पटना, जेएनएन। राजधानी में दुर्गा पूजा के मौके पर मानक से अधिक शोर होता है तो सहायक अवर निरीक्षक (जमादार) स्तर के पदाधिकारी लाउडस्पीकर जब्त कर सकते हैं। प्रदूषण नियंत्रण नियमावली में दी गई शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं। बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पटना में अस्पताल, नर्सिग होम, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, जैविक उद्यान, सचिवालय और हाईकोर्ट के 100 मीटर के दायरे को शांत क्षेत्र अधिसूचित कर दिया गया है।

बोर्ड ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर पूजा के मौके पर ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है। दुर्गा पूजा के अवसर पर भारी शोर के मद्देनजर बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून को अमल में लाने के लिए गुरुवार को परामर्श जारी किया है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सहायक वन संरक्षक और जिला खनन पदाधिकारी को प्राधिकृत किया है। वर्ष 2017 में पटना में 491 जगहों पर ध्वनि प्रदूषण की जांच की थी। जांच में 394 स्थल ऐसे थे, जहां सामान्य ध्वनि मानक 40 डेसीबल के विरूद्ध 75 डेसीबल पाया गया।

शहर में पांच जगहों पर सामान्य से तीन गुना 105 डेसिबल रिकार्ड किया गया। बीते साल शहर में 668 स्थलों पर ध्वनि स्तर मापा गया था, जिसमें अधिकांश जगहों पर 75 डेसीबल से अधिक शोर पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार 258 पूजा पंडालों में ध्वनि का स्तर 90 से 100 तक था और 36 जगहों पर 100 डेसीबल से भी अधिक पाया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार रात 10.00 बजे से सुबह 6.00 बजे तक लोगों को चैन की नींद के लिए अलग-अलग क्षेत्र में ध्वनि का मानक निर्धारित है। मानक से अधिक ध्वनि उत्पन्न करना दंडनीय है। प्रदूषण नियंत्रण कानून 2016 के तहत अब सहायक अवर निरीक्षक ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले यंत्र को जब्त कर कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

ध्वनि मानक डेसीबल में

क्षेत्र दिन में रात में

आवासीय - 55 - 45

साइलेंस एरिया- 50 -40

वाणिज्य क्षेत्र- 65 - 55

औद्यौगिक क्षेत्र- 75 - 70

Posted By: Akshay Pandey

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस