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बदलते मौसम में रातभर AC चलाने की भूल न करें, अस्थमा और हार्ट के मरीज बरतें ये सावधानी

Published: Tue, 13 Oct 2026 07:00 AM (IST)

मौसम बदलने के साथ रात में एसी चलाने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अत्यधिक ठंडा वातावरण ...और पढ़ें

बदलते मौसम में रातभर AC चलाने की भूल न करें, अस्थमा और हार्ट के मरीज बरतें सावधानी (AI Generated Image)

बदलते मौसम में रातभर AC चलाने की भूल न करें, अस्थमा और हार्ट के मरीज बरतें सावधानी (AI Generated Image)

HighLights

  1. अत्यधिक ठंडा एसी अस्थमा, हृदय रोगियों को पहुंचा सकता है नुकसान।

  2. एसी का तापमान 25-27 डिग्री रखें, सीधी हवा से बचें।

  3. फिल्टर की नियमित सफाई और लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी।

जागरण संवाददाता, पटना। रात में मौसम अब धीरे-धीरे सुहाना होने लगा है। अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24-25 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग रातभर एसी चलाकर सो रहे हैं।

दिनभर की उमस से राहत पाने के लिए एसी चलाना सामान्य बात है, लेकिन बाहर का तापमान कम होने के बाद भी एसी को बहुत कम तापमान पर चलाना और सीधे ठंडी हवा के संपर्क में रहना परेशानी बढ़ा सकता है।

खासकर अस्थमा, एलर्जी, हृदय रोग और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

पीएमसीएच के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. राजन कुमार और अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि सामान्य तापमान पर एसी चलाना अपने आप में खतरनाक नहीं है। परेशानी का कारण जरूरत से ज्यादा ठंडा वातावरण, ठंडी हवा का सीधा संपर्क और पहले से मौजूद बीमारियां हो सकती हैं।

ठंडी हवा से सांस की परेशानी बढ़ने की आशंका

पीएमसीएच मेडिसीन विभागाध्यक्ष डॉ. राजन कुमार ने बताया कि ठंडी और शुष्क हवा कुछ लोगों में सांस की नलियों में संवेदनशीलता बढ़ा सकती है। अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित लोगों को खांसी, सीने में जकड़न, घरघराहट या सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है।

एसी के फिल्टर की नियमित सफाई नहीं होने पर उसमें जमा धूल और फफूंद के कण भी संवेदनशील लोगों की परेशानी बढ़ा सकते हैं।

रात में सोते समय एसी का तापमान बहुत कम रखने से कुछ लोगों को ठंड लगने, नाक-गले में सूखापन और सुबह उठने पर गले में खराश जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में कमरे का तापमान आरामदायक रखना और एसी की हवा सीधे शरीर पर पड़ने से बचाना जरूरी है।

हृदय रोगियों को क्यों बरतनी चाहिए सावधानी

वरीय कार्डियोलॉजिस्ट सह आईजीआईसी के उप निदेशक डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि हृदय रोग से पीड़ित लोगों को तापमान में अचानक बदलाव से बचना चाहिए। हालांकि, सामान्य घरेलू एसी के इस्तेमाल से सीधे हार्ट अटैक होने का कोई स्थापित प्रमाण नहीं है, लेकिन अत्यधिक ठंड के संपर्क में आने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं और रक्तचाप बढ़ सकता है।

पहले से हृदय संबंधी बीमारी या अनियंत्रित रक्तचाप वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। यदि एसी चलाने के बाद सीने में दर्द, असामान्य पसीना, सांस फूलना या चक्कर आने जैसे लक्षण हों तो उन्हें केवल ठंड लगने का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

रात में एसी चलाते समय रखें इन बातों का ध्यान

तापमान संतुलित रखें: कमरे को जरूरत से ज्यादा ठंडा न करें। लगभग 25-27 डिग्री सेल्सियस से शुरुआत कर अपनी सुविधा के अनुसार तापमान तय कर सकते हैं।

सीधी हवा से बचें: एसी का रुख इस तरह रखें कि ठंडी हवा सीधे चेहरे, छाती या शरीर पर न पड़े।

टाइमर का इस्तेमाल करें: मौसम अनुकूल होने पर सोने के कुछ समय बाद एसी बंद करने या तापमान बढ़ाने के लिए टाइमर का उपयोग कर सकते हैं।

फिल्टर की सफाई करें: एसी के फिल्टर की नियमित सफाई कराएं। इससे धूल और अन्य कणों का जमाव कम करने में मदद मिलती है।

बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें: छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए कमरे का तापमान आरामदायक रखें।

लक्षण दिखें तो सतर्क हों: लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या सीने में जकड़न होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।

बदलते मौसम में दिनचर्या पर भी दें ध्यान

मौसम में बदलाव के दौरान पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और शरीर में पानी की उचित मात्रा बनाए रखना जरूरी है। एसी का इस्तेमाल केवल बाहर का तापमान देखकर नहीं, बल्कि कमरे की गर्मी और उमस के अनुसार करना चाहिए।

यदि पंखे या प्राकृतिक हवा से आराम मिल रहा है तो रातभर एसी चलाना जरूरी नहीं है। वहीं, कमरे में उमस अधिक होने पर एसी का नियंत्रित इस्तेमाल किया जा सकता है।