लखीसराय [जेएनएन]। बिहार में एक और घोटाला उजागर हुआ है। मामला लखीसराय जिले के चानन में  नियोजित शिक्षकों के नाम पर अवैध निकासी का है। वहां फर्जी शिक्षकों के नाम पर वेतन का भुगतान करके अवैध निकासी की गई है। कई शिक्षकों को तो बिना उपस्थिति विवरणी का भी वेतन भुगतान किया गया है। इस खेल में चानन के प्रखंड साधनसेवी (बीआरपी), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) से लेकर जिला शिक्षा कार्यालय तक कठघरे में है।

लखीसराय की डीईओ सुनयना कुमारी ने माना कि चानन शिक्षा कार्यालय से काफी घालमेल हुआ है। इसकी जांच के लिए टीम का गठन किया गया है।

बीईओ कार्यालय दो वर्षों से दबी पड़ी फाइल

चानन बीईओ कार्यालय में गत कई वर्षों से कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी बीआरपी के रूप में शिक्षक काम कर रहे हैं। तीन में से एक बीआरपी फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड माना जाता है। वर्ष 2017 में निगरानी अन्‍वेषण ब्‍यूरो ने चानन प्रखंड के 26 शिक्षकों के नियोजन को संदिग्ध पाते हुए चिह्नित किया था। इसके बाद तत्कालीन डीपीओ स्थापना विजय कुमार मिश्र ने 25 सितंबर 2017 को बीईओ से नियोजन की वैधता की जांच कर रिपोर्ट मांगते हुए उक्त शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी थी। इसके बाद डीपीओ बदल गए। उधर चानन बीईओ कार्यालय में कार्यरत माफिया की टीम ने इन संदिग्ध शिक्षकों की जांच की फाइल को दबा दिया और वेतन का भुगतान भी करा लिया। 

संदिग्ध शिक्षकों में तीन पर मुकदमा

चानन के जिन 26 संदिग्ध शिक्षकों को चिह्नित किया गया था। उनमें से प्राथमिक विद्यालय गोबरदाहा के चंदन कुमार-2, प्राथमिक विद्यालय सुंदरपुर मुसहरी की सीता कुमारी एवं कृष्ण कुमार के खिलाफ निगरानी ने चानन थाना में पूर्व में ही मुकदमा किया है। प्राथमिक विद्यालय निमतर बिछवे के राममूर्ति कुमार, दिलीप कुमार, उत्क्रमित मध्य विद्यालय इटहरी के अशोक कुमार, प्राथमिक विद्यालय बेलदारिया मोरवे डेम के ओंकार कुमार चौधरी, कनक कुमारी को नियोजन रद होने के बाद भी वेतन भुगतान किया गया है। प्राथमिक विद्यालय हरिजन टोला इटौन की शिक्षिका नूतन कुमारी का नियोजन 2016 में विभाग ने अवैध माना। लेकिन उनको 2013 से वेतन भुगतान कर दिया गया।

Posted By: Amit Alok

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