पटना [राजीव रंजन]। उसके साथ छेडख़ानी हुई। फिर वीडियो वायरल हुआ। बदनामी शुरू हुई तो घरवालों ने उसे घर में कैद कर दिया। पीड़िता की पढ़ाई छूट गई। बहन की पढ़ाई भी छुड़वा दी गई। पूरा परिवार अब पलायन की तैयारी कर रहा। पिता पंजाब से आएंगे, तो परिवार वहां जाने का फैसला करेगा।  

एक वीडियो ने सब कुछ बदलकर रख दिया 

राजधानी पटना से 52 किलोमीटर दूर जहानाबाद जिले के उस गांव में यही  कहानी मिलती है। गांव में किसी अजनबी के पहुंचते ही लोग फुसफुसाने लगते हैं। सचेत हो जाते हैं। 

इसी गांव की एक किशोरी के साथ पड़ोसी गांव के कुछ मनचले किशोरों ने छेडख़ानी कर वीडियो वायरल किया था। इस आरोप में 13 आरोपित जेल और रिमांड होम में हैं। आरोपितों के गांव से पांच किलोमीटर की दूरी पर लड़की का गांव है। 

इस घटना का साइड इफेक्ट इतना खतरनाक है कि लड़की की चचेरी बहन की पढ़ाई भी छुड़वा दी गई है। लड़कियों को घर से निकलने की इजाजत नहीं है। दो कमरों के मकान में ही अब उनकी पूरी दुनिया सिम ट चुकी है। 

घर बना जेल, पास-फेल से क्या मतलब है 

परिजन सवाल करते हैं कि अब पढ़ाई करके क्या करेगी। मैट्रिक की परीक्षा में फेल हो गई है। उसने कंपार्टमेंटल परीक्षा भी दी। घटना के बाद इतनी दहशत थी कि कंपार्टमेंटल परीक्षा का परिणाम जानने की कोशिश तक नहीं की गई। एक परिजन कहते हैं, पास भी कर गई होगी तो क्या फर्क पड़ता है। उसकी उम्र शादी की हो चुकी है।

ऐसी घटनाओं में लड़की को अधिक जिम्मेदार ठहराया जाता है। परिवार इस सदमे से उबर नहीं पाया है। पंजाब में मजदूरी करने वाले पिता गांव आ रहे हैं। अब वही फैसला करेंगे कि बेटी गांव में रहेगी या फिर उनके साथ पूरा परिवार पंजाब चला जाएगा।

जेल या रिमांड होम में सजा काट रहे गांव के 13 किशोर

गांव के ही नाबालिग बच्चों ने पड़ोस के गांव की एक स्कूली लड़की के साथ न केवल छेडख़ानी की, बल्कि उसका वीडियो बनाकर फेसबुक पर अपलोड कर दिया था। छेडख़ानी का यह वीडियो जंगल की आग की तरह वायरल हो गया। फिर तो वहीं हुआ, जो अाप सोच रहे हैं। तीन दिनों बाद एक रात जहानाबाद पुलिस ने पूरे गांव को घेरकर घटना के आरोप में 13 किशोरों को गिरफ्तार कर जेल या रिमांड होम भेज दिया। 

गांव में कटने लगी बेटियों की शादियां 

गांव के राजू यादव बताते हैं कि उनकी बेटी की बारात 11 मई को आने वाली थी। लेकिन बेटे की गिरफ्तारी के बाद लड़के वालों ने शादी काट दी। यह कहानी गांव के किसी एक घर की नहीं है। अब तो गांव वालों ने तबतक अपनी बेटियों के लिए वर ढूंढने का काम बंद कर दिया है जबतक उनके बेटों की रिहाई नहीं हो जाती।

स्‍मार्टफोन का नाम नहीं सुनना चाहते ग्रामीण 

गांव के लोग अपने बेटों की गलती मानते हैं, लेकिन उनका गुस्‍सा मोबाइल फोन पर भी है। कहते हैं, ये न होता तो बच्‍चे कोर्ट-कचहरी के बदले स्‍कूल जा रहे होते, रिमांड होम के बदले घरों में रहते। गांव की बेटियों की शादियां भी नहीं कटतीं। गांववाले अब स्‍मार्टफोन का नाम तक सुनना नहीं चाहते। हालांकि, गांव के कुछ शिक्षित लोग उन्‍हें समझाते हैं कि गलती स्‍मार्टफोन की नहीं, उसके दुरुपयोग की है।

Posted By: Kajal Kumari