Bihar Assembly: शपथ ठीक से नहीं पढ़ने पर टोका तो अध्यक्ष को ही लगा दी थी झिड़की, कौन थीं वह विधायक?
Bihar Politics: बिहार विधानसभा में विधायकों द्वारा शपथ ग्रहण के दौरान शपथ पत्र पढ़ने में चूक की घटना पहली नहीं है। कई सदस्य सही ढंग से शपथ नहीं ले पात ...और पढ़ें

विधायक भागीरथी देवी और तेज प्रताप यादव, शपथ ग्रहण के दौरान। जागरण आर्काइव
डिजिटल डेस्क, पटना। Bihar News: "ईश्वर की सतत लेती हूं और ऐ छुटकी पढ़ न", के कारण बाहुबली राजवल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी (जदयू की नवादा से विधायक) चर्चा में हैं।
बिहार विधानसभा सत्र के पहले दिन प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव द्वारा शपथ दिलवाने पर, वह शपथ पढ़ने में अटकी थीं।
हालांकि, ऐसे विधायकों की संख्या कम नहीं है, जो शपथ लेने के दौरान अटके हों। 2015 में RJD (राष्ट्रीय जनता दल) सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव के साथ भी ऐसा हुआ था।
वे अपेक्षित को 'उपेक्षित' पढ़ गए थे। तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने तब उन्हें दोबारा शपथ लेने को कहा था। इसके बाद महुआ से निर्वाचित तेज प्रताप ने दोबारा शपथ ली।
भागीरथी देवी ने कहा-'चार बेर पढ़वाए हैं'
इस लिस्ट में एक नाम भागीरथी देवी का भी है। पश्चिम चंपारण के रामनगर विधानसभा से वह 2005 में दूसरी बार निर्वाचित हुई थीं। तब सदानंद सिंह आसन पर थे।
शपथ के दौरान बार-बार टोके जाने पर उन्होंने हल्के अंदाज में अपनी नाराजगी जताई थी। उन्होंने शपथ पत्र पढ़ना शुरू किया, 'मैं भागीरथी देवी, पश्चिम चंपारण... ।" इतना बोलते ही अध्यक्ष ने कहा, "वह बोलने की आवश्यकता नहीं है।"
इसके बाद वह अटकते हुए पढ़ने लगी। उन्होंने इसी क्रम में कहा, ''मैं शपथ लेती हूं।'' अध्यक्ष ने फिर टोका, ''ईश्वर की शपथ लेती हूं।'' इसे उन्होंने दोहराया। इसके बाद उन्होंने शपथ पत्र रख दिया।
अध्यक्ष ने कहा- "अभी और है, मैं भारत की प्रभुता...।" भागीरथी देवी ने कहा-बोले हैं सर, बोलनी ह त। उन्होंने जैसे-तैसे शपथ पढ़ा फिर कहा, ''चार बेर बोलबावल गइल है।''
पांच बार विधायक रह चुकी हैं भागीरथी देवी
भागीरथी देवी रामनगर विधानसभा क्षेत्र से 2010, 15 एवं 20 में लगातार तीन बार भाजपा के टिकट पर निर्वाचित हुईं। 2025 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वे पूर्व में 2000 और 2005 में शिकारपुर की विधायक भी चुनी गई थीं।
सदन में शपथ के दौरान विधायक विनय बिहारी और अशोक महतो की पत्नी अनिता देवी भी चर्चा में रहीं। ये दोनों शपथ पत्र से अलग पढ़ने लगे।

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