पटना, अरुण अशेष। Bihar Assembly Election: चुनाव का किस्मत कनेक्शन भी है। बिहार विधानसभा की सीटों की संख्या 243 है, जबकि उन विधायकों की संख्या 20 से भी कम है, जिन्हें लगातार चार और उससे अधिक चुनाव जीतने का मौका मिला है। कांग्रेस के सदानंद सिंह सर्वाधिक नौ बार जीत चुके हैं तो जीतन राम मांझी के नाम पर दल और क्षेत्र बदलने का रिकार्ड दर्ज है। बिहार के सारण के परसा सीट पर स्‍वतंत्रता प्राप्ति से लेकर अभी तक राष्‍ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय के परिवार का कब्‍जा रहा है।

सदानंद सिंह के नाम दर्ज सबसे अधिक नौ बार जीतने का रिकार्ड

सबसे अधिक नौ बार जीतने का रिकार्ड कांग्रेस के सदानंद सिंह के नाम दर्ज है। वे 1969 से कहलगांव विधानसभा से चुनाव जीत रहे हैं। एक बार निर्दलीय भी जीते। हालांकि उनकी जीत निर्बाध नहीं। बीच में ब्रेक भी है। 1990, 1995 और 2005 के अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी हार हो गई थी, जबकि फरवरी 2005 के चुनाव में वे जीत गए थे।

1990 से लगातार जीत रहे ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव 

ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव 1990 में सुपौल से विधायक बने। तब से लगातार जीत रहे हैं। इस बार जीते तो लगातार आठवीं जीत होगी। पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव 2020 में सातवीं जीत के लिए कोशिश करेंगे। वे 1995 से विधायक हैं। पहले पटना सिटी से विधायक हुआ करते थे। परिसीमन के बाद क्षेत्र का नाम पटना साहिब हो गया है। हाल में जनता दल यूनाइटेड छोड़ राष्‍ट्रीय जनता दल में गए श्याम रजक का रिकार्ड नंदकिशोर यादव से मेल खाता है। बस, 2009-10 में कुछ महीने का ब्रेक है। श्याम 2005 में आरजेडी के टिकट पर जीते। 2009 में जेडीयू में शामिल हुए तो विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उप चुनाव में हार हुई, लेकिन 2010 के विधानसभा चुनाव में फुलवारीशरीफ पर फिर से उनका कब्जा हो गया। वे पहली बार 1995 में विधानसभा चुनाव जीते थे।

कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार का विधानसभा में लगातार 30वां साल

लघु सिंचाई मंत्री नरेंद्र नारायण यादव मधेपुरा जिले के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से 1995 से लगातार जीत रहे हैं। कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार का विधानसभा में लगातार 30वां साल है। वे गया शहर से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतते हैं। रामनगर से बीजेपी की भागीरथी देवी सन् 2000 से लगातार जीतने वाले विधायकों में शामिल हैं। रक्सौल से बीजेपी के डॉ. अजय कुमार सिंह, धमदाहा से जेडीयू की लेसी सिंह और एकमा से जेडीयू के मनोरंजन सिंह का भी यही रिकार्ड है।

लालू यादव के समधी की पारिवारिक सीट है परसा

सारण जिला में परसा विधानसभा सीट को आप पारिवारिक मान सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय 1952 से 1972 तक इस क्षेत्र के विधायक रहे। 1977 के कांग्रेस विरोधी लहर में उनकी हार हुई। 1980 में वे सातवीं बार जीते। अगले साल उनका निधन हो गया। 1981 के उप चुनाव में उनकी धर्मपत्नी पार्वती देवी जीत गईं। 1985 में पुत्र चंद्रिका राय चुनाव जीते। तब से 2005 के चुनाव तक जीत का सिलसिला चला। 2005 के फरवरी वाले चुनाव में चंद्रिका जीत गए। उसी साल अक्टूबर में हुए चुनाव में उनकी हार हो गई। 2010 से अबतक वह विधायक हैं। आजादी के बाद से अबतक परसा में 17 चुनाव-उपचुनाव हुए। उनमें से 14 में दारोगा प्रसाद राय और उनके स्वजनों की जीत हुई।

जीतनराम मांझी के नाम दल व क्षेत्र बदलने का रिकार्ड

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के नाम दल और क्षेत्र बदलने का रिकार्ड दर्ज है। वे 1980 और 1985 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर फतेहपुर से जीते। 1996 में जनता दल के टिकट पर बाराचट्टी से उप चुनाव जीते। 2000 में क्षेत्र बदलकर बोधगया आ गए। 2005 में उनका क्षेत्र फिर बाराचट्टी हो गया और उम्मीदवार रहे जेडीयू के। 2010 में जेडीयू के टिकट पर मखदुमपुर से जीते। 2015 में अपनी पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के उम्मीदवार की हैसियत से मखदुमपुर और इमामगंज से चुनाव लड़े। मखदुमपुर में हार हो गई।

ये भी हैं अनुभवी दिग्गज

- आरजेडी विधायक अब्दुल बारी सिद्दीकी के पास भी लंबे समय तक विधायकी का अनुभव है। वह पहली बार 1977 में दरभंगा जिले के बहेड़ा से जनता पार्टी उम्मीदवार की हैसियत से जीते। बीच में ब्रेक हुआ। विधान परिषद के सदस्य बने। दोबारा 1995 के चुनाव में उनकी जीत हुई। तब से जीत का सिलसिला जारी है। हां, विधानसभा क्षेत्र का नाम बदल गया है। पहले बहेड़ा से जीतते थे। अब अलीनगर से जीत रहे हैं।

- मनीगाछी और दरभंगा ग्रामीण से जीतने वाले ललित कुमार यादव का नाम भी रिकार्ड बनाने वालों में शामिल है। ललित 1995 से लगातार विधायक हैं।

- कांग्रेस के डॉ. अशोक राम 1985 में पहली बार रोसड़ा से जीते। 1995 में उनकी हार हो गई। 2000 से जीत का सिलसिला फिर से शुरू हो गया।

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