पटना, जागरण टीम। बिहार में कोरोना की रफ्तार में थोड़ी कमी आई है। शनिवार को महज एक मरीज मिला है। शनिवार को बिहार के तीन अस्‍पतालों में लगभग 350 लोगों के सैंपल की जांच हुई, जिसमें से एक मरीज पॉजिटिव पाया गया। इस तरह, कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्‍या 32 हो गई। उधर, मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को भी कोरोना को लेकर हाई प्रोफाइल मीटिंग की। जिले के स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों से बात की। कई आवश्‍यक निर्देश दिए। नालंदा में म्‍यूजिकल थेरेपी से जमातियों का इलाज किया गया। कोरोना राउंडअप में शनिवार की दिनभर की खबरें पढ़ें एक साथ। 

336 सैंपल की हुई जांच, एक की रिपोर्ट पॉजिटिव 

कोरोना वायरस की जांच को बनाए गए तीन केंद्र राजेंद्र मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, इंदिरा गांधी आयुॢवज्ञान संस्थान और दरभंगा मेडिकल कॉलेज ने शनिवार को शाम सात बजे तक कुल 336 सैंपल की जांच की। इसमें एक रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। कोरोना का प्रकोप बढऩे के बाद ये तीन संस्थान मेडिकल कॉलेजों के जरिए एकत्र सैंपल की जांच कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बिहार में 04 अप्रैल तक कुल 2682 सैंपल की जांच हुई है। जिसमें अब तक राज्य में कोरोना के कुल 32 सैंपल पॉजिटिव मिले हैं।  

शुक्रवार को मिले थे दो नए केस 

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया शनिवार को शाम सात बजे तक तीन संस्थानों से जो रिपोर्ट मिली है उसके अनुसार राज्य में आज कोई पॉजिटिव केस नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को दो नए केस सामने आए थे। इसके पूर्व तक राज्य में कोरोना पॉजिटिव केस की संख्या 29 थी। दो केस मिलने के बाद यह संख्या 31 हो गई थी।

आज 767 नए संदिग्ध ऑब्जर्वेशन में भेजे गए

स्वाथ्य विभाग ने कोरोना के संदेह में शनिवार को 767 और संदिग्धों को ऑब्जर्वेशन में लिया है। फिलहाल ये सभी 14 दिन क्वारंटाइन में रहेंगे। इस दौरान इनके सैंपल लेकर जांच को भेजे जाएंगे। 767 लोगों को ऑब्जर्वेशन में लेने के बाद राज्य में संदिग्धों की कुल संख्या 7448 हो गई है। शुक्रवार तक यह संख्या 6681 थी। 

कुल पॉजिटिव मामले एक नजर में 

कुल मामले - 32

मुंगेर -7, पटना - 5, गया - 5, सिवान - 6, लखीसराय -1, गोपालगंज - 3, बेगूसराय -1, नालंदा - 2, सारण- 1 व भागलपुर- 1 

664 ने पूरी की 14 दिन के क्वारंटाइन की अवधि

स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया कि विभाग ने 14 दिन की ऑब्जर्वेशन की अवधि पूरी करने वाले 664 लोगों की सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी है।  

जिलावार कोरोना के संदेह में ऑब्जर्वेशन में लिए गए लोग 

सिवान - 3105, गोपालगंज - 705, पटना - 158, गया - 135 ,भागलपुर -136, भोजपुर - 81, मुजफ्फरपुर - 427, समस्तीपुर - 105, सारण - 425, नालंदा - 206, पू. चंपारण - 269, प. चंपारण 113, किशनगंज - 173, मधुबनी - 109, रोहतास - 281, दरभंगा - 345, औरंगाबाद- 55, जहानाबाद - 22, कैमूर - 13, सीतामढ़ी - 7, अररिया - 2, सुपौल - 7, मधेपुरा - 9, वैशाली -87, बांका - 4, सहरसा - 20, शिवहर - 7, मुंगेर - 18, लखीसराय - 13, बेगूसराय - 7, नवादा - 59, कटिहार - 3, पूर्णिया - 6, बक्सर - 5, अरवल - 1, जमुई -1, खगडिय़ा - 37 

सीएम नीतीश ने की कोरोना को लेकर आवश्‍यक मीटिंग

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को सूबे के चिकित्सकों के साथ कोरोना वायरस के संक्रमण को ले चल रहे इलाज व राहत कार्याें पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि अन्य बीमारियों के इलाज को ले लोगों को असुविधा नहीं हो। इसके लिए अन्य अस्पतालों को भी कार्यरत करना होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मुख्यमंत्री को अद्यतन स्थिति की जानकारी दी और सरकार के स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। दस दिन के भीतर यह दूसरा मौका है जब मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ कोरोना वायरस के संक्रमण पर वीडियो कांफ्रेंङ्क्षसग के माध्यम से बात की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की सुविधा के लिए हर जरूरी इक्विपमेंट भी उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे डॉक्टर, पारा मेडिकल स्टाफ व नर्स के साथ-साथ पुलिस व प्रशासन के अधिकारी राज्य की जनता के सहयोग के लिए अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। एनएमसीएच को कोविड-19 के इलाज के लिए विशेष अस्पताल के रूप में चिन्हित किया गया है। वहां काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सेेज और पारा मेडिकल स्टाफ के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैंं।

संकट में भी बिहार की मांग पर विचार नहीं : तेजस्वी

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र पर बिहार के साथ नाइंसाफी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि संकट की घड़ी में भी बिहार की मांगों पर विचार नहीं किया जा रहा है। दूसरे राज्यों की तुलना में बिहार को कम स्वास्थ्य सुरक्षा उपकरण मिल रहे हैं। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछा है कि क्या डबल इंजन की सरकार में भी बिहार को ऐसा ही सिला मिलेगा? कई छोटे राज्यों में कोरोना का प्रकोप कम रहने के बावजूद  अधिक उपकरण दिए जा रहे हैं। बिहार ने राजग को 50 सांसद दिए हैं। छह केंद्रीय मंत्री भी हैं। सबको राजनीति से ऊपर उठकर बिहार के लोगों के उपचार एवं बचाव के लिए मुखर होना चाहिए। 

लाॅकडाउन के उल्लंघन मामले में अब तक 757 प्राथमिकी

कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने को केंद्र में रख लागू लाकडाउन के आदेश के उल्लंघन के आरोप में बिहार में अब तक 757 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है। वहीं 16357 वाहनों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम की धारा 179 के तहत कार्रवाई की गयी है। शनिवार को आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा इस आशय की आधिकारिक जानकारी दी गयी। शनिवार को राज्य के शहरी इलाके में रह रहे निराश्रित लोगों के लिए 142 आपदा राहत केंद्र संचालित किए गए। यहां 13100 लोगों को भोजन कराया गया। 

बिहार में और एक दर्जन जमाती क्वारंटाइन

बिहार के विभिन्न जिलों से शनिवार को तब्लीगी जमात के 12 लोगों की पहचान कर आइसोलेशन में भेजा गया। उनकी कोरोना जांच भी कराई जाएगी। उधर, बिहार सरकार को तब्लीगी मरकज जाने वालों की एक और सूची मिली है, जिसके आधार पर संदिग्धों को खोजकर क्वारंटाइन कराया जा रहा। सर्वाधिक लोग उत्तर बिहार और पूर्व बिहार के जिलों से मिल रहे। देश के अन्य हिस्सों में जमात में शामिल लोगों में कोरोना संक्रमण के सर्वाधिक मामले सामने आने के बाद सतर्कता और सक्रियता बढ़ा दी गई है। शनिवार को उत्तर बिहार में जमात से जुड़े 10 लोगों की पहचान हुई, जिनमें नौ लोग मधुबनी और एक दरभंगा के हैं। सिवान के सोहिलपट्टी की एक महिला और एक पुरुष को तब्लीगी जमात से जुड़े होने होने पर क्वारंटाइन किया गया है।

तब्लीगी जमात में भाग लेनेवाले तीन लोगों की पहचान

मधुबनी के मधवापुर से तब्लीगी जमात में भाग लेनेवाले तीन लोगों की पहचान की गई। इन्हें पुलिस की सहायता से मध्य विद्यालय, मधवापुर में क्वारंटाइन किया गया। इनमें एक महिला भी है। दूसरी ओर हरलाखी प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों से जमात से जुड़े छह लोगों की पहचान हुई। उन्हें क्वारंटाइन किया गया है। अभी हरलाखी के पांच जमातियों की तलाश है। यहां के कुल 11 लोगों के तब्लीगी जमात में शामिल होने की बात सामने आ रही है। खुटौना से पहले ही जमात से जुड़े दो लोगों को क्वारंटाइन किया गया था।  

सभी डॉक्‍टरों की निगरानी में

दरभंगा में तब्लीगी जमात से जुड़े एक युवक को डीएमसीएच के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया। युवक का बड़ा भाई डीएम के इस्कॉर्ट का ड्राइवर बताया जाता है। एहतियात के तौर पर उसे भी आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। दोनों के नमूने लिए गए हैं। इनके परिवार में 12 सदस्य हैं। सभी डॉक्टरों की निगरानी में हैं। पूर्वी चंपारण के 13, पश्चिम चंपारण के आठ और मुजफ्फरपुर के 15 जमातियों का मामला पहले ही सामने आ चुका है। पूर्वी चंपारण के 11 को दिल्ली और एक को जिले में क्वारंटाइन किया गया है। यहां के रक्सौल के एक शख्स की तलाश जारी है। वहीं, पश्चिम चंपारण में तीन को क्वारंटाइन किया गया है। पांच की तलाश जारी है। मुजफ्फरपुर में सभी को क्वारंटाइन किया गया है।

नालंदा के मदरसे से निकाले गए पांच मौलाना और दो बच्चे

नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल के करायपरसुराय स्थित मदरसे में छिपे तब्लीगी से जुड़े पांच मौलाना और दो बच्चों को निकालकर क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है। सभी अररिया, सहरसा एवं सुपौल जिले के हैं। थानाध्यक्ष अवधेश प्रसाद ने मदरसे में छापेमारी की। पटना में सिटी में तब्लीगी जमात से काठ पुल के समीप आए एक व्यक्ति का नमूना जांच के लिए आरएमआरआइ भेजा गया है। फुलवारीशरीफ में जमात से लौटे तीन लोगों ने अपना ब्लड सैंपल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर दिया। तीनों ने फुलवारीशरीफ थाना पहुंचकर आवेदन दिया था कि वे जमात में शामिल हुए थे। 

लॉकडाउन के दौरान अनुशासन में बिहार के चार जिले अव्वल

सरकार द्वारा कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगाए गए लॉकडाउन में अनुशासन तोडऩे के मामले में 23 मार्च से तीन अप्रैल तक बिहार में करीब 100 से अधिक लोग जेल जा चुके हैं। वहीं, चार जिले ऐसे भी हैं जहां लॉकडाउन के इन 13 दिनों में एक भी एफआइआर दर्ज करने की नौबत नहीं आई। इनमें किशनगंज, सुपौल, जमुई और शेखपुरा शामिल हैं।  बिहार के 40 पुलिस जिलों में 12 जिले ऐसे हैं जहां अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया, जबकि नालंदा, पटना और सिवान के अलावा गया जिले के लोगों ने लॉकडाउन की जमकर धज्जियां उड़ाई है। यही वजह है कि यहां सर्वाधिक मुकदमे भी दर्ज किए गए। इन जिलों से लोग जेल भी गए और जुर्माना भी भरा। वहीं अरवल, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, नवगछिया, मुंगेर, शेखपुरा, जमुई, लखीसराय और खगडिय़ा में अभी तक किसी की गिरफ्तारी की नौबत नहीं आई लेकिन इन जिलों में लोगों की गाडिय़ां जब्त हुईं और जुर्माना भी भरा गया।

3 अप्रैल तक में भरा 1.80 करोड़ रुपये जुर्माना 

23 मार्च से तीन अप्रैल तक यानी पिछले 12 दिनों के लॉकडाउन में बिहार पुलिस ने 8100 से अधिक गाडिय़ां जब्त कीं, जबकि 384 लोगों को जेल भेजा गया तथा 578 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई। अहम यह कि इस अवधि में लोगों ने 1.80 करोड़ रुपये का जुर्माना भी भरा।

पटना में सर्वाधिक वाहन जब्त

बिहार के 40 पुलिस जिलों में सरकार के आदेश की अनदेखी करने में पटना वाले अव्वल रहे। यह बात जिलेवार भेजी गई रिपोर्ट में सामने आई है। नालंदा जिले की पुलिस ने सर्वाधिक 165 एफआइआर दर्ज की। दूसरे नंबर पर सिवान के लोगों ने लॉकडाउन का उल्लंघन किया। सरकार के आदेश की अनदेखी में तीसरा स्थान कटिहार जिले का रहा। जबकि चौथे नंबर पर गया वाले रहे। अररिया जिले में सर्वाधिक लोगों की गाडिय़ां लॉकडाउन के उल्लंघन में पकड़ी गईं। 

पटना में 171 घरों पर होम क्वारंटाइन का पोस्टर चस्पा

पटना नगर निगम ने अब तक 171 बाहरी व्यक्तियों की पहचान कर उनके घरों पर होम क्वारंटाइन आइसोलेशन का पोस्टर लगाया है। इन्हें14 दिनों तक घर से बाहर नहीं निकलना है। राजधानी के कंकड़बाग अंचल में सर्वाधिक 97 मकानों पर पोस्टर लगाए गए हैं। बांकीपुर अंचल में 30, पाटिलपुत्र अंचल 25, पटना सिटी अंचल में 11, अजीमाबाद अंचल में आठ मकानों पर पोस्टर लगे हैं। नूतन राजधानी अंचल के किसी भी मकान पर पोस्टर नहीं लगा है। जिला प्रशासन की तरफ से विदेशों और दूसरे राज्यों से आने वालों की सूची अंचलों को उपलब्ध कराई गई है। सूची में कई का पता स्पष्ट नहीं होने और मोबाइल नंबर नहीं मिलने के कारण उनके घरों तक निगमकर्मी नहीं पहुंच पाए हैं। शहरवासी भी इसमें ज्यादा सहयोग नहीं कर रहे। सर्वे के माध्यम से विदेशी और बाहरी व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। 

दो श्रेणियों में बांट अस्पताल में भर्ती किए जाएंगे कोरोना संक्रमित

बिहार में कोरोना संक्रमित व्यक्तियों को दो श्रेणियों में बांटकर मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में बनाए गए आइसोलेशन व ट्रीटमेंट सेंटर में भर्ती किया जाएगा। आइसोलेशन व ट्रीटमेंट सेंटर बनाने के लिए अस्पताल चिन्हित कर लिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने सभी जिला अधिकारी व सिविल सर्जनों को सरकार के इस निर्णय से अवगत करा दिया है। जिलों को उपलब्ध कराई जानकारी के अनुसार कोरोना के ऐसे पॉजिटिव मरीज जिन्हें विशेष चिकित्सा सहायता की आवश्यकता नहीं होगी, उन्हें श्रेणी -एक में रखा गया है। वहीं विशेष चिकित्सा सहायता की आवश्यकता वाले मरीजों को श्रेणी-दो में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इसी आधार पर अब कोरोना संक्रमित व्यक्ति अस्पतालों में भर्ती किए जाएंगे।

सभी मेडिकल कॉलेजों में कोरोना जांच का प्रस्ताव

बिहार में कोरोना वायरस के संदिग्ध और संक्रमित केस में हर रोज हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए राज्य में और जांच केंद्र के लिए सरकार इंडियन कॉउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) को लिखेगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा बिहार में जांच केंद्रों में जांच किट की कमी और कोरोना के खिलाफ जंग में डटे डॉक्टरों, नर्सों के साथ ही अन्य पारा मेडिक्स के लिए आवश्यक उपकरणों के लिए भी केंद्र को लिखा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो सरकार ने पटना एम्स व राज्य के सभी नौ मेडिकल कॉलेज अस्पताल और तीन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में जांच केंद्र शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। 

परेशान बच्चे मनोचिकित्सक से सीधे कर सकेंगे बात

कोरोना वायरस की मेडिकल गाइडलाइन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण सोशल डिस्टेङ्क्षसग ने बच्चों को सबसे अधिक परेशान कर रखा है। घर में अपने अभिभावकों के साथ रहे बच्चे हों या फिर समाज कल्याण विभाग के विभिन्न शेल्टर होम में रह रहे बच्चे, सभी के व्यवहार में परिवर्तन दिख रहा है। समाज कल्याण विभाग के एक आला अधिकारी ने बताया कि बच्चों में एक खास तरीके का भय व्याप्त हो गया है। कहीं-कहीं से उन्हें अधिक गुस्सा आने की शिकायत भी मिल रही है। शेल्टर होम के बच्चे असहाय भी महसूस कर रहे। उनकी इन समस्याओं को ध्यान में रख जिलों में काम कर रहीं चाइल्ड वेलफेयर यूनिट व  डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट के माध्यम से उनकी कांउसिङ्क्षलग की गयी थी। अब नयी व्यवस्था यह शुरू की गयी है कि परेशान बच्चों के लिए मनोचिकित्सकों का एक पैनल तैयार कर उनके मोबाइल नंबर  सार्वजनिक किए गए हैं। मनोचिकित्सकों को एक टाइम स्लॉट दे दिया गया है। उस अवधि में उनके मोबाइल नंबर पर फोन कर परामर्श लिया जा सकेगा।

क्वारंटाइन सेंटर में भी अब ली जाएगी आयुष चिकित्सकों की सेवा

बिहार में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अब सरकार ने आइसोलेशन व ट्रीटमेंट सेंटर के साथ क्वारंटाइन सेंटर में आयुष चिकित्सकों की भी सेवा लेने का फैसला किया है। आयुष चिकित्सकों की सेवा लेने के संबंध में सभी जिलाधिकारियों क्षेत्रीय अपर निदेशक और मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्वास्थ विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि यह फैसला केंद्र सरकार के स्तर पर लिया गया है इसलिए अब आयुष डॉक्टरों की सेवा लेने के लिए रोस्टर बना लिया जाए। 

 

Posted By: Rajesh Thakur

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