नवादा : भोजपुरी एवं मगही भाषा की मिठास बिहार की पहचान रही है। उक्त दोनों भाषाओं में समाहित मधुरता एक दशक पहले की मगही एवं भोजपुरी गीतों में मिलती थी। तब भाषा भारत समेत कई अन्य देशों में काफी कर्णप्रिय हुआ करता था। हाल के दिनों में नए नए लेखकों एवं गायकों द्वारा अपनी गीतों के माध्यम से लोगो के बीच अश्लीलता पड़ोसी जा रही है। इसी बात को लेकर जिले के एक शिक्षक सह समाजसेवी नौजवान प्रतुष् आनंद ने रविवार को क्षेत्रीय विधायक अरुणा देवी के गांव अपसढ़ स्थित आवास पर पहुंचकर भोजपुरी एवं मगही भाषा के द्विअर्थी गीतों में बढ़ती अश्लीलता एवं फूहड़ता के विरुद्ध ज्ञापन सौंपा कर इस सामाजिक मुद्दे को विधानसभा में उठाने की मांग किया है। विधायक को सौंपे अपने ज्ञापन पत्र में समाजसेवी ने कहा है कि जिस कदर से दोनों भाषाओं की गीतो के माध्यम से समाज में अश्लीलता पड़ोसी जा रही है। उससे इन दोनों भाषाओं के साथ ही क्षेत्रवासियों का सम्मान को ठेस पहुंच रहा है। अगर समय रहते अश्लीलता पर रोक नहीं लगाया गया तो हमारी अगली पीढ़ी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। हमलोग एक तरफ मगही भाषा विकास के बैनर तले इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। और दूसरी ओर कुछ आधुनिक लेखकों एवं गायकों द्वारा अश्लीलता एवं फूहड़ता फैलाकर भाषा में गंदगी फैला रहा है।जो भाषा की समृद्धि के लिए बिष के समान होगी। ज्ञापन के माध्यम से समाजसेवी युवक ने कुछ मगही एवं भोजपुरी गीत जिसमें अश्लीलता की पराकाष्ठा थी। उसको उदाहरण देकर कहा गया कि इस प्रकार के गीतों का प्रचलन से समाज में कई तरह की गंदगी फैल रही है। छोटे छोटे वाहनों में सफर कर रही महिलाओं को इस प्रकार की गीत सुनकर शर्मसार होना पड़ रहा है। आज के गीतों में अनैतिकता, अपराध एवं जातिसूचक शब्दों के प्रयोग से समाज में द्वंद पैदा हो रही है। जो एक बहुत बड़ी सामाजिक बुराई है। इस प्रकार के अश्लील एवं द्विअर्थी गीतों पर रोक लगाने को ले विधायक को ज्ञापन देकर विधानसभा में मुद्दा उठाने की मांग किया गया।

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