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नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार के 8 जिलों में एईएस-जेई का खतरा, एक्शन मोड में स्वास्थ्य विभाग

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:26 PM (IST)

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार के आठ सीमावर्ती जिलों में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) का खतरा बढ़ गया है।

नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार के 8 जिलों में एईएस-जेई का खतरा (AI Generated Image)

नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार के 8 जिलों में एईएस-जेई का खतरा (AI Generated Image)

HighLights

  1. नेपाल बाढ़ से बिहार के सीमावर्ती जिलों में एईएस-जेई का खतरा बढ़ा।

  2. स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम और समय पर उपचार के लिए निर्देश जारी किए।

  3. टीकाकरण, सामुदायिक जागरूकता और जलजमाव नियंत्रण पर विशेष जोर।

राज्य ब्यूरो, पटना। नेपाल में हाल में आई भीषण बाढ़ और उसके बाद बदली पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) की आशंका बढ़ गई है।

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने अररिया, किशनगंज, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और सुपौल के सिविल सर्जनों को संभावित मामलों की रोकथाम और समय पर उपचार के लिए विशेष तैयारी का निर्देश दिया है।

सभी पात्र लाभार्थियों के जेई वैक्सीनेशन स्टेटस का सत्यापन होगा। यदि किसी बच्चे की जेई वैक्सीन की कोई डोज छूटी हुई है तो उसे पूरा कराया जाएगा।

निर्देश है कि समुदाय स्तर पर संदिग्ध केस की पहचान के साथ तेज बुखार, चमकी, असामान्य व्यवहार, चेतना में कमी तथा शारीरिक एवं मानसिक असंतुलन जैसे लक्षणों की तत्काल पहचान करना होगा। संदिग्ध मरीज को समय पर अस्पताल तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर 102 एंबुलेंस सेवा का उपयोग हो।

सीएसएफ/सीरम सैंपल लेने और उसे जांच के लिए भेजने को कहा गया है। संबंधित जानकारी को आइडीएसपी पोर्टल पर अपलोड करना है। आशा, एएनएम और सीएचओ समेत फ्रंटलाइन वर्कर्स घर-घर जाकर मस्तिष्क ज्वर से बचाव की जानकारी देंगे।

अस्पतालों में दवा-उपकरण:

अस्पतालों में आवश्यक दवाएं, आईवी फ्लुड्स, आक्सीजन, एंटीकन्वल्सेंट्स, ओआरएस तथा अन्य जरूरी उपकरण और औषधि किट पर्याप्त मात्रा में रखने को कहा गया है। बाढ़ राहत शिविरों में रहने वाले लोगों पर विशेष ध्यान देना है।

जलजमाव और मच्छर नियंत्रण:

जलजमाव वाले क्षेत्रों में लार्वल कंट्रोल और एंटी-लार्वल गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। जमा पानी को यथासंभव हटाने के साथ मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर फोकल इनडोर रेजिडुअल स्प्रेइंग, फागिंग और अन्य वेक्टर कंट्रोल गतिविधियां संचालित होंगी।

कई विभागों का प्रिपेयर्डनेस प्लान:

एईएस-जेई की रोकथाम के लिए इंटर-सेक्टरल को-ऑर्डिनेशन मजबूत किया जाएगा। जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर निकाय, पंचायती राज, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग, पशुपालन विभाग, पीएचईडी, आपदा प्रबंधन विभाग और जीविका के साथ संयुक्त प्रिपेयर्डनेस प्लान तैयार किया जाएगा।

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