औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती से बदलेगी बिहार के किसानों की तकदीर, सरकार तैयार कर रही समेकित व्यवस्था
बिहार सरकार सुगंधित तेल के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के लिए एक एकीकृत व्यवस्था विकसित कर रही है। इससे किसानों ...और पढ़ें

औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
सुगंधित तेल उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन की समेकित व्यवस्था।
किसानों की आय बढ़ेगी, कृषि उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
तुलसी, लेमनग्रास जैसी फसलों से रोजगार के अवसर।
राज्य ब्यूरो, पटना। सरकार सुंगधित तेल के उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग एवं विपणन तक की समेकित व्यवस्था विकसित करने पर बल दे रही है। इससे किसानों के उत्पाद को बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों के विकास एवं रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उक्त बातें कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मीठापुर स्थित कृषि भवन में बुधवार को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र विस्तार एवं मूल्य संवर्धन पर आयोजित कार्यशाला में किसानों से कही।
सुगंधित तेलों के उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आमदनी
उन्होंने कहा कि कृषि का विविधीकरण समय की आवश्यकता है। बिहार की कृषि-जलवायु परिस्थितियां तुलसी, लेमनग्रास एवं अन्य सुगंधित पौधों की खेती के अनुकूल हैं। इनकी वैज्ञानिक एवं बाजारोन्मुखी खेती से सुगंधित तेल के उत्पादन से किसानों की आमदनी बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि किसानों को उत्पादन के साथ आसवन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण, मानकीकरण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन से भी जोड़ना होगा। इससे मूल्य संवर्धन में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशालाओं, मानकों और बाजार संपर्क को मजबूत किया जाएगा। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर उपयुक्त फसलों की पहचान, उत्पादन क्लस्टरों के विकास, किसान प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार की रणनीति तैयार होगी।
प्रत्येक जिले से तीन किसानों को आमंत्रित किया गया
कार्यशाला में एसेंशियल आयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं महासचिव, विभागीय वरीय पदाधिकारी, सभी जिलों के उद्यान पदाधिकारी और औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसान शामिल हुए। प्रत्येक जिले से तीन किसानों को आमंत्रित किया गया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय और इस्लामपुर स्थित औषधीय एवं सुगंधित पौधों से संबंधित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के कृषि वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।
