बिहार में बन रहे 5 बड़े एक्सप्रेस-वे, यूपी से नेपाल और बंगाल तक आसान होगा सफर; 80 हजार करोड़ से बदलेगी कनेक्टिविटी
Bihar Expressway: बिहार में 80 हजार करोड़ रुपये की लागत से पांच बड़े ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं, जो राज्य ...और पढ़ें

पांच एक्सप्रेस-वे बदलेंगे बिहार की तस्वीर। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
पांच ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से बिहार की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
यूपी, बंगाल, झारखंड, नेपाल सीमा तक सड़क संपर्क सुधरेगा।
80 हजार करोड़ की परियोजनाएं व्यापार और यात्रा को गति देंगी।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में आने वाले समय में रफ्तार का नया रंग दिख सकता है। एक साथ पांच बड़े ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।
इससे अलग-अलग हिस्सों के बीच तेज कनेक्टिविटी तो बढ़ेगी ही, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल सीमा से भी सड़क संपर्क मजबूत होगा।
करीब 80 हजार करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं से कई प्रमुख शहरों और जिलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। पटना से पूर्णिया की दूरी कम समय में तय करने से लेकर बक्सर से भागलपुर और रक्सौल से हल्दिया बंदरगाह तक माल पहुंचाने की राह आसान होगी।
एक्सप्रेस-वे के साथ इंटरचेंज, पुल, अंडरपास और संपर्क मार्ग विकसित होने से आसपास के क्षेत्रों को भी बेहतर सड़क सुविधा मिलने की संभावना है।
Bihar Expressway Projects: बदल जाएगी बिहार की कनेक्टिविटी
इन प्रमुख परियोजनाओं में बक्सर-भागलपुर, आमस-दरभंगा, पटना-पूर्णिया, रक्सौल-हल्दिया और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे शामिल हैं। इनमें कुछ परियोजनाओं पर निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि कुछ भूमि अधिग्रहण, डीपीआर और अन्य प्रारंभिक चरणों में हैं।
इन सभी परियोजनाओं की निर्माण स्थिति और समयसीमा अलग-अलग है। इसलिए इनके एक साथ पूरा होने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सड़क नेटवर्क के विस्तार की उम्मीद है।
बक्सर-भागलपुर से दक्षिण बिहार को मिलेगी नई रफ्तार
करीब 336 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड Buxar-Bhagalpur Expressway को दक्षिण बिहार की महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है।
बिहार कैबिनेट ने अगस्त 2026 में इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसे पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित कॉरिडोर बक्सर से शुरू होगा।
वहां से भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका होते हुए भागलपुर तक जाएगा। बक्सर में इसे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की योजना है।
इससे बिहार से उत्तर प्रदेश की ओर तेज सड़क कनेक्टिविटी का एक नया विकल्प तैयार हो सकता है। सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल जैसी नदियों पर बड़े पुल और एलिवेटेड संरचनाएं भी प्रस्तावित हैं।
मौजूदा सड़क मार्ग से बक्सर-भागलपुर की यात्रा में जहां करीब आठ से नौ घंटे लगते हैं, वहीं परियोजना पूरी होने के बाद इसे करीब चार से पांच घंटे तक लाने का लक्ष्य बताया गया है।
आमस-दरभंगा से बीच बिहार में बन रहा तेज कॉरिडोर
आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे का काम चल रहा है। करीब 190 किलोमीटर लंबा यह चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर गया के आमस से दरभंगा तक बनाया जा रहा है। यह एनएच-119डी का हिस्सा है।
यह मार्ग गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा जैसे इलाकों को जोड़ेगा। अब तक करीब 30 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
इस एक्सप्रेस-वे से गया और दरभंगा के बीच यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है। बोधगया और राजगीर को लिंक रोड के जरिये जोड़ने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। ऐसा होने पर पर्यटन के लिहाज से इन महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंच और आसान हो सकती है।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे से उत्तर-पूर्व बिहार की दूरी होगी कम
पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे (Patna-Purnia Expressway) उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी के लिए अहम परियोजना है। इसे नेशनलएक्सप्रेस-वे-9 के रूप में दर्ज किया गया है।
प्रस्तावित कॉरिडोर हाजीपुर क्षेत्र से शुरू होकर समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया क्षेत्र तक जाएगा। परियोजना के विभिन्न हिस्सों में पुल, रेलवे ओवरब्रिज, इंटरचेंज और अंडरपास प्रस्तावित हैं।
इस एक्सप्रेस-वे के बनने से पटना से पूर्णिया के बीच सड़क यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है। पूर्णिया क्षेत्र में एयरपोर्ट को बेहतर सड़क संपर्क देने की भी योजना है।
Raxaul-Haldia Expressway से नेपाल सीमा और समुद्री बंदरगाह होंगे करीब
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे का महत्व सिर्फ यात्री आवागमन तक सीमित नहीं है। यह नेपाल सीमा के निकट रक्सौल को पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह से जोड़ने वाली रणनीतिक सड़क परियोजना है।
इसकी कुल लंबाई करीब 585 किलोमीटर और बिहार में इसका हिस्सा लगभग 408 किलोमीटर है। जनवरी 2026 में बिहार में रक्सौल से कटोरिया तक करीब 407.8 किलोमीटर के हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचना जारी की गई थी।
इसके बनने से नेपाल से आने वाले और बिहार के विभिन्न हिस्सों से निकलने वाले माल को हल्दिया बंदरगाह तक पहुंचाने का नया तेज मार्ग मिल सकता है।
इससे माल ढुलाई, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने पर रक्सौल से हल्दिया की यात्रा करीब 10 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य बताया गया है।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी से जुड़ेंगे उत्तर बिहार के आठ जिले
गोरखपुर-सिलीगुड़ी छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे (Gorakhpur-Siliguri Expressway) उत्तर बिहार को पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर की दिशा में तेज सड़क नेटवर्क से जोड़ने वाली बड़ी परियोजना है।
प्रस्तावित कॉरिडोर से बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे जिले जुड़ेंगे। बिहार में इसकी लंबाई करीब 417 किलोमीटर बताई जा रही है।
गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच बनने वाला यह कॉरिडोर गंडक, बागमती और कोसी जैसी नदियों के क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। परियोजना के तहत कई बड़े पुल और अन्य संरचनाएं प्रस्तावित हैं।
इन एक्सप्रेस-वे का असर केवल यात्रा का समय घटने तक सीमित नहीं रहने वाला है। बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उत्पादों की तेज आवाजाही, औद्योगिक सामान की ढुलाई और बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
नए इंटरचेंज और संपर्क मार्गों के जरिये छोटे शहरों और जिला मुख्यालयों को भी इन हाई-स्पीड कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है। इससे ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में कारोबार के नए अवसर बनने की संभावना है।
रक्सौल-हल्दिया से नेपाल सीमा और बंदरगाह की कनेक्टिविटी बढ़ेगी, जबकि गोरखपुर-सिलीगुड़ी से उत्तर बिहार का संपर्क बंगाल और पूर्वोत्तर से मजबूत होगा।
बक्सर-भागलपुर से दक्षिण बिहार को नया तेज मार्ग मिलेगा और आमस-दरभंगा तथा पटना-पूर्णिया जैसे कॉरिडोर राज्य के मध्य और उत्तर-पूर्वी हिस्सों की दूरी कम करेंगे।
बिहार में बनेगा एक्सप्रेस-वे का नया नेटवर्क
पांचों परियोजनाएं अलग-अलग दिशाओं में बिहार को जोड़ने का काम करेंगी। पश्चिम में उत्तर प्रदेश, दक्षिण में झारखंड, पूर्व में पश्चिम बंगाल और उत्तर में नेपाल सीमा तक सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।
अगर परियोजनाएं तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो आने वाले वर्षों में बिहार के लिए एक्सप्रेस-वे सिर्फ तेज सफर का माध्यम नहीं रहेंगे, बल्कि व्यापार, माल ढुलाई, पर्यटन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों के नए कॉरिडोर भी बन सकते हैं।
