पटना [काजल]। वैलेंटाइन डे...यानि, प्यार का दिन। ये दिन उन लोगों के लिए खास होता है जिन्होंने अपने जीवन में प्यार को प्राथमिकता दी। प्यार किसी जाति-मजहब या ऊंच नीच, अमीर-गरीब के दायरों में बंधा नहीं होता। आपने हीर-रांझा, लैला मजनूं, सोहनी महिवाल के किस्से तो सुने होंगे, लेकिन आज हम आपको बिहार के कुछ राजनेताओं की प्रेम कहानी बता रहे हैं, जिनके किस्से मजेदार हैं। 

लालू-राबड़ी की हिट जोड़ी

सबसे पहले बात करते हैं बिहार की सबसे फेमस जोड़ी राजद अध्यक्ष लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की, जिनकी लव स्टोरी भी एक मिसाल है। लालू-राबड़ी की शादी तो अरेंज मैरिज थी लेकिन उनका एक-दूसरे के लिए प्यार और एक-दूसरे के लिए सम्मान भी प्यार करने वालों के लिए एक उदाहरण है।

विपरीत परिस्थितियों में भी राबड़ी लालू यादव के लिए हमेशा एक मजबूत दीवार की तरह खड़ी रहीं तो वहीं लालू भी राबड़ी की सलाह बिना कोई काम नहीं करते। कई बार उन्हें राबड़ी की जिद के आगे भी झुकना भी पड़ा है। लालू यादव और राबड़ी का प्यार जगजाहिर है। कई ऐसे मौके होते हैं जब लालू राबड़ी को लालू गुलाब देते हैं और इसकी तस्वीरें मीडिया की सुर्खियां बनीं। 

35 साल से ज्यादा हो गए दोनों की शादी के, लेकिन उनकी शादी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। 25 साल के लालू और 14 साल की राबड़ी की शादी तो अरेंज मैरिज थी। लेकिन हंगामा लव मैरेज से भी ज्यादा हुआ। कारण लालू ठहरे सधारण और राबड़ी के मायके वालों के पास थोड़ी धन-संपत्ति थी। 

राबड़ी के घर वाले इस शादी को तैयार नहीं थे। क्योंकि लालू के पास एक-एक पैसे की तंगी थी। घर जो था वो भी झोपड़ी का, लेकिन राबड़ी ने कभी कोई शिकायत नहीं की। लालू अपनी पत्नी राबड़ी के इस व्यवहार के कारण ही उनके दीवाने थे।

लालू पत्नी राबड़ी को हर खुशी के मौके पर लाल गुलाब का फूल देते हैं। चाहे उनका जन्मदिन हो या दोनों की शादी की सालगिरह। राबड़ी जब भी लालू के लिए व्रत रखतीं हैं तो  लालू कहीं भी हो उनका व्रत खुलवाने के लिए तय समय पर अपने घर जरूर पहुंच जाते हैं। इसी तरह छठ पूजा के दौरान भी लालू घर पर ही होते हैं।  

रेनू के प्यार के लिए शाहनवाज हुसैन ने तोड़ी थी धर्म की दीवार

भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता शाहनवाज हुसैन और रेनू की लव स्टोरी भी काफी इंट्रेस्टिंग है। मुस्लिम होते हुए शाहनावज ने दिल्ली की एक हिंदू लड़की से प्रेम विवाह किया है। लेकिन उनके प्यार का सफर इतना आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें नौ सालों तक पापड़ बेलने पड़े थे।

हुआ यों कि साल 1986 में शाहनवाज ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान डीटीसी की बसों से सफर किया करते थे।बस में ही एक दिन उन्हें एक लड़की दिखी जिसको देखते ही वो फिदा हो गए। लेकिन कुछ ही मिनटों में ही वह लड़की कहीं खो गई। शाहनवाज की नजरें उसे लगातार तलाशती रहीं और कुछ दिनों बाद फिर शाहनावज को वह लड़की फिर बस में मिल गई। 

शाहनवाज ने लड़की को फॉलो करना शुरू किया और एक दिन लड़की को बस में जगह नहीं मिली लेकिन उन्हें मिल गई तो उन्होंने उसे अपनी सीट दे दी। इसी तरह बातचीत शुरू हुई और शाहनवाज एक दिन उसी लड़की के घर पहुंच गए और घरवालों से दोस्ती कर ली। बातचीत से घरवालों के इंप्रेस किया लेकिन असली बात करने में हिचकिचाहट होती थी।

अंत में उन्होंने ठान लिया कि अपने प्यार को पाने के लिए कुछ भी करेंगे तो उन्होंने उसे अपने दिल की बात बता दी। कुछ दिनों बाद एक रिश्तेदार के यहां पार्टी हुई जिसमें दोनों पहुंचे तो बातों ही बातों में उन्होंने लड़की को अपने दिल की बात बता दी 

इसी आपाधपी में शाहनवाज एक दिन उस लड़की के घर पहुंच गए। इधर-उधर की बातों से लड़की के घर वालों से अच्छा रिश्ता बना लिया। इसके बाद वह लड़की घर आने-जाने लगे। बातचीत में शाहनवाज पहले से माहिर थे, इसलिए लड़की के घरवालों से अच्छी जान-पहचान हो गई।

लेकिन असल बात बनते नहीं दिख रही थी, तो अंत में शाहनवाज ने ठान लिया कि अब वह लड़की को अपने दिल की बात बता कर रहेंगे। तभी एक रिश्तेदार के यहां पार्टी में शाहनवाज हुसैन और वह लड़की दोनों पहुंचे। बातों ही बातों में शाहनवाज ने अपने दिल की बात लड़की बता दी लेकिन यह सुनते ही लड़की भड़क गई और कहा कि दोनों के धर्म अलग हैं, शादी संभव ही नहीं। 

यह सुनकर शाहनवाज को दुख हुआ लेकिन उन्होंने उससे शादी करने की बात ठान ली थी और वो लगातार कोशिश में लगे रहे। आखिरकार प्यार को मंजिल मिली और वो लड़की शाहनवाज की जिद के आगे झुक गई और नौ साल की इस प्रेम कहानी में प्यार की जीत हुई और दोनों की शादी हो गई। आज वही बस वाली लड़की रेनू शाहनवाज हुसैन की पत्नी हैं। 

पूरी फिल्मी है पप्पू यादव और रंजीता रंजन की प्रेम कहानी

अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले बिहार के बाहुबली नेता पप्पू यादव और रंजीता रंजन की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक मर्डर के मामले में जब पप्पू यादव जेल में सजा काट रहे थे, तभी उन्हें रंजीता से प्यार हो गया था। उन्हें अपनी प्रेमिका (अब पत्नी) रंजीता को मनाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े। 

वे रंजीता रंजन की फोटो देखकर कुछ इस कदर फिदा हो गए कि फिर वे सब कुछ भूलकर उसकी महज एक झलक पाने के लिए हर दिन टेनिस कोर्ट पहुंच जाते थे, जहां वो खेला करती थीं।

रंजीता को ये सब पसंद नहीं था। उन्होंने पप्पू यादव को कई बार आने के लिए मना किया। मिलने से रोका और फिर भी नहीं मानने पर कड़े शब्दों में इसका विरोध भी किया। एक बार तो रंजीता ने यहां तक कह दिया कि वे सिख हैं और पप्पू हिंदू। उनके परिवार वाले ऐसा होने नहीं देंगे।

रंजीता रंजन के माता पिता ग्रंथी थे और इस विवाह के खिलाफ थे। लेकिन पप्पू यादव के आनंद मार्गी पिता चंद्र नारायण प्रसाद और माता शांति प्रिया की ओर से कोई समस्या नहीं थी। जब रंजीता के परिजनों की ओर से शादी की मंजूरी नहीं मिली तो पप्पू यादव, रंजीता के बहन-बहनोई को मनाने चंडीगढ़ पहुंच गए।

लेकिन यहां भी पप्पू की नहीं चली। दिल्ली में रंजीता के एक और बहनोई ने भी पप्पू यादव की बात नहीं माने। पप्पू यादव इससे निराश हो गए। इसी बीच उन्हें पता चला कि कांग्रेस नेता एसएस अहलूवालिया उनकी मदद कर सकते हैं। पप्पू यादव उनसे मिलने दिल्ली जा पहुंचे और फिर उनसे मदद की गुहार लगाई।

आखिरकार पप्पू यादव के प्यार की जीत हुई और रंजीता के घरवाले भी शादी को लेकर तेयार हो गए। पप्पू-रंजीता की शादी भी किसी परी कथा से कम नहीं थी। इनकी शादी को लेकर पूर्णिया की सड़कों को पूरी तरह सजा दिया गया था। शहर के सारे होटल और गेस्ट हाउस बुक थे। आम और खास सबके लिए व्यवस्था की गई थी।

पप्पू ने की थी सुसाइड की कोशिश

पप्पू यादव ने अपनी किताब 'द्रोहकाल का पथिक' में विस्तार से अपनी लव स्टोरी का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि कैसे हताश-परेशान होकर उन्होंने एक बार नींद की ढेरों गोलियां खा ली थीं। हालत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच में एडमिट कराया गया था। आज पप्पू जन अधिकार पार्टी के सांसद हैं तो उनकी पत्नी रंजीता रंजन कांग्रेस की सांसद हैं।

शत्रुघ्न और पूनम की प्रेम कहानी, आम नहीं, खास है

अपनी दमदार आवाज और संवाद अदायगी से सबको खामोश कर देेने वाले बिहारी बाबू, जिन्हें दुनिया शॉटगन के नाम से भी जानती है, उनकी प्रेम कहानी में वैसे तो कुछ खास नहीं था लेकिन पूनम को पाने के लिए शत्रु ने उनकी मां की कही हुई बात को झेला था और पूुनम को अनोखे अंदाज में प्रोपोज किया था।

चलती ट्रेन में पत्नी पूनम को किया था प्रोपोज

चलती ट्रेन में शत्रुघ्न सिन्हा ने एक पेपर पर फिल्म पाकीजा का फेमस डायलॉग 'अपने पांव जमीन पर मत रखिएगा...' ‌‌लिखा. इसके बाद वो घुटनों पर बैठे और ये खत देकर पूनम को प्रपोज कर दिया। लेटर पढ़कर पूनम मुस्कुरा दीं और हां बोल ‌दिया। शत्रु ने अपने बड़े भाई राम से पूनम से शादी करने की इच्छा जाहिर की तो अपने छोटे भाई का प्रस्ताव लेकर राम पूनम की मां से मिलने उनके घर गए।

पूनम की मां ने कहा - चोर से नहीं करूंगी बेटी की शादी

शत्रुघ्न सिन्हा के बड़े भाई राम की बात सुनते ही पूनम की मां भड़क गईं। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी दूध जैसी गोरी और कहां वह लड़का, वह भी चोर की एक्टिंग करता है। वह मेरी बेटी से कैसे शादी करेगा। लेकिन बाद में इन दोनों ने अपनी तरह से बात की और फिर दोनों की शादी हो गई।

शादी से पहले ही पत्नी से मिलने पहुंच गए थे सीएम नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लोग काफी गंभीर और कम बोलने वाला नेता मानते हैं लेकिन उनके बैच मेट्स की मानें तो वो अपने कॉलेज के दिनों में काफी चुहलबाज थे। उस जमाने में शादी से पहले होने वाली दुल्हन से दूल्हा मिल नहीं सकता था लेकिन नीतीश कुमार शादी से पहले ही अपनी होने वाली पत्नी को देखने के लिये पटना कॉलेज पहुंच गए थे।

इसका खुलासा किसी जमाने में नीतीश के बैचमेट रहे उनके दोस्तों ने किया और बताया कि नीतीश कुमार शादी के लिए बहुत पहले से तैयार थे और उस जमाने में उन्होंने बिना दहेज की ही शादी की थी। 

 

By Kajal Kumari