v>कटिहार [तौफीक आलम]। अक्सर यह चर्चा चलती रहती है कि प्रेम के लिए पूरे साल में सिर्फ एक दिन ही क्यों निर्धारित है! ऐसा नहीं है, सच्चा प्यार तो अपने-आप को साबित कर ही देता है। कुछ ऐसी ही कहानी सुरेंद्र और कंचन की है, जिसके आगे वेलेंटाइन डे की धूमधाम भी धीमी पड़ जाती है। 

 
भंगहा निवासी कंचन माला सिन्हा ने अपने पति सुरेंद्र की बीमारी के कारण ना केवल शिक्षक की नौकरी छोड़ दी, बल्कि किडनी देकर अपने पति की जान भी बचाई। शादी के 24 वसंत देख चुके सुरेंद्र व माला आज भी नवदंपती की तरह हर त्योहार का आनंद उठाते हैं।
कंचन ने बताया कि उनके पति सुरेंद्र पटेल की किडनी खराब हो चुकी थी। लंबी बीमारी के कारण पति ने उम्मीद छोडऩी शुरू कर दी थी। इस दौरान उन्होंने ठान लिया कि किसी प्रकार अपने पति की जिंदगी बचानी है। पिछले साल अक्टूबर में हरियाणा के गुडग़ांव स्थित एक निजी अस्पताल में माला ने अपनी किडनी अपने पति को लगवा दी। अब सुरेंद्र पूरी तरह स्वस्थ्य हैं।
 
सुरेंद्र ने बताया कि इस वेलेंटाइन दिवस पर उनकी पत्नी की बदौलत उन्हें नई जिंदगी मिली है। यह वेलेंटाइन उनके लिए खास होगा। यह सच्चे प्यार व विश्वास का कारण है कि उनकी पत्नी ने कठिन समय में उनके हौसले को कम नहीं होने दिया। सुरेंद्र पटेल फलका के प्रखंड प्रमुख भी रह चुके हैं। कंचन शिक्षिका थीं। पति की बीमारी के कारण उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी।
 
कंचन के अनुसार जब उन्होंने पति को अपनी किडनी देने का मन बनाया तो कई लोगों ने उन्हें रोका भी। बावजूद, उन्होंने अपने पति के जीवन के लिए किडनी दान कर दी। कंचन बताती हैं कि वैवाहिक जीवन सात फेरों से शुरू होती है और संग जीने-मरने की कसम खाई जाती हैं।
 
उन्होंने बस इसे पूरा करने की थोड़ी सी कोशिश की और आज उनका हमसफर उनके साथ है। वहीं सुरेंद्र पटेल कहते हैं कि उन्हें अपनी पत्नी पर गर्व है।

By Kajal Kumari