पटना, जेएनएन। देश में सबसे प्रदूषित हवा वाले शीर्ष 10 शहरों में पटना भी शामिल हो गया है। यही नहीं राज्य के मुजफ्फरपुर और गया जिले की हवा का गुणवत्ता स्तर भी बेहद खराब हो गया है। बिहार में पटना सबसे प्रदूषित शहर की श्रेणी में पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा रविवार को जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार पटना का पीएम2.5 का स्तर 428 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकॉर्ड किया गया। 

इसकी वजह ये है कि बाढ़, बख्तियारपुर और दूसरे निकटवर्ती इलाकों में धान की पराली जलायी जा रही हे जिस से बनी धुंध राजधानी पर छायी हुई है। इसके अलावा शहर में  बिना ढके हो रहे सरकारी निर्माण कार्यों के चलते  भी घातक धूल कणों (पीएम 2.5 ) ने प्रदूषण के स्तर को बढ़ा दिया है। 

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने खेतों में कचरा या पराली जलने की शिकायत आधिकारिक पत्र में डीएम से की है।डीएम को लिखा गया है कि कृषि विभाग के सहयोग से इस प्रवृत्ति पर तत्काल लगाम लगाने की जरूरत है, अन्यथा हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल एक हफ्ते से राजधानी की हवा की गुणवत्ता अप्रत्याशित तौर पर खराब हो गयी है। इन हालातों पर नियंत्रण पाने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संबंधित विभागों की  जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाने जा रहा है।

 राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आलोक कुमार ने कहा कि  हमने पराली जलाने की औपचारिक सूचना पटना डीएम को देकर आग्रह किया है कि कृषि विभाग के सहयोग से इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएं। पंजाब  और हरियाणा में पराली जलाये जाने का असर भी  बिहार की हवा  पर पड़ता है। 

पटना में प्रदूषण के हालात एक्यूआइ (एयर क्वालिटी इंडेक्स) के आधार पर

तिथि एक्यूआइ हवा की गुणवत्ता 

28 अक्तूबर 334 बहुत खराब 

29 अक्तूबर 365 बहुत खराब 

30 अक्तूबर 359 बहुत खराब 

31 अक्तूबर 347 बहुत खराब 

1 नवंबर 357 बहुत खराब 

2  नवंबर 428 कष्टप्रद, घातक

3 नवंबर 413 कष्टप्रद,घातक

वहीं, गया में पीएम2.5 का स्तर 317 माइक्रोग्राम और मुजफ्फरपुर में 369 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया। रविवार को पटना में सुबह से धुंध छाई रही। हवा में नमी की मात्रा 91 फीसद होने के कारण धूल कण वायुमंडल के निचले स्तर पर छाए रहे। गंगा किनारे छठ व्रतियों के वाहनों के आवागमन से वायुमंडल में धूलकण अधिक दिखे। 

बीते साल 3 नवंबर को पटना में पीएम 2.5 का स्तर 288 माइक्रोग्राम रिकॉर्ड किया गया था। पिछले साल की तुलना में इस बार पटना का पीएम 2.5 का स्तर करीब 140 माइक्रोग्राम अधिक दर्ज किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार पटना में हिमालय की ओर से आ रही हवा के साथ गंगा किनारे की धूल शहर में बढ़ रही है। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नगर निगम को सड़कों पर पानी का छिड़काव करने का परामर्श दिया गया है। 

वायु प्रदूषण की स्थिति 

शहर का नाम   - पीएम 2.5 

फरीदाबाद      -  496

गुरुग्राम         - 486

हापुड़           - 471

हिसार          - 445

 

Posted By: Kajal Kumari

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