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11वें प्रयास में लेफ्टिनेंट बना बिहार का लाल; फौजी पिता ने दी कड़क सलामी तो छलके आंसू

Published: Sat, 05 Sep 2026 03:13 PM (IST)

नवादा के डोहरा गांव निवासी विजेता विशाल ने 10 बार SSB में असफल होने के बावजूद 11वें प्रयास में लेफ्टिनेंट ...और पढ़ें

नवादा के नारदीगंज निवासी विजेता विशाल। सौ:स्वजन

नवादा के नारदीगंज निवासी विजेता विशाल। सौ:स्वजन

HighLights

  1. विजेता विशाल 10 SSB असफलताओं के बाद 11वें प्रयास में लेफ्टिनेंट बने।

  2. पिता धनंजय कुमार धीरज का अधूरा सपना बेटे ने पूरा किया।

  3. पासिंग आउट परेड में पिता ने बेटे को सलामी दी।

संवाद सूत्र, नारदीगंज (नवादा)। असफलता के आगे घुटने टेक देना आसान है, लेकिन उसे अपनी ताकत बनाकर मंजिल हासिल करना हर किसी के बस की बात नहीं।

नारदीगंज के डोहरा गांव निवासी विजेता विशाल ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। SSB) के साक्षात्कार में लगातार 10 बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 11वें प्रयास में सफलता हासिल कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विजेता विशाल ने चेन्नई स्थित आफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में कठिन प्रशिक्षण पूरा किया।

प्रशिक्षण के बाद आयोजित पासिंग आउट परेड में उनके कंधों पर अधिकारी के स्टार सजे तो वर्षों की मेहनत और संघर्ष का सपना साकार हो गया।

10 बार मिली असफलता, फिर भी नहीं मानी हार

विजेता की सफलता की कहानी इसलिए भी प्रेरणादायक है क्योंकि उनके सामने असफलता एक-दो बार नहीं, बल्कि लगातार 10 बार आई। हर बार SSB साक्षात्कार में असफल होने के बाद भी उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा।

जहां लगातार असफलता किसी भी युवा का मनोबल तोड़ सकती थी, वहीं विजेता ने इसे अपनी कमियों को समझने और उन्हें दूर करने का अवसर बनाया।

परिवार के सहयोग और पिता के अनुशासित मार्गदर्शन ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आखिरकार 11वें प्रयास में उन्होंने वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसका सपना लंबे समय से देख रहे थे।

पिता का अधूरा सपना बेटे ने किया पूरा

विजेता विशाल की सफलता के पीछे उनके पिता धनंजय कुमार धीरज की वर्षों की तपस्या भी जुड़ी है। धनंजय कुमार धीरज स्वयं भारतीय सेना की बिहार रेजीमेंट की सातवीं बटालियन में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं।

पिता का सपना सेना में अधिकारी बनने का था, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं और वे जेसीओ के पद तक ही पहुंच सके। इसके बाद उन्होंने अपने अधूरे सपने को बेटे के माध्यम से पूरा करने का संकल्प लिया।

बेटे को सेना में अधिकारी बनाने के लिए उन्होंने लगातार उसका मार्गदर्शन किया और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। विजेता ने भी पिता के सपने को अपना लक्ष्य बना लिया।

सैनिक स्कूल नालंदा से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद सेना में अधिकारी बनने की तैयारी में जुट गए।

बेटे को सलामी देते पिता, झुककर बेटे ने छुए चरण

चेन्नई स्थित आफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी के परेड ग्राउंड पर पासिंग आउट परेड का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। सैन्य प्रोटोकाल के तहत जब नायब सूबेदार पिता धनंजय कुमार धीरज ने अपने अधिकारी बेटे लेफ्टिनेंट विजेता विशाल को कड़क सलामी दी, तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

जिस बेटे को पिता ने वर्षों तक अनुशासन और संघर्ष का पाठ पढ़ाया था, उसी बेटे को एक दिन अधिकारी की वर्दी में सलामी देना उनके लिए गौरव का क्षण था।

इसके तुरंत बाद विजेता ने भी अधिकारी होने के गर्व से ऊपर पुत्र धर्म को रखा। उन्होंने झुककर पिता के चरण स्पर्श किए और उनका आशीर्वाद लिया।

बेटे के कंधे पर चमकते सितारे और पिता की आंखों में गर्व ने वर्षों की तपस्या को मानो एक ही पल में सार्थक कर दिया। यह दृश्य न केवल एक पिता-पुत्र के रिश्ते की भावुक तस्वीर बना, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन गया जो असफलताओं के कारण अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं।