पटना : सिवान समाहरणालय में पदस्थापित एक सहायक विनोद कुमार सिन्हा ने अपने जिलाधिकारी सहित कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करायी है। सिन्हा ने कहा है कि डीएम के दबाव में ये अधिकारी उनके पूरे परिवार को तबाह करना चाहते हैं।

अपने शिकायत पत्र में सिन्हा ने आयोग से कहा है कि मेडिकल बिल का भुगतान नहीं मिलने पर जब उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया तभी से ये अधिकारी उनके पीछे पड़ गए हैं। सिन्हा के मुताबिक, पहले उन्हें निलंबित किया, फिर समाहरणालय में कार्यरत उनकी पत्‍‌नी को भी निलंबित कर दिया गया। हद तो तब हुई जब नियम कानून को ताक पर रख उनके भाई को भी सस्पेंड कर दिया गया। सिन्हा की पत्‍‌नी शीला सिन्हा व भाई अशोक कुमार सिन्हा समाहरणालय के रिकार्ड रूम में प्रतिलिपिकार के रूप में कार्यरत हैं। एक ही परिवार के तीनों लोगों को निलंबित कर दिया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि व्यक्तिगत दुश्मनी पर उतारू डीएम इतने के बाद भी शांत न हुए। शिकायत करने वाले कर्मचारी के किराये के आवास व उनके भाई के सिवान स्थित मकान पर भी बिजली विभाग की छापेमारी हुई। बिजली विभाग की ओर से विनोद सिन्हा व उनके कई परिजनों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। जबकि सिन्हा का कहना है कि बिजली बिल का भुगतान अद्यतन है और कनेक्शन भी नियमानुसार लोड के अनुरूप श्रेणी में लिया गया है। डीएम उनके परिवार के सभी लोगों को जेल में डालकर प्रताड़ित करना चाहते हैं। फिलहाल विनोद सिन्हा व उनके भाई के सिवान स्थित मकान में ताला बंद है। उनके परिजन कहीं चले गए हैं। पड़ोसियों के अनुसार गिरफ्तारी के भय से वे कहीं चले गए हैं।

विनोद सिन्हा ने बताया कि जिलाधिकारी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने मातहत अधिकारियों को मुझे प्रताड़ित करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इसका ताजा नमूना हमारे किराये के घर एवं भाई के मकान में बिजली विभाग की छापेमारी है। अद्यतन बिल भुगतान व निर्धारित लोड पर कनेक्शन के बावजूद नियम विरूद्ध एफआइआर कराया गया। उन्होंने बताया कि हमारे भाई के घर पर कोई पुरूष नहीं था। छापेमारी के लिए गए बिजली विभाग के कर्मचारियों ने बाहर से तार काट दिया और मेरे भाई की पत्‍‌नी मधु सिन्हा के साथ अभद्र व्यवहार किया। हम इसकी कहीं शिकायत भी नहीं करा सके क्योंकि डीएम के डर से हमारी बात कोई नहीं सुनने को तैयार नहीं है। बिजली विभाग के कर्मचारी हमारे भाई के घर से मीटर और तार उखाड़ कर ले गए हैं और बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज करा दिया। सिन्हा ने पूरे मामले की किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मानवाधिकार आयोग से गुहार लगाई है। उन्होंने कहाकि जिलाधिकारी के कारण मेरी और मेरे परिजनों की जान भी जा सकती है।

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'' काम से भागने व अनियमितता बरतने के मामले में बिनोद सिन्हा को दोषी पाया गया था। इसके बाद ये निलंबित किए गए। इन पर दो एफआइआर दर्ज करायी गयी है। अब इनको बर्खास्त करने की कार्रवाई शुरू हो रही है। ''

दिवेश सेहरा, डीएम सिवान

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''शिकायत मिली है, आयोग उसे देख रहा है। जो भी कानून सम्मत कार्रवाई होगी, की जाएगी'' : नीलमणि, अध्यक्ष राज्य मानवाधिकार आयोग

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