पटना। पथरी की जगह युवक की दूसरी किडनी निकालने के आरोपित डॉक्टर का बीजीबी अस्पताल घटना के अगले दिन से बंद है। वहीं आरोपित डॉक्टर ने पीड़ित के भाई का फोन उठाना भी बंद कर दिया है। निजी अस्पताल में इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कह स्वजनों से समझौता करने वाले डॉक्टर ने अब पीड़ितों का फोन उठाना भी बंद कर दिया है। स्वजनों ने फिलहाल पीड़ित युवक को आइजीआइएमएस में भर्ती कराया है। डॉक्टर की वादाखिलाफी से आक्रोशित स्वजन रविवार को कंकड़बाग थाने में डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी कर सकते हैं।

मामला ठंडा करने को खेला था दांव :

मरीज के भाई उमर अंसारी ने बताया कि 18 नवंबर को जब भाई की किडनी निकालने का मामला उजागर हुआ तो आरोपित डॉक्टर ने तमाम सहायता की बातें कर रोगी को पाटलिपुत्र गोलंबर स्थित एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराने के लिए भेजा था। वहां भर्ती नहीं लेने पर राजाबाजार स्थित दूसरे बड़े अस्पताल भिजवाया पर उसने भी भर्ती नहीं किया। इसके बाद बीजीबी अस्पताल के डॉक्टर पीके जैन ने उसे अगमकुआ स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया। रोगी की हालत में सुधार होता नहीं देख उस अस्पताल ने मरीज को आइजीआइएमएस रेफर कर दिया। फिलहाल रोगी वहीं भर्ती है। भाई उमर अंसारी ने कहा कि पूरा इलाज कराने की बात कहने वाले डॉ. पीके जैन अब उसका फोन नहीं उठा रहे। ऐसे में उनके पास कानूनी कार्रवाई करने के अलावा कोई चारा नहीं है।

बताते चलें कि 19 नवंबर को आइएमए के सचिव डॉ. सुनील कुमार भी जांच करने गए थे लेकिन अस्पताल बंद था और डॉक्टर से फोन पर ही बात हुई थी। उस समय भी उन्होंने दिल्ली तक इलाज कराने की बात कही थी। वहीं, बिहार एथिक्स कमिटि के सदस्य डॉ. सुनील कुमार सिंह ने कहा कि यदि पीड़ित पक्ष शिकायत करता है और मामला जांच में सत्य पाया जाता है तो डॉ. साहब का लाइसेंस रद किया जा सकता है।

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क्या है मामला :

बेगूसराय के 20 वर्षीय युवक मुजाहिद की बाई किडनी में स्टोन थे। इसे निकलवाने वह कंकड़बाग स्थित बीजीबी हॉस्पिटल में भर्ती हुआ था। डॉक्टर ने लैप्रोस्कोपिक की जगह पहले ओपेन सर्जरी की बात कही और फिर स्वस्थ दांई किडनी को निकाल दिया। होश में आने पर मरीज को इसकी जानकारी हुई और हंगामे पर तमाम लोग जुट गए। पुलिस के आने पर डॉक्टर ने समझौता कर लिया था।

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