पटना। गंगा की स्वच्छता के लिए राजधानी की दुर्गापूजा समितियों ने एक कदम आगे बढ़ा दिया है। पहली बार पूजा समितियों ने गंगा की बजाय अलग-अलग तालाबों में प्रतिमाओं का विसर्जन किया। हालांकि प्रतिमाओं की तादाद अधिक होने और वैकल्पिक व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण कई समितियों ने गंगा में भी प्रतिमा विसर्जित की। बावजूद इसके पहली बार दुर्गा पूजा यह संदेश दे गई कि अगर लोग जागरूक हों और विकल्पों की ओर सोचा जाए तो नदियों को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। दैनिक जागरण ने इस बाबत 6 अक्टूबर के अंक में खबर प्रकाशित कर तालाबों की अधूरी तैयारी पर ध्यान आकृष्ट कराया था।

दीघा के पाटी पुल घाट के पास बने कृत्रिम तालाब में ही मूर्तियां विसर्जित की गई। यहां बड़े तालाब बनाए गए थे, जबकि पटना सिटी के भद्रघाट पर मूर्तियां अधिक पहुंच गई। लिहाजा, लोग इंतजार करने के बजाय गंगा में ही मूर्ति विसर्जन कर चल दिए। हालांकि प्रशासन गंगा में मूर्ति विसर्जन नहीं होने के लिए प्रयासरत रहा, लेकिन लोगों के नहीं मानने पर मूर्तियों में लगे आभूषण सहित अन्य सामग्री को गंगा से निकालने की व्यवस्था कराई गई।

जिला प्रशासन की तरफ से गंगा के किनारे दो स्थानों पर कृत्रिम तालाब बनवाए गए थे। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देश के अनुपालन के लिए जिला प्रशासन ने दीघा घाट पर बालू की बोरियों को बांधकर घेराबंदी करा दी थी, जिससे इसी घेरे में ही मूर्तियां विसर्जित की जाएं। इस कृत्रिम तालाब को 24 घंटे पानी से भरने के लिए मोटर के जरिए गंगा का पानी आता रहा। दो नावों के सहारे विसर्जित प्रतिमाओं को किनारे किया जाता रहा। दीघा में बीती रात 2.30 बजे तक 70 मूर्तियों का विसर्जन हुआ, जबकि दोपहर से विसर्जन के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। लोग मूर्ति को सीधे तालाब में डालते नजर आए। दोपहर में एक ट्रक के फंस जाने के कारण प्रशासन की परेशानी बढ़ गई थी, लेकिन कुछ ही देर में उसे निकलवा दिया गया। बुधवार को भी देर रात तक मूर्ति विसर्जन का कार्य जारी रहा। प्रशासन की तरफ से लाइटों की व्यवस्था कराई गई थी। बैंडबाजे के साथ मां की प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए लोग दीघा पहुंच रहे थे। वर्जन

एनजीटी के निर्देश पर मूर्तियों का विसर्जन गंगा के किनारे कृत्रिम तालाब बनवाकर कराया गया। भद्र घाट पर अधिक मूर्तियां पहुंच गई, इस कारण कृत्रिम तालाब छोटा पड़ गया। लोग गंगा में ही विसर्जन करने लगे। गंगा से मूर्ति के आभूषणों सहित अन्य सामग्री निकलवाई जा रही है। अगले वर्ष से एक भी मूर्ति गंगा में विसर्जित नहीं होगी। पहले से ही अधिक संख्या और बड़े आकार में कृत्रिम तालाब बनाए जाएंगे।

-कुमार रवि, जिलाधिकारी, पटना

Posted By: Jagran

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