प्रखंड क्षेत्र के किसान सुखाड़ का दंश झेलने को मजबूर हैं। जिन किसानों ने थोड़ी बहुत धान की खेती की है, वे किसी तरह अपनी फसल को बचाना चाह रहे हैं। लेकिन बिस्कोमान में खाद उपलब्ध ही नहीं है। प्रखंड क्षेत्र में लगातार दूसरे वर्ष भी बारिश नहीं होने के कारण सुखाड़ की स्थिति बनी हुई है। प्रखंड कृषि कार्यालय के अनुसार लगभग 20 से 25 प्रतिशत धान की रोपनी हुई थी। पटवन कर फसल बचाने के लिए किसान अपने खेतों में यूरिया डालने के लिए बिस्कोमान भवन पहुंच रहे हैं। जहां उन्हें पता चला कि खाद उपलब्ध नहीं है। धान रोपने के बाद यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है और वह बिस्कोमान में समाप्त हैं। अब किसानों को उंची कीमत पर बाजार में खरीदनी पड़ रही है। कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष रामरतन गिरी कहते हैं कि लगातार बिस्कोमान भवन से यूरिया नहीं दिया जा रहा है। कुछ दिन पहले पुराने मैनेजर की बदली होने के बाद नए मैनेजर की पदस्थापना की गई और उनके द्वारा उस वक्त कहा गया था कि अभी तक चार्ज नहीं मिला है। जिसके कारण यूरिया देने में असमर्थ है। लेकिन अब तो मैनेजर अमित कुमार के द्वारा खाद ही खत्म हो जाने की बात कही जा रही है। जिसके कारण यहां के किसानों को काफी परेशानी के साथ नुकसान उठाना पड़ रहा है।

Posted By: Jagran

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