अप्रैल के दूसरे हफ्ते में ही आसमान से आग के गोले बरसने से परेशानियां बढ़नी शुरू हो गई है। हालांकि तीखी धूप से गेहूं की फसलों को लाभ है, लेकिन भूगर्भीय जलस्तर में लगातार गिरावट जारी है। मनुष्य तो मनुष्य पशुओं के लिए पानी की समस्या उत्पन्न होनी आरंभ हो गई है। तापमान में उतार-चढ़ाव का क्रम जारी है। ऐसे में खेतों में लगी गर्मा सब्जियों को नुकसान पहुंच रहा है।

शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 40 व न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रविवार को इसमें दो डिग्री सेल्सियस वृद्धि का अनुमान है यानी यह बढ़कर अधिकतम 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा। वैसे इसके बढ़कर अधिकतम 43 तो न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है जो अप्रैल माह का रिकार्ड तोड़ देगा। इसके पूर्व अप्रैल माह के दूसरे हफ्ते में इतना तापमान कभी नहीं हुआ था। तापमान में लगातार होने से जंगलों के पशुओं को पानी के अभाव में रिहायशी इलाकों में आना शुरू हो गया है। ऐसे में उनकी ग्रामीणों द्वारा हत्या का सिलसिला आरंभ हो गया है। इसके साथ ही जिले के ऐतिहासिक शीतल जलप्रपात ककोलत में सैलानियों की भीड़ उमड़नी आरंभ हो गई है। 14 अप्रैल को सतुआनी मेला का शुभारंभ होगा।

Posted By: Jagran

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