पटना [जेएनएन]। भागभाग दौड़ की जिंदगी में किसी को पता ही नहीं चलता कि वह किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो चुका है। जब वह बीमार पड़ता है तब जाकर पता चलता है कि उसे किसी गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया है। इसमें प्रमुख रूप से कैंसर और एनीमिया जैसी बीमारी है जिसका पता बहुत देर बाद चलता है। यदि मरीजों को सही समय पर बीमारी का पता चल जाए तो बहुत हद बीमारी से निजात मिल सकती है। और एनीमिया जैसी बीमारी का इलाज बोन मैरो प्रत्यारोपण से काफी हद तक सफलता पाई जा सकती है।

वैसे देखा जाए तो प्रदेश में कैंसर सेंटर की भारी कमी है। इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है। सूबे जहां सौ कैंसर सेंटर की जरूरत पड़ती है वहां अभी मात्र तीन ही कैंसर सेंटर है। यही कारण है कि सूबे के कैंसर पीड़ितों की सही समय पर पहचान नहीं हो पा रही है और कारगर इलाज नहीं हो पाता। प्रत्येक पांच लाख की आबादी पर एक कैंसर सेंटर स्थापित होने से मरीजों का बेहतर इलाज किया जा सकता है। उक्त बातें कैंसर विशेषज्ञों के सम्मेलन में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. राजेश बडवे ने कहीं। उन्होंने कहा कि देशभर के कैंसर के मरीजों का केवल मुंबई में इलाज नहीं किया जा सकता, राज्यों में भी कैंसर हॉस्पिटल खोलने की जरूरत है।

डॉ. राजेश बडवे ने कहा कि टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल जल्द ही मुजफ्फरपुर में एक सेंटर स्थापित करेगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। अगले दो-तीन माह में सेंटर काम करना शुरू कर देगा। सम्मेलन आयोजन समिति के को-चेयरमैन डॉ. वीपी सिंह ने कहा कि सूबे में पांच लाख से अधिक कैंसर के मरीज हैं। प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक मरीजों की पहचान हो रही है। ऐसे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है ताकि बीमारी को प्रारंभिक अवस्था में इलाज से ठीक किया जा सके। दिल्ली से आए राहुल भार्गव ने कहा कि एनीमिया की बीमारी काफी तेजी से फैल रही है। बोन मैरो प्रत्यारोपण से ठीक किया जा सकता है। कोलकाता से आए डॉ. संदीप गांगुली ने कहा कि फेफड़े का कैंसर तेजी से पांव पसार रहा है। अगर कैंसर मरीजों का सही तरीके से इलाज हो तो एक साल से अधिक तक उन्हें जीवित रखा जा सकता है। दिल्ली से आए डॉ. दुर्गातोष पांडेय ने कहा कि फेफडे़ के कैंसर में सर्जरी काफी कारगर है, लेकिन पूरी जांच के उपरांत ही होनी चाहिए। सम्मेलन में धन्यवाद ज्ञापन पटना एम्स की कैंसर रोग विशेषज्ञ एवं आयोजन समिति की सचिव डॉ. प्रीलांजलि सिंह ने किया।

By Jagran