पटना। संजय गांधी जैविक उद्यान में बुधवार को मानव और वन्य प्राणियों के बीच संघर्ष को टालने एवं जंगली जानवरों को बचाने के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जंगल से भागकर ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाले जंगली जानवरों को किस तरह वापस जंगल में भेजा जाए, इस पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक डीके शुक्ला ने कहा कि हाल के दिनों में वन्य प्राणियों के बिहार के जंगलों से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों में आने की घटनाओं में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। वन्य प्राणियों को वापस जंगल में भेजने के लिए बकायदा टीम गठित कर वन विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना होगा। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के पूर्व सदस्य पीआर सिन्हा ने कहा कि जंगली जानवर से मनुष्यों का कोई बैर नहीं। जब तक उनका अस्तित्व है, मानव का अस्तित्व है। जंगल से भाग कर आबादी वाले क्षेत्र में आने वाले जानवरों को गोली मारना या अन्य किसी तरीके से उनकी हत्या करना जघन्य अपराध है। अब नई-नई तकनीकें आ गई हैं, जिससे जंगली जानवरों को बेहोश कर उन्हें वापस जंगल में छोड़ा जा सकता है। जंगली जानवरों की स्थिति को समझना होगा। किस कारण से वे भागकर ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचे हैं, इसका अध्ययन करना होगा।

सुपौल के किसान मक्का की खेती से बचें

श्री सिन्हा ने कहा कि सुपौल में इन दिनों जंगली हाथियों के आने की काफी सूचनाएं मिल रही हैं। इसके पीछे वहां का फसल चक्र कारण है। वहां बड़े पैमाने पर मक्का उपजाया जाता है। हाथी को मक्का काफी पसंद है। वहां के किसानों को अपने फसल चक्र में बदलाव कर मक्का की खेती से बचना होगा। इसके साथ ही हाथी के आने से रोकने के कई उपायों की उन्होंने चर्चा की। इस मौके पर मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक एके पांडेय ने कहा कि वन विभाग के सारे कर्मचारियों को ट्रैंक्यूलाइजर के उपयोग करने का प्रशिक्षण लेना होगा। इससे जानवरों को नुकसान पहुंचाए बगैर उसे वश में किया जा सकता है।

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Posted By: Jagran