पटना [अरुण अशेष]। लोकसभा के पहले सत्र में वे सांसद जिन्होंने अपनी सौ फीसदी हाजिरी बनाई है उनमें बिहार-झारखंड के आठ सांसद हैं। देश के अन्य राज्यों को मिलाकर देखें तो सौ फीसदी हाजिरी वाले सांसदों की संख्या 79 है। बिहार और झारखंड के एेसे सांसदों में चार नए और चार पुराने सांसद शामिल हैं। यह लोकसभा के पहले सत्र में उन सांसदों का हिसाब है, जो सदन की बैठकों में रोज हाजिर रहे। 

बिहार के मुकाबले झारखंड है बेहतर

बिहार की तुलना में झारखंड की हालत इसलिए बेहतर मानी जा सकती है, क्योंकि राज्य सें सिर्फ 14 लोकसभा सदस्य हैं। बिहार में इनकी संख्या 40 है। यानी 40 में चार और 14 में भी चार। संसद की गतिविधियों पर नजर रखने वाले संगठन पीआरएस के ताजा विश्लेषण में यह जानकारी दी गई है।

सौ फीसदी हाजिरी वाले ये हैं बिहार के चार सांसद...

बिहार के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल हैं। वे महराजगंज से जीतते हैं। लोकसभा में उनका दूसरा टर्म है। भाजपा टिकट पर जीते सिग्रीवाल राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। दूसरे सांसद नालंदा के कौशलेंद्र कुमार हैं। नए सांसदों में रामप्रीत मंडल और आलोक कुमार सुमन हैं।

रामप्रीत मंडल पहली बार झंझारपुर से लोकसभा का चुनाव लड़े। जीते। सांसद बनने से पहले वे पंचायत समिति के सदस्य और प्रखंड प्रमुख रहे हैं। मंडल जदयू के सांसद हैं। आलोक कुमार सुमन पहली बार गोपालगंज से जदयू के टिकट पर जीते हैं। इससे पहले राजनीति के क्षेत्र में उनका नाम चर्चा में नहीं था।

सौ फीसदी हाजिरी वाले बिहार के सांसदों में दो नए और दो पुराने हैं। लोकसभा के सांसदों की संख्या 545 है। इनमें दो मनोनीत होते हैं। दोनों राज्यों के सांसदों को जोड़ दें तो दल के हिसाब से पांच भाजपा और तीन जदयू के हैं। 

सौ फीसदी हाजिरी वाले ये हैं झारखंड के सांसद

संयोग से बिहार की तरह सौ फीसदी हाजिरी वाले झारखंड के चार सांसदों में से दो पुराने और दो पहली टर्म वाले हैं। धनबाद के भाजपा सांसद पशुपति नाथ सिंह का लोकसभा में चौथा टर्म हैं। उनके टिकट को लेकर विवाद भी हुआ था। लेकिन वे न सिर्फ चुनाव जीते बल्कि लोकसभा में भी अपना रिकार्ड कायम किया है।

जमशेदपुर के भाजपा सांसद विद्युत वरण महतो का लोकसभा में दूसरा टर्म है। वे भी सौ फीसदी हाजिरीवाले सूची में शामिल हैं।  रांची के भाजपा सांसद संजय सेठ और गिरीडीह से इसी दल के सांसद सीपी चौधरी-दोनों पहली बार जीते हैं। दोनों की उम्मीदवारी का भारी विरोध हुआ था। संजय सेठ इससे पहले किसी सदन के सदस्य नहीं थे, जबकि सीपी चौधरी झारखंड विधानसभा के सदस्य और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 

पहले ये थी स्थिति....

-16 वीं लोकसभा में सौ फीसदी हाजिरी वाले सांसदों की संख्या सिर्फ छह थी। उनमें बिहार-झारखंड के एक भी नहीं थे। वह हिसाब पांच साल का था।

-17 वीं लोकसभा के पहले सत्र का रिकॉर्ड बना। सदन की बैठक 37 दिन चली। शपथ ग्रहण और बजट सत्र साथ-साथ चला। इनमें संविधान संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए। 

Posted By: Kajal Kumari

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