नए साल 2020 के आगमन में अब 24 घंटे से भी कम का वक्त रह गया है। मंगलवार की रात को घड़ी की सुइयां जैसे ही रात के 12 बजे को छुएगी, वैसे ही नए साल का आगाज हो जाएगा। लोग एक दूसरे को अंग्रेजी कैलेंडर के नववर्ष की शुभकामनाएं देंगे। नए साल का जश्न अभी से युवाओं के चेहरे पर दिख रहा है। युवाओं ने अपने-अपने अंदाज में बीतते हुए साल को विदा कहने और नये साल का स्वागत करने की तैयारी की है। 31 दिसंबर की रात को नए साल के आगाज के साथ यादगार बनाने के लिए तैयारी की गई है। गाना-बजाना के साथ ही पसंद की चीजें खाने-पीने की भी तैयारी है। इसके साथ ही पिकनिक स्पॉट पर जाकर भी खुशियां बांटने की तैयारी है। आम लोगों की बात करें तो लोगों ने अपने-अपने घरों में नए साल का जश्न मनाने की तैयारी कर रखी है। युवा, महिलाएं, बच्चे सभी में नए साल का उत्साह और उमंग है। शहर के तमाम होटलों में भी नए साल को लेकर तैयारी की गई है।

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समृद्धि के लिए संकट मोचन मंदिर

- नए साल की सुबह की शुरुआत लोग अपने आराध्य, बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर करते हैं। पहली जनवरी को शहर में जिस मंदिर में सबसे अधिक भीड़ देखी जाती है वह है शहर का संकट मोचन हनुमान मंदिर। यहां सुबह से ही महिलाओं, बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों की भीड़ पहुंचनी शुरू हो जाती है। सुबह और शाम दोनों पहर लोग यहां आकर हनुमान जी से नया साल अच्छा बीतने की कामना करते हैं। यहां गणेश जी की प्रतिमा का दर्शन करते हैं। इस दिन यहां मेला सा नजारा भी रहता है।

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खूबसूरती का दीदार गोनावां जल मंदिर

- शहर से सटे गोनावां जल मंदिर में पहली जनवरी को नए साल का जश्न देखते बनता है। नए साल का स्वागत करने के लिए यहां सैकड़ों परिवार हर साल जुटते हैं। इस बार कड़ाके की ठंड के बाद भी बड़ी संख्या में युवा और छोटे बच्चे यहां घूमने के लिए पहुंचेंगे। गोनावां का जल मंदिर अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है। युवा इस मंदिर के साथ खुद की सेल्फी याद तस्वीर जरूर लेते हैं। यहां मेला सा नजारा रहता है।

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नौकायन का लुत्फ लेने के लिए फुलवरिया डैम

- नवादा जिले का फुलवरिया जलाशय जिसे हरदिया डैम के नाम से भी जाना जाता है वह अपनी प्राकृतिक छटा के लिए पूरे बिहार में मशहूर है। झारखंड की सीमा पर रजौली प्रखंड में बसा हुआ यह प्राकृतिक जल श्रोत वाकई में मनमोहक है। हरेक साल पहली जनवरी को नए साल के जश्न में डूबे युवा यहां पिकनिक मनाने के लिए जुटते हैं। यहां पहुंचकर लोग नौकायन का भी आनंद लेते हैं। सुबह से शाम ढलने तक यहां युवाओं की टोली जलाशय के इर्द-गिर्द पिकनिक मनाते हुए नजर आती है। यहां गया, पटना, नालंदा, नवादा समेत झारखंड के हजारीबाग, कोडरमा, रांची तक से युवाओं का जत्था पिकनिक मनाने के लिए आता है।

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ककोलत की मनोरम वादियां

- नवादा जिले में कई ऐसे जलप्रपात हैं जो हर साल पिकनिक के सीजन में युवाओं को अपनी ओकर आकर्षित करते हैं। गोविदपुर प्रखंड क्षेत्र में ककोलत जलप्रपात बिहार समेत पूरे देश में मशहूर है। यह अपनी प्राकृतिक खूबसूरत छटा के लिए जाना जाता है। हालांकि यहां का पानी काफी ठंडा है। जहां गर्मी में अधिक भीड़ जुटती है। बावजूद नये साल में भी अनेक युवा यहां आकर पिकनिक मनाते हैं।

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ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे नारद संग्रहालय

- नवादा जिले का एतिहासिक नारद संग्रहालय हर साल नए साल में अपने यहां पहुंचे सैलानियों का स्वागत करता है। पूरे बिहार में पटना के बाद यह दूसरा बड़ा संग्रहालय के रूप में इंगित है। इस संग्रहालय में जिले के विभिन्न क्षेत्रों के एतिहासिक दुर्लभ प्रतिमाएं सुरक्षित रखी गई है। यहां भगवान बुद्ध की कई मुद्राओं वाली प्रतिमा से लेकर भगवान विष्णु, मंजू श्री, गणेश आदि की प्रतिमाएं हैं। पाल काल से लेकर आधुनिक काल की कई देवी-देवताओं की प्रतिमा के अलावा यहां उस जमाने की कलाकृतियां भी रखी गई है। कई प्राचीन हस्त पांडुलिपियां भी सुरक्षित रखी गई हैं। मुगल काल के सिक्के व मिट्टी के बर्तन, अस्त्र-शस्त्र भी सैलानियों के लिए रखी गई है। नए साल में यह सब देखना और ज्ञानव‌र्द्धन करना अच्छा रहता है। संग्रहालय का पार्क भी सुंदर है। शहर के युवा यहां घूम-फिरकर खूबसूरती के साथ सेल्फी लेना पसंद करते हैं।

Posted By: Jagran

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