एक तरफ केंद्र व राज्य सरकार अनुसूचित परिवार के लोगों के उत्थान के लिए कई प्रकार की कल्याणकारी योजना चला रही है। हर घर नल का जल, बिजली, सड़क, नाली-गली आदि का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन देश की आजादी के वर्षों बाद भी प्रखंड के माया बिगहा की सूरत नहीं बदल सकी है। इस गांव में रहने वाले अनुसूचित परिवार के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। आवागमन के लिए न सड़क की व्यवस्था है न टोले में सामुदायिक भवन है। लिहाजा गांव के लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

गौरतलब है कि माया बिगहा में अनुसूचित परिवारों का 40 घर है। मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लेकिन इस गांव के विकास के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सुध नहीं ली। सड़क नहीं होने के चलते आवागमन के लिए पगडंडी ही सहारा है। कहुआरा गांव से पगडंडी पर 2 किलोमीटर का सफर तय कर लोग माया बिगहा तक पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में परेशानी कई गुणा बढ़ जाती है। गांव में कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए तो उन्हें खटिया पर लाद कर अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार सड़क के लिए अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया। रास्ते में सरकारी जमीन भी है, जिसपर सड़क बनाया जा सकता है।

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पेयजल की भी है समस्या

ग्रामीण बताते हैं कि गांव में पेयजल की भी समस्या है। चार पहाड़ी चापाकल लगाया गया, जिसमें दो चापाकल खराब पड़ा है। एक अन्य चापाकल से काफी कम पानी निकल रहा है और वह भी लगभग खराब होने की स्थिति में है। फलस्वरुप गांव की पूरी आबादी एक चापाकल पर आश्रित है और लोग उसी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सामुदायिक भवन नहीं होने के चलते परेशानी होती है। गांव में लड़की की शादी में बारात आने पर बारातियों को खुले आसमान के नीचे स्वागत सत्कार करना पड़ता है। आंगनबाड़ी केंद्र का भी भवन नहीं बन सका है।

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कहते हैं ग्रामीण

- गांव तक आने-जाने के लिए सड़क भी नहीं है। पगडंडी सहारा बना हुआ है। लेकिन कोई भी अधिकारी इसपर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

रजनी देवी। फोटो-16

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- बिहार सरकार की जमीन होने के बावजूद पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया जा सका है। लिहाजा आवागमन में असुविधा होती है।

श्याम सुंदर मांझी। फोटो-17

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- गांव में सामुदायिक भवन भी नहीं है। जिसके चलते हम ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है। प्रशासन को इसपर ध्यान देना चाहिए।

महेंद्र मांझी। फोटो-18

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- हम ग्रामीणों को एक चापाकल पर आश्रित रहना पड़ रहा है। दो चापाकल वर्षों से खराब है, लेकिन मरम्मत नहीं कराई जा रही है।

अर्जुन मांझी। फोटो-19

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कहते हैं अधिकारी

- गांव के विकास के लिए पंचायत सचिव से रिपेार्ट मांगी जाएगी। सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल जल, नाली-गली की व्यवस्था की जाएगी। अनुसूचित परिवारों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उन लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

राजीव रंजन, प्रखंड विकास पदाधिकारी, नारदीगंज।

Posted By: Jagran

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