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जब पढ़ाई बनी खेल और कहानी, नवादा में निकिता की इसी कला ने दिलाया राजकीय शिक्षक सम्मान

Published: Thu, 03 Sep 2026 10:17 PM (IST)

नवादा की प्रधान शिक्षिका निकिता भारती को उनकी रचनात्मक और नवाचार शिक्षण कला के लिए 2026 के राजकीय शिक्षक पुरस्कार ...और पढ़ें

निकिता भारती

निकिता भारती

HighLights

  1. निकिता भारती को 2026 के राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया।

  2. उन्होंने खेल, कहानी और गीत से बच्चों को रुचिकर शिक्षा दी।

  3. उनके नवाचार से बच्चों की उपस्थिति और समझ में वृद्धि हुई।

मनमोहन कृष्ण, नवादा। खेल-खेल में बच्चों को पाठ का ज्ञान करा देना, कहानियां सुना-सुनाकर विज्ञान की भारी-भरकम गुत्थियां सुलझाना और गीत-गाने सुनाकर अंकों की दुनिया से परिचय कराना। शिक्षण कला की इस रचनात्मक और नवाचार ने निकिता भारती को बच्चों का चहेता बना दिया।

सरकारी स्कूल में सीमित संसाधनों के बीच बच्चों के बेहतर भविष्य गढ़नेवाली निकिता को बिहार सरकार के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने पांच सितंबर, शिक्षक दिवस पर राजकीय शिक्षक पुरस्कार, 2026 के लिए चयनित किया है।

नवादा जिला के सदर प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय शाहपुर की प्रधान शिक्षिका के पद पर निकिता भारती कार्यरत हैं।

किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यवहारिक शिक्षा पर जोर

बच्चों को केवल किताबों की शिक्षा तक सीमित करना उनका उद्देश्य नहीं, बल्कि वे उन्हें व्यवहारिक ज्ञान से परिपूर्ण बनाना चाहती हैं।

वैसा ज्ञान, जो उनके जीवन में फलदायी हो। ऐसे में वे रचनात्मक और गतिविधि आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने विद्यालय में छात्र-छात्राओं को सिखाने के लिए कई ऐसे प्रयोग किए, जिनसे बच्चों में समझ विकसित हुई। वे पाठ को बेहतर ढंग से आत्मसात करने में सफल हो पाते हैं।

शिक्षण अधिगम सामग्रियों से पढ़ाई को बनाया रुचिकर

निकिता भारती ने पढ़ाई को रुचिकर और सरल बनाने के लिए शिक्षण अधिगम सामग्रियों का भी सहारा लिया। खेल आधारित गतिविधियों से वे बच्चों से जुड़ीं।

पढ़ाने के रचनात्मक तरीके अपनाए और नवाचार को शामिल किया। उनके प्रयासों से विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी। बच्चों में रचनात्मकता आई। अनुशासन बढ़ा और पढ़ाई में सहभागिता भी बढ़ी।

बढ़ी बच्चों की उपस्थिति, अभिभावकों में भी बढ़ा सम्मान

निकिता के प्रयासों का असर विद्यालय में भी दिखा। छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बढ़ी तो अभिभावकों में भी उनके प्रति सम्मान का भाव जगा।

बच्चों के सीखने के तरीके में बदलाव और उनकी सक्रियता ने शिक्षण की इस पद्धति को अलग पहचान दी। अब सरकार ने भी उनकी प्रतिभा को माना और राजकीय शिक्षक पुरस्कार, 2026 के लिए उनका चयन किया है।

सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम देना लक्ष्य

निकिता भारती ने वर्ष 2015 में नगर मध्य विद्यालय, नवादा में योगदान दिया। वे वर्ष 2025 तक वहीं शिक्षिका रहीं। इसके बाद वे नवादा सदर प्रखंड के नहर पर स्थित प्राथमिक विद्यालय शाहपुर की प्रधान शिक्षिका बनीं।

सीमित संसाधनों में सर्वोत्तम परिणाम देना निकिता भारती का उद्देश्य बन गया है। विषम परिस्थितियों में भी उनका हौसला नहीं टूटना उनके जीवट चरित्र को दर्शाता है।

वंचित बच्चों को शिक्षित करने का भी रहा जुनून

समर्पण, मेहनत और निरंतर प्रयास से वे बच्चों का भविष्य गढ़ने में जुटी हैं। साथ ही विद्यालय की आधारभूत सुविधाएं विकसित हों, इसके लिए भी प्रयासरत रहती हैं।

नवादा नगर परिषद क्षेत्र के मिर्जापुर में निकिता भारती पली-बढ़ीं और शिक्षित हुईं। उनकी माता मंजू कुमारी और पिता अमरेंद्र नारायण वर्मा का उनकी शिक्षा-दीक्षा में विशेष योगदान रहा।

साधारण पृष्ठभूमि से निकलीं, सेवा से बनाई अलग पहचान

बिटिया पढ़-लिख गई तो समाज के वंचित-शोषित वर्ग के बालक-बालिकाओं को शिक्षित करने को लेकर विशेष लगाव पैदा हुआ और वे सरकारी विद्यालय में सेवा देने आईं।

उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्य, कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण और शिक्षा के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता ने उन्हें इस गौरवपूर्ण सम्मान के लिए चिह्नित किया। जिलेभर में उनकी इस उपलब्धि की चर्चा है।

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