दिल्ली-बेंगलुरु समेत 5 चिड़ियाघरों में दहाड़ रहे पटना जू के 8 बाघ, 1975 में 'मोती' से शुरू हुई थी कहानी
पटना जू बाघ संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसने अन्य चिड़ियाघरों को 12 बाघ दिए हैं और नई ब्लडलाइन के लिए बाघ प्राप्त किए हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
पटना जू ने 12 बाघ अन्य चिड़ियाघरों को दिए।
जू में वर्तमान में 10 बाघ, जिनमें 5 सफेद।
बाघ प्रजनन का इतिहास 1975 में 'मोती' से शुरू।
जागरण संवाददाता, पटना। जैव विविधता को लेकर पटना जू की चर्चा देशभर में होती है। अपने वन्य प्राणियों की वजह से यह पर्यटकों को आकर्षित करता है। विशेष रूप से पटना जू में मौजूद बाघों की अपनी-अपनी कहानी है।
बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने को लेकर 29 जुलाई को प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। बाघों के संरक्षण में पटना जू अहम भूमिका निभा रहा है। विभिन्न चिड़ियाघरों को वन्य प्राणी के अदला-बदला के तहत पटना जू ने अन्य जू को 12 बाघ दिए हैं।
इसके साथ ही जू के बाघों की दहाड़ देश के चिड़ियाघरों में गूंज रही है। इसमें रांची जू को पांच बाघ, राजगीर जू सफारी को चार बाघ, कोलकाता जू को एक बाघ, बन्नेरघट्टा (बेंगलुरु) जू को एक बाघ, दिल्ली जू को एक बाघ दिया गया है।
साथ ही बाघों में नई ब्लड लाइन के तहत दिल्ली जू से दो बाघ, असम जू से दो, नंदनकानन से एक, हैदराबाद जू से दो, तिरुपति जू से एक एवं बेंगलुरु जू से दो बाघ पटना जू में लाया गया है।
अप्रैल 2026 में दिल्ली जू को एक सामान्य नर बाघ बिक्रम को देकर वन्यजीव अदला-बदली के तहत एक सफेद मादा बाघिन दुर्गा को पटना जू में लाया गया है।
बाघ प्रकृति का ऐसा वन्यजीव है जिसके कम होने से अन्य सभी प्रजातियों का अस्तित्व प्रभावित होता है। इसके साथ ही पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है। बाघों का संरक्षण जैव विविधता संरक्षण से जुड़ा हुआ है।
पहली बार आया था सफेद बाघ
बाघों के संरक्षण को लेकर इन सीटू एवं एक्स सीटू संरक्षण प्रयासों में राज्य का इकलौता टाइगर रिजर्व वाल्मीकि ब्याघ्र आरक्ष, पटना जू, राजगीर जू सफारी अहम भूमिका निभा रहा है।
ऑल इंडिया टाइगर ऐस्टीमेशन 2022 के अनुसार, वाल्मीकि ब्याघ्र आरक्ष में 54 बाघ है। 2018 में पाए गए 31 बाघों की तुलना में चार वर्षों में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है। पटना जू में 53 बाघों को संरक्षण, प्रजनन एवं पर्यटकों के प्रदर्शन को रखा गया है।
12 अगस्त 2011 को हैदराबाद जू एवं तिरुपति जू से भीमा एवं स्वर्णा को पटना जू लाया गया था। स्वर्णा को पटना जू आने के बाद पहला सफेद बाघ मिला। भीमा एवं स्वर्णा के 12 शावकों में से आठ सफेद शावक पैदा हुए।
इनमें भवानी वर्तमान में पटना जू में है। स्वर्णा राजगीर जू सफारी में है। वर्तमान में पटना जू में 10 बाघ उपलब्ध है। जिसमें चार नर बाघ (नकुला, बादशाह और दो नर शावक) है एवं छह मादा बाघ में (संगीता, भवानी, रानी, दुर्गा एवं दो नन्हें मादा शावक) है। इन 10 बाघों में पांच सफेद बाघ हैं एवं पांच सामान्य बाघ।
वर्ष 1983 से जू में शुरू हुआ बाघों का प्रजनन
पटना जू के निदेशक हेमंत पाटिल ने बताया कि जू में बाघ संरक्षण का इतिहास काफी रोचक है। जू में सर्वप्रथम 12 अक्टूबर, 1975 में मोती नामक नर बाघ को दिल्ली जू से लाया गया था। इसके बाद 25 सितंबर 1980 को असम से फौजी एवं बुल्बोरानी नामक दो मादा बाघिन को पटना जू में लाया गया था।
एक जनवरी 1983 को पटना जू में मोती एवं बुल्बोरानी से गीता नामक मादा शावक ने जन्म लिया। 16 जून 1983 को मोती एवं फौजी के तीन शावक राकी, मोना एवं जैकी का जन्म हुआ। इसके साथ ही जू में बाघों के प्रजनन का सिलसिला आरंभ हो गया।
