CBSE-ICSE छोड़ बिहार बोर्ड में क्यों आ रहे छात्र? 2026 में 1.30 लाख विद्यार्थियों ने लिया 11वीं में नामांकन
बिहार बोर्ड द्वारा रिकॉर्ड समय में 10वीं और 12वीं के परिणाम जारी करने से अन्य बोर्ड के छात्र आकर्षित हो ...और पढ़ें

बिहार बोर्ड के प्रति बढ़ा दूसरे राज्यों के छात्रों का रुझान।
रवि कुमार, पटना। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा रिकार्ड समय में 10वीं और 12वीं के परिणाम जारी किए जाने का आकर्षण अब दूसरे बोर्ड के विद्यार्थियों में भी दिखने लगा है।
वर्ष 2018 से 2026 तक दूसरे बोर्ड से 10वीं उत्तीर्ण 9.25 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने 11वीं में नामांकन के लिए बिहार बोर्ड के स्कूलों को चुना है। इस वर्ष करीब 13.05 लाख विद्यार्थियों ने 11वीं में नामांकन लिया है।
इनमें सीबीएसई, आइसीएसई और दूसरे राज्यों के बोर्ड से 10वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या करीब 1.30 लाख है।
कम समय में रिजल्ट के कारण बढ़ा आकर्षण
इनमें सीबीएसई के 1,07,785, आइसीएसई के 1,731 और दूसरे राज्यों के बोर्ड के 20,229 विद्यार्थी शामिल हैं। वर्ष 2025 में बिहार बोर्ड के स्कूलों में 11वीं में करीब 11.99 लाख विद्यार्थियों ने नामांकन लिया था।
इनमें दूसरे बोर्ड से 10वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या करीब 1.11 लाख थी। एक वर्ष में दूसरे बोर्ड के विद्यार्थियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
दूसरे बोर्ड के विद्यार्थियों के बिहार बोर्ड की ओर आकर्षित होने का प्रमुख कारण कम समय में परीक्षा परिणाम जारी होना माना जा रहा है।
सीबीएसई, आइसीएसई सहित कई अन्य राज्य बोर्ड जहां इंटरमीडिएट के परिणाम मई या जून में जारी करते हैं, वहीं बिहार बोर्ड 12वीं का मुख्य परीक्षा परिणाम मार्च में ही जारी कर देता है। कंपार्टमेंटल, पूरक एवं विशेष परीक्षा का परिणाम भी मई तक जारी कर दिया जाता है।
दो महीने में जारी हो जाता है दो परीक्षाओं का परिणाम
बिहार बोर्ड के अध्यक्ष डाॅ. त्यागराजन एसएम के अनुसार, पिछले सात वर्षों से समिति रिकार्ड समय में परीक्षा परिणाम जारी कर रही है। साथ ही विद्यार्थियों का परिणाम लंबित रहने की संभावना भी लगभग समाप्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि उत्तरपुस्तिका पर विद्यार्थियों का फोटो, क्रमांक समेत अन्य आवश्यक जानकारी पहले से प्रिंटेड रहती है। परीक्षार्थी को केवल हस्ताक्षर करना होता है।
बारकोड के साथ लिथो कोडिंग की व्यवस्था भी की गई है। इससे उत्तरपुस्तिका की पहचान और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है तथा परिणाम लंबित रहने की संभावना बेहद कम हुई है।
आइआइटी, एनआइटी, ट्रिपलआइटी समेत कई उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए जेईई मेन व एडवांस की रैंक के साथ 12वीं में संबंधित बोर्ड से न्यूनतम निर्धारित अंक या परसेंटाइल प्राप्त करना जरूरी होता है। ऐसे में बिहार बोर्ड का जल्दी परिणाम जारी होना विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
यदि कोई विद्यार्थी फरवरी में आयोजित मुख्य परीक्षा में किसी कारण शामिल नहीं हो पाता है या अपेक्षित अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे मई में आयोजित पूरक एवं विशेष परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलता है। इन परीक्षाओं का परिणाम भी अन्य कई बोर्ड से पहले जारी कर दिया जाता है।
दूसरे बोर्ड के विद्यार्थियों को क्यों भा रहा बिहार बोर्ड
- नामांकन और परिणाम समेत पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर आधारित, जिससे त्रुटि की संभावना बेहद कम।
- मुख्य परीक्षा का परिणाम मार्च में जारी होने से विद्यार्थियों को आगे की प्रवेश प्रक्रिया में समय मिलता है।
- मुख्य परीक्षा में अपेक्षित अंक नहीं आने पर मई में पूरक एवं विशेष परीक्षा का अवसर।
- कंप्यूटरीकृत परीक्षा व्यवस्था, बारकोड और लिथो कोडिंग से प्रक्रिया में पारदर्शिता।
- दस्तावेजों के ऑनलाइन सत्यापन के लिए डीवीएस (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सिस्टम) एप्लीकेशन लांच।
- 50 प्रतिशत प्रश्न वस्तुनिष्ठ होने के साथ विभिन्न श्रेणियों के प्रश्नों में निर्धारित संख्या में विकल्प की सुविधा।
- बिहार बोर्ड एक साथ तीन आइएसओ प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाला देश का पहला बोर्ड बना।
2026 में 11वीं का नामांकन
| श्रेणी | विद्यार्थियों की संख्या |
|---|---|
| कुल नामांकन | 13,05,000 |
| सीबीएसई | 1,07,785 |
| आइसीएसई | 1,731 |
| दूसरे राज्यों के बोर्ड | 20,229 |
| दूसरे बोर्ड से कुल | करीब 1.30 लाख |
