पटना सिटी। विजयादशमी पर वैसे तो प्रतिमाओं के विसर्जन की परंपरा अन्य स्थानों पर भी निभाई जाती है, लेकिन गौरीशंकर कॉलोनी स्थित गुलजारबाग सांस्कृतिक परिषद बंगाली अखाड़ा, मारूफगंज बड़ी देवी जी तथा विवेकानंद कॉलोनी के प्रांगण की छटा अलग ही दिखती है। वहां पांच दिनों तक दुर्गापूजा महोत्सव के अंतिम दिन सुबह से ही शुभ विजेया का उद्घोष गूंजने लगा। विधि-विधान से विशेष पूजन के बाद मां का भव्य श्रृंगार किया गया।

लाल पाड़ की साड़ी, हाथों में पूजा की थाली और चेहरे पर सिदूर का लेप लगाया गया। बंगाली समाज की महिलाओं ने मां को सिदूर अर्पित कर सुहाग की लंबी उम्र की कामना की। इसके बाद सिदूर खेला का उल्लास उमड़ पड़ा। परंपरागत ढाक की थाप ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिदूर लगाकर पर्व की खुशियां मनाई। सिदूर से सराबोर महिलाओं ने मां के साथ सेल्फी भी खूब ली। इस दौरान महिलाओं के मुख से विशेष प्रकार की ध्वनि 'उलुदेवा' निकली। शंख की ध्वनि से गुलजारबाग सांस्कृतिक परिषद का प्रागंण मां की भक्ति से सराबोर हो गया। पश्चिम बंगाल की परंपरा सिदूर खेला धूमधाम से मनाई गई। मां की विदाई की बेला आते ही बिछड़ने का दर्द सिदूर खेला के उल्लास में चमकते चेहरों पर झलकने लगा। मां को विदा करते हुए मंगलवार को महिलाओं की आंखें भर आई। बंगाली समाज की महिलाओं ने विसर्जन शोभायात्रा निकाली। विसर्जन शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ निकली। महिलाओं की टोली उलुदेवा करती हुई आगे बढ़ी। राजाघाट पहुंचकर विधि-विधान से विसर्जन किया गया।

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Posted By: Jagran

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