अयोध्या में राम-जानकी की कहानी कहेंगी मिथिला की पेंटिंग, बिहार के 8 कलाकारों की कलाकृतियों का हुआ चयन
अयोध्या में 12 अक्टूबर को आयोजित होने वाली 'राम और रामायण' प्रदर्शनी में मिथिला चित्रकला संस्थान के आठ छात्रों की ...और पढ़ें

अयोध्या की प्रदर्शनी में 8 कलाकारों की कलाकृतियां चयनित
HighLights
अयोध्या में 12 अक्टूबर को 'राम और रामायण' प्रदर्शनी।
मिथिला चित्रकला संस्थान के 8 छात्रों की कलाकृतियां चयनित।
रामायण की कहानियों को मिथिला शैली में दर्शाया जाएगा।
राज्य ब्यूरो, पटना। अयोध्या में रामायण की कथा अब मिथिला की चित्रकला के रंगों में भी नजर आएगी। 12 अक्टूबर को आयोजित होने वाली भव्य प्रदर्शनी ‘राम और रामायण : देश से परदेश तक’ में मधुबनी के सौराठ स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान के आठ छात्र-छात्राओं की कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी।
खास बात यह है कि संस्थान के नौ विद्यार्थियों की ओर से सामूहिक रूप से तैयार की गई रामचरितमानस विषयक विशेष कलाकृति भी प्रदर्शनी का हिस्सा होगी।
राष्ट्रीय प्रदर्शनी में चुनी गईं 8 कलाकृतियां
कला एवं संस्कृति विभाग के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनी के लिए कुल 15 कलाकृतियों का चयन किया गया है। इनमें अकेले आठ कलाकृतियां मिथिला चित्रकला संस्थान के विद्यार्थियों की हैं।
बाकी सात कलाकृतियां देश के दूसरे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों की हैं। यह चयन मिथिला की पारंपरिक चित्रकला के लिए राष्ट्रीय मंच पर महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
निशा से पिंटू तक, इन कलाकारों की कृतियां होंगी प्रदर्शित
चयनित कलाकारों में निशा चौरसिया, दुर्गेश कुमार मंडल, शुभम प्रिया, रिया कुमारी, चंदा कुमारी, मुस्कान कुमारी, पूर्णिमा और पिंटू कुमार शामिल हैं।
इन कलाकारों की पेंटिंग अयोध्या में रामायण से जुड़े विविध पक्षों को सामने रखेंगी। इसके साथ नौ विद्यार्थियों की सामूहिक रामचरितमानस आधारित कलाकृति भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित करेगी।
अयोध्या में दिखेगा मिथिला का रामायण रंग
प्रदर्शनी का उद्देश्य रामायण की अलग-अलग परंपराओं और उसके विविध संस्करणों को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है।
अयोध्या जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल पर मिथिला चित्रकला के विद्यार्थियों की कलाकृतियों का पहुंचना बिहार की लोककला के लिए भी अहम अवसर है। इससे मिथिला की चित्र परंपरा को नए दर्शकों तक पहुंचने का मंच मिलेगा।
राम-जानकी की परंपरा से जुड़ी मिथिला की कला
मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा में राम और जानकी का विशेष स्थान रहा है। ऐसे में रामायण केंद्रित इस राष्ट्रीय प्रदर्शनी में मिथिला चित्रकला की मौजूदगी कला के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सामने लाएगी।
संस्थान के विद्यार्थियों के चयन से पारंपरिक कला सीख रहे युवा कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
मंत्री ने कलाकारों को दी बधाई
कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने इस उपलब्धि पर मिथिला चित्रकला संस्थान और चयनित कलाकारों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों की कलाकृतियों का चयन बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का गौरव है। अयोध्या में इन कृतियों की प्रदर्शनी से मिथिला चित्रकला को देश और दुनिया में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
अयोध्या से देश-दुनिया तक पहुंचेगी मिथिला की पहचान
मंत्री ने कहा कि मिथिला चित्रकला बिहार की सांस्कृतिक अस्मिता की महत्वपूर्ण पहचान है। राज्य सरकार प्रतिभाशाली कलाकारों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित कर रही है, ताकि बिहार की कला और संस्कृति को बड़े मंचों तक पहुंचाया जा सके।
12 अक्टूबर की प्रदर्शनी में रामायण के बहाने मिथिला की कला और कलाकारों को राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान दिखाने का अवसर मिलेगा।
