लक्ष्य है।

इसके अलावा चार लाख हेक्टेयर में तिलहन और नौ लाख हेक्टेयर में आलू, सब्जी, मसाला व अन्य फसलें उगाने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के निर्धारित लक्ष्य सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। खेतों में इसका वास्तविक परिणाम दिखना चाहिए।

लक्ष्य हासिल करने के लिए जिलों, प्रखंडों और पंचायतों की नियमित समीक्षा की जाएगी तथा कमियों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

दलहन-तिलहन और प्राकृतिक खेती पर जोर

सरकार मसूर, चना और सरसों जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देगी। गुणवत्तापूर्ण बीज और आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर जोर रहेगा।

कृषि में युवाओं और महिलाओं के लिए अवसर

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों की ओर से विकसित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना जरूरी है।

कृषि यंत्र, बीज उत्पादन, मशरूम, नर्सरी, ड्रोन, प्रसंस्करण और विपणन जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की जरूरत पर भी बल दिया।