पटना, सुनील राज। महागठबंधन से हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) बाहर हो गया है। राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) पर गठबंधन को तोड़ने का आरोप लगाकर बाहर हुए हम प्रमुख जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) अलग जरूर हुए हैं, लेकिन अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा। ऐसे में बिहार की राजनीति में अहम फैक्‍टर बने मांझी पर अब सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अलावा असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi), पप्‍पू यादव (Pappu Yadav) व यशवंत सिंह (Yashwant Sinha) से उनके संपर्कों की चर्चा भी है।

महागठबंधन से अलग हाेंगे, पहले से मिल रहे थे संकेत

पिछले कुछ दिनों से मांझी जिस प्रकार से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की सराहना कर रहे थे, उससे यह संकेत मिलने लगा था कि वे जल्द ही महागठबंधन (Grand Alliance) से खुद को अलग करेंगे। उन्होंने इसकी पृष्ठभूमि भी करीब-करीब तैयार कर रखी थी। केवल एक मौके का इंतजार था। अब लोग यह जानना चाहते हैं कि मांझी अपनी अगली ठौर कहां बनाएंगे। ऐसी चर्चा है कि जदयू से उनकी बात करीब-करीब तय हो चुकी है।

जेडीयू के साथ अपने संबंधों को विस्तार देने की पूरी तैयारी

सूत्रों ने बताया कि हम ने जेडीयू के साथ अपने संबंधों को विस्तार देने की पूरी तैयारी कर ली है, लेकिन पार्टी के आधिकारिक सूत्र विलय से अभी इनकार कर रहे हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान कहते हैं कि हम पूरी तरह से अस्तित्व में रहेगा और जदयू में उसका विलय नहीं होगा। अलबत्ता जदयू के साथ गठबंधन से वे इनकार नहीं कर रहे।

मांझी के संपर्क में ओवैसी व पप्‍पू सहित कई दिग्‍गज

अंदरखाने यह भी चर्चा है कि मांझी के जेडीयू में जाने के ऐलान के पहले कुछ राजनीतिक सूरमा उनसे संपर्क कर चुके हैं। ऐसे लोगों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, जन अधिकार पार्टी के संरक्षक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और तीसरा मोर्चा के नेता नरेंद्र सिंह हैं।

ओवैसी चाहते हैं मांझी उनकी पार्टी के साथ गठजोड़ करें, ताकि सीमांचल की अधिक से अधिक सीटों पर जीत सुनिश्चित हो सके। पप्पू यादव पहले भी मांझी से अलग होने और नए समीकरण बनाने की बात करते रहे हैं।

यशवंत सिन्हा ने की तीसरा मोर्चा से जोडऩे की पेशकश

इधर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, जो कि तीसरा मोर्चा के संयोजक हैं, की ओर से भी मांझी से रिश्ते जोडऩे की पेशकश की गई है। हालांकि मांझी अब तक मौन हैं। वैसे चर्चा है कि तमाम अटकलों और चर्चाओं को विराम लगाते हुए वे जेडीयू के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे।

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