पटना, अरविंद शर्मा। Bihar Assembly Election 2020: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) के बजट (Union Budget) को बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से जोड़कर देखा जा रहा है। बिहार के राजनीतिक दलों ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सत्ताधारी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की कोशिश बजट के ब्योरे को वोट में तब्दील करने की है तो विपक्षी महागठबंधन (Grand Alliance) भी अपने तरीके से आम आदमी को बताने-समझाने में जुट गया है। दोनों की कोशिशों के बीच राजनीति शास्त्र है। दिल्ली के बाद देश की राजनीति का प्रमुख केंद्र बिहार बनने वाला है। तब बिहार के संदर्भ में बजट का बारीकी से विश्लेषण-अन्वेषण होगा। अपने-अपने तरीके से व्याख्या भी होगी।

केंद्रीय बजट के मजमून में बिहार के वोटरों का खास ख्याल

फिलहाल केंद्रीय बजट के मजमून में बिहार के वोटरों का खास ख्याल दिख रहा है। जाति आधारित राजनीति के लिए बदनाम इस प्रदेश में किसान और महिला सेक्टर को वोट बैंक में तब्दील करने की बड़ी कोशिश है। यहां की तीन चौथाई आबादी खेती पर निर्भर है और महिलाओं से वोटरों का व्यवहार बदलता रहा है। सर्वे बताता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के शराबबंदी अभियान के बाद सबसे ज्यादा सुकून में आधी आबादी है। लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में इसकी झलक भी दिखी, जब 40 में से 39 सीटों पर एनडीए ने कब्जा जमाया था।

विधानसभा चुनाव पर महिलाएं डाल सकती हैं बड़ा असर

महिलाओं को धान्य लक्ष्मी बनाने की मंशा से बजट में जो धनलक्ष्मी योजना की चर्चा की गई है, उससे सबसे ज्यादा फायदा बिहार को होता दिख रहा है। अभी देश में कुल 58 लाख स्वयं सहायता समूह हैं। इनमें जीविका के जरिए नौ लाख 50 हजार चार समूह सिर्फ बिहार में हैं। प्रत्येक समूह में 15 से 20 महिलाएं हैं। जाहिर है, बिहार की करीब डेढ़ करोड़ से ज्यादा महिलाएं धनलक्ष्मी योजना के जरिए आर्थिक तौर पर सशक्त बनेंगी, जो सत्ता पक्ष के लिए वोट बैंक का काम कर सकती हैं।

बिहार में विपक्ष की राजनीति करने वालों के लिए जीविका समूह पहले से भी सिरदर्द है। पिछले कुछ चुनावों से यह साबित भी होते आ रहा है। इसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों को अतिरिक्त पोषाहार के रूप में अलग से 664 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिससे वोटों में इजाफा से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

जात-पात से अलग बड़ा वोट बैंक बन सकते किसान

जात-पात से अलग दूसरा बड़ा वर्ग किसानों का है, जिसे केंद्र ने चालाकी से अपनी तरफ करने की कोशिश की है। बिहार में अभी एक करोड़ 61 लाख किसान परिवार हैं। इनमें से एक करोड़ 16 लाख निबंधित भी हैं। अभी 60 लाख किसान परिवार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े हैं। शेष के जुडऩे की प्रक्रिया जारी है। पात्र किसानों को क्रेडिट कार्ड योजना से जोड़कर सत्ता पक्ष ने दूसरा बड़ा दांव चला है।

वोट के मकसद से लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लाई गई इस योजना का फायदा प्रमाणित हो चुका है। जैविक खेती और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के प्रयासों का सीधा लाभ ग्रामीण मतदाताओं को मिलेगा, जो राजनीति को प्रभावित करेगा। जिला परिषद, प्रखंड समिति एवं ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए पांच हजार 18 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।

Posted By: Amit Alok

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