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विधानसभा में भाषा अकादमियों और विद्यालय भवन निर्माण पर चर्चा, बनेगी सर्च कमेटी

Published: Fri, 20 Feb 2026 03:21 PM (IST)

बिहार विधानसभा और विधान परिषद में शिक्षा संबंधी दो महत्वपूर्ण विषय उठाए गए। सरकार ने भाषा अकादमियों के एकीकरण और ...और पढ़ें

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार

HighLights

  1. भाषा अकादमियों के एकीकरण हेतु सर्च कमेटी का गठन होगा।

  2. विद्यालय भवन निर्माण में विधायकों की अनुशंसा को प्राथमिकता मिलेगी।

  3. डीएम समिति के निर्णय में विधायकों की भूमिका बढ़ेगी।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार विधानसभा और विधान परिषद में शुक्रवार को शिक्षा से जुड़े दो अहम मुद्दे उठे। एक ओर भाषा अकादमियों के एकीकरण और अध्यक्ष चयन को लेकर सरकार ने नई पहल की घोषणा की, वहीं विद्यालय भवन निर्माण में विधायकों की अनुशंसा को प्राथमिकता देने का मुद्दा भी सदन में गूंजा।

भाषा अकादमियों के लिए बनेगी सर्च कमेटी

विधान परिषद में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि मैथिली समेत राज्य की सभी भाषा अकादमियों को सुव्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन अकादमियों के एकीकरण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि वे प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

उन्होंने कहा कि भाषाई अकादमियों के लिए एक सर्च कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी संबंधित भाषा के विशेषज्ञ को अध्यक्ष पद के लिए चुनेगी। इससे अकादमियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और सक्रियता आएगी।

50 विधायकों का ध्यानाकर्षण प्रस्ताव

विधानसभा में एक साथ 50 विधायकों ने विद्यालय भवन निर्माण के मुद्दे पर ध्यानाकर्षण दिया। इतनी बड़ी संख्या में पहली बार ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया गया।

विधायकों ने आरोप लगाया कि जर्जर विद्यालयों के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए दी जा रही राशि का उपयोग मनमाने ढंग से हो रहा है। जहां भवन निर्माण की जरूरत है, वहां प्राथमिकता नहीं दी जा रही।

अनुशंसा को प्राथमिकता देने की मांग

विधायकों ने मांग की कि शिक्षा विभाग द्वारा स्वीकृत राशि से निर्माण कार्य उनकी अनुशंसा के आधार पर कराया जाए। एक विधायक ने निर्माण कार्य की जांच विधानसभा की कमेटी से कराने की मांग की।

नीतीश मिश्रा ने कहा कि विद्यालयों की प्राथमिकता की जानकारी तक विधायकों को नहीं दी जाती। वहीं विधायक सुनील कुमार ने कहा कि अनुशंसा को अपेक्षित महत्व नहीं मिलता।

सरकार का पक्ष

मंत्री श्रवण कुमार ने जवाब में कहा कि विद्यालय भवन निर्माण का निर्णय डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी लेती है। सभी कार्य निविदा प्रक्रिया से शैक्षिक आधारभूत संरचना के तहत कराए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक 1346 अनुशंसित विद्यालयों में काम पूरा हो चुका है और 44 में कार्य शेष है। जिलाधिकारियों को विधायकों की अनुशंसा को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया जाएगा।

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