पटना। 'जब तक देश में काला धन होगा तब तक चुनाव में इसका इस्तेमाल नहीं रुकेगा। काला धन भ्रष्टाचार की जड़ है' ये बातें केंद्रीय सूचना आयोग के पूर्व सूचना आयुक्त एएन तिवारी ने रविवार को 'राजनीतिक दल में आंतरिक लोकतंत्र, पारदर्शिता और जवाबदेही' विषय पर आयोजित सेमिनार के दौरान कहीं। सेमिनार का आयोजन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉ‌र्म्स (एडीआर) और बिहार इलेक्शन वॉच के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में पारदर्शिता की कमी है और जहां पारदर्शिता समाप्त होती है वहीं से भ्रष्टाचार शुरू होता है। कार्यक्रम में एडीआर, दिल्ली की प्रोग्राम एसोसिएट नित्या कुमारी ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देकर चुनाव में राजनीतिक दल द्वारा काले धन के प्रयोग और अपारदर्शिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार के शपथ पत्र के आधार पर यह पता लगा कि 32 फीसद उम्मीदवार पर आपराधिक मामले चल रहे हैं, जबकि 20 फीसद उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज है। इनमें से 30 फीसद गंभीर आपराधिक मामले वाले उम्मीदवार विजयी होकर विधायक और सांसद चुने गए। उन्होंने बताया कि देश में 1392 अपंजीकृत राजनीतिक दल है। देश में सिर्फ 6 राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी और 55 क्षेत्रीय पार्टियां है और साल 2009 में सिर्फ 392 पंजीकृत राजनीतिक दलों ने 543 सीटों पर चुनाव लड़ा। वर्ष 1980-88 तक राजनीतिक दलों के पारदर्शिता में कमी आई है और 1999 में एडीआर के स्थापना के बाद पारदर्शिता ग्राफ धीरे-धीरे बढ़ा है।

मौके पर प्रेम कुमार मणि, समाजवादी नेता डॉ शंभू शरण श्रीवास्तव, सीपीआइ के यूएन मिश्र, प्रो मंजरी वर्मा आदि ने भी अपने विचार रखे।

प्रश्न-उत्तर सत्र के दौरान कार्यक्रम में उपस्थित छात्र नेताओं ने वक्ताओं से पेड न्यूज, राजनीति के अपराधीकरण और राजनीति से भ्रष्टाचार खत्म करने जैसे कई सवाल पूछे। पूर्व में विषय प्रवेश बिहार इलेक्शन वाच के राजीव कुमार ने किया।