पटना, जागरण संवाददाता। पटना के राजीवनगर थाना अंतर्गत नेपालीनगर (दीघा) के इलाके में मकान तोड़ने के मामले में प्रशासन चौतरफा घिरता दिख रहा है। पटना हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर मकानों को तोड़ने की कार्रवाई तत्‍काल रोकने के साथ ही जिला प्रशासन से इस मसले पर विस्‍तृत जवाब मांगा है। दूसरी तरफ, दीघा से भाजपा के विधायक ने पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा क‍ि इसके लिए पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ही पूरी तरह जिम्‍मेदार हैं। जन अध‍िकार पार्टी के प्रमुख पप्‍पू यादव ने भी जिला प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए हैं। वहीं, बिहार राज्‍य आवास बोर्ड के पूर्व एमडी ने भी कार्रवाई को गलत बताया है। आपको बता दें कि राजीवनगर और दीघा की विवादित जमीन पर दूसरा पक्ष यही आवास बोर्ड है।

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2014 में कैबिनेट से स्‍वीकृत हुआ दीघा अर्जित भूमि बंदोबस्‍ती नियम

बिहार राज्य आवास बोर्ड के पूर्व एमडी (महाप्रबंधक) अनुपम कुमार सुमन ने ट्वीट कर नेपाली नगर में जिला प्रशासन की  कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा कि मैं 2012 में बिहार हाउसिंग बोर्ड का एमडी था। तब बड़ी मुश्किल से मैंने दो साल तक उच्चस्तरीय विमर्श के बाद 2014 में कैबिनेट से दीघा अर्जित भूमि बंदोबस्ती नियम को स्वीकृति दिलाई थी। यह मामला 30 साल से लंबित था।

स्‍थानीय निवासियों के साथ विवाद सेटल करने की बात 

दूसरे ट्वीट में अनुपम कुमार सुमन ने सवाल किया कि दीघा भूमि सेटलमेंट का नियम बना कि 600 एकड़ वाले पूर्वी और 400 एकड़ पश्चिमी दोनों तरफ के वर्तमान निवासियों के साथ समझौता होगा। जब सिद्धांतत: तय हो गया कि मकान तोड़े नहीं जाएंगे और निवासियों के साथ जमीन सेटल किया जाएगा तो आज ये मकान किस प्रविधान के तहत तोड़े जा रहे हैं? इसके तुरंत बाद उन्होंने एक और सवाल दागा और लिखा कि दीघा नियम बनने के आठ साल तक सरकार क्या कर रही थी? इन्हें पूरी दुनिया अतिक्रमणकारी लगती है। पटना को बाहर फैलाने की जरूरत है। 

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हिटलर की तरह काम कर रहा है प्रशासन : पप्पू यादव 

जाप नेता पप्पू यादव ने कहा कि प्रशासन हिटलर की तरह काम कर रहा है। तोडफ़ोड़ के विरोध में राजीव नगर में लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। बावजूद इसके पुलिस ने लोगों पर लाठी चार्ज किया। इसमें जाप नेता राघवेन्द्र कुशवाहा, राजेश रंजन पप्पू, राजू दानवीर, विकाश बंशी, रौशन कुमार और नीतीश सहित कई स्थानीय लोगों को काफी चोटें आई हैं। प्रशासन ने क्रूरता दिखाई है। इसके बावजूद उनका संघर्ष जारी रहेगा। 

डीएम बताएं किसके आदेश से तोड़ रहे थे लोगों का मकान : विधायक

जिला प्रशासन द्वारा नेपालीनगर में तोड़े जा रहे मकानों के संबंध में दीघा के विधायक डा.संजीव चौरसिया ने जिलाधिकारी से सवाल किया कि आखिर किसके आदेश से नेपालीनगर के आवासों को तोड़ा जा रहा है। आवास बोर्ड ने इस तरह का कोई आदेश देने से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि बिना कारण बताए प्रशासन किसी का आवास नहीं तोड़ सकता है। 

चौरसिया ने कहा कि जिलाधिकारी पटना हाईकोर्ट की आड़ में मकानों पर बुलडोजर चलवा रहे थे, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।  जिलाधिकारी से बार-बार आदेश दिखाने को कहा गया, लेकिन एक बार भी उन्होंने आदेश नहीं दिखाया और मकानों को तोडऩा शुरू कर दिया। इससे लोगों में काफी आक्रोश है।

डीएम के वेतन से क्षति की भारपाई करने की मांग

वहीं दूसरी ओर दीघा-भूमि आवास बचाओ संघर्ष समिति के प्रवक्ता अशोक कुमार एवं सदस्य विरेंद्र कुमार ने कहा कि टूटे मकानों का मुआवजा प्रशासन की ओर से दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई में इस बात का उल्लेख किया जाएगा कि टूटे मकानों की भरपाई डीएम के निजी वेतन से की जाए। जिस तरह से वे नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे थे, उससे साफ लग रहा था कि उनका व्यक्तिगत हित छिपा है। ऐसे अधिकारी को तत्काल हटाने की मांग सरकार से की जाएगी। 

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Edited By: Shubh Narayan Pathak