पटना। चीन से फैले कोरोना वायरस का संक्रमण अभी समाप्त भी नहीं हुआ कि चीनी केमिकल देश के समक्ष दूसरा खतरा पैदा करने लगा है। चीन से पुडि़या नाम के इस केमिकल का प्रयोग इन दिनों फल बाजार में उपयोग हो रहा है। इसमें मुख्य रूप से कार्बाइड का चूर्ण होता है। हालांकि कार्बाइड से फलों के पकाने पर केंद्र सरकार पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है, ऐसे में चीन कार्बाइड का चूर्ण पुड़िया के रूप में आपूर्ति कर रहा है।

दुकानदार बड़े पैमाने पर इस पुड़िया का उपयोग फलों को पकाने के लिए कर रहे हैं, इसमें आम, लीची एवं केला प्रमुख हैं। वर्तमान में आम का मौसम है। बाजार में एक से बढ़कर एक प्रजाति के आम मौजूद हैं। बिहार में आम के साथ-साथ लीची का भी मौसम है।

स्वास्थ्य विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि अब व्यापारी फलों को पकाने के लिए पुड़िया का उपयोग कर रहे हैं। फलों की टोकरी में एक पुड़िया चीनी केमिकल रख दिया जाता है। उसके बाद फलों पर पानी का छिड़काव कर दिया जाता है। पानी की बूंदें जैसे ही पुड़िया के संपर्क में आती हैं, उससे एसिटिलीन गैस निकलने लगती है। गैस के प्रभाव से फल चार से पांच घंटे में हरा से पीला हो जाता है।

इसके अलावा कुछ दुकानदार फलों को पकाने के लिए इथोपॉन नामक केमिकल का उपयोग कर रहे हैं। इस कमेकिल का उपयोग आम के पेड़ों पर सामान्यत: किया जाता है। इस केमिकल का छिड़काव होने से पेड़ों से आम कम झड़ते हैं। इस केमिकल को एक लीटर पानी में एक एमएल मिलाकर फलों को धोकर रख दिया जाता है। इसके बाद फल तेजी से पकने लगते हैं। वर्तमान में अधिकांश केमिकल चीन से बड़े पैमाने पर आ रहे हैं। पाचनतंत्र से लेकर लिवर-किडनी तक करता डैमेज

पटना मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के प्राचार्य डॉ. विद्यापति चौधरी का कहना है कि एसिटिलीन गैस से पकने वाले फल सबसे ज्यादा पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं। पाचन तंत्र में गड़बड़ी होने पर पूरा शरीर विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाता है। इसके अलावा गैस से पकने वाले फल लिवर और किडनी को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

वहीं पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राकेश कुमार शर्मा एसिटिलीन गैस से पके फलों को खाने से सिर दर्द, चक्कर आना, तनाव, दिमाग में सूजन, मुंह में छाले एवं कैंसर होने का खतरा रहता है।

Posted By: Jagran

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