प्रभात रंजन, पटना: भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता में लोकगीतों और लोक कलाओं की भूमिका को कभी भी नकारा नहीं गया। हर दौर और काल में इन कलाओं की मांग रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में कलाकार भोजपुरी गीतों को पॉप स्टाइल देकर लोगों को वोटों का महत्व बताने में लगे हैं। कलाकारों का उद्देश्य गीतों के जरिए वोट प्रतिशत को बढ़ाने और लोगों को जागरूक करना है।

गीतों के जरिए युवा मतदाताओं को करेंगे जागरूक 

मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अल्फाज बैंड और बोले जिंदगी फाउंडेशन की ओर से कार्य किया जा रहा है। फाउंडेशन के निदेशक राकेश सिंह सोनू ने बताया कि पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भोजपुरी गीतों के जरिए मतदाताओं को वोट की महत्ता बताने में जुटे हैं। गीतों को तैयार करने में 10 दिनों का समय लगा है। इस पूरी प्रकिया में गु्रप से जुड़े 5-6 लोगों को सहयोग मिला है। चुनाव को देखते हुए इस बार युवाओं पर फोकस किया गया है। गीतों को तैयार करने और संगीत देने वाले राकेश ने कहा कि ग्रुप के कलाकार सोशल मीडिया के अलावा चौक-चौराहे पर भोजपुरी पॉप स्टाइल में गीतों की धुन से वोटरों को वोट का महत्व बताएंगे। गीत को किसी पार्टी और मजहब से नहीं जोड़ा गया है, बल्कि चुनाव में अपने मत का अधिकार और विकास की बात पर जोर दिया जा रहा है।

गीतों के जरिए वोट की महत्ता और भाषा का विकास 

युवा गायक ध्रुव ने बताया कि चुनाव के दौरान विभिन्न पार्टियों से जुड़े प्रत्याशी कला और कलाकारों का प्रयोग वोटरों को रिझाने को लेकर कर रहे हैं। लेकिन उनका ग्रुप गीतों के जरिए वोट की महत्ता लोगों को बताने के साथ ही भाषा के विकास के लिए काम करेगा। गीतों में 'आइल बा चुनाव के मौसम, वोटवा करे के बा एकदम..., 'काहे कि हमनी के ई अधिकार बा हमनी के चुने के सरकार बा... और 'ना ही धरम देख के दिह, ना ही जात देख के दिह वोट दिह, दिह त खाली ए भइया विकास देख के दिह... जैसे गीत सुनने वाले भी खूब पसंद कर रहे हैं। 'एक-एक वोट के महत्व होला, लोकतंत्र में जनता भगवान हो ला... गीतों के जरिये वोटरों को उनकी ताकत से परिचय करा रहे हैं।

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