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बिहार में मिलावट का खेल: महंगे सरसों तेल में पाम ऑयल, मसालों में बुरादा-ईंट का चूरा

Published: Tue, 15 Sep 2026 04:07 PM (IST)

नवादा जिले में त्योहारों के मौसम में खाद्य सामग्री में मिलावट का कारोबार खुलेआम चल रहा है, जिसमें सरसों तेल ...और पढ़ें

महंगे सरसों तेल में सस्ता खेल

महंगे सरसों तेल में सस्ता खेल

HighLights

  1. नवादा में सरसों तेल, मसालों और मिठाइयों में मिलावट।

  2. त्योहारों के मौसम में मिलावटी सामान की बिक्री में वृद्धि।

  3. जिलाधिकारी से नियमित जांच अभियान चलाने की मांग।

मुकेश कुमार पांडेय, नवादा। नवादा जिले में खाद्य सामग्री में मिलावट का कारोबार खुलेआम चलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सरसों तेल से लेकर आटा, दाल, मसाला, पनीर, खोवा और मिठाइयों तक में मिलावट का आरोप है। त्योहार का मौसम शुरू होते ही मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री बढ़ने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

शहर से लेकर ग्रामीण बाजारों तक किराना दुकानों, जनरल स्टोर और मिलों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अभाव में ग्राहक भी कम कीमत के लालच में ऐसे सामान खरीद रहे हैं। ऐसे में खाद्य सामग्री की नियमित जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

महंगे सरसों तेल में सस्ता खेल, मसालों की शुद्धता पर भी सवाल

जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण बाजारों में सबसे अधिक मिलावट सरसों तेल में किए जाने की शिकायत है। आरोप है कि महंगे सरसों तेल में सस्ता पाम ऑयल मिलाकर उसमें रंग डालकर बिक्री की जाती है।

हल्दी में पीला रंग, धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा और मिर्च पाउडर में ईंट का चूरा मिलाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

पनीर और खोवा की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कम कीमत का लालच देकर मिलावटी सामान ग्राहकों को बेचा जा रहा है। मिलावटी खाद्य पदार्थों से पेट संबंधी परेशानी और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है।

दावे गंभीर, लेकिन बाजार में जांच अभियान का इंतजार

खाद्य सामग्री में मिलावट के आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल जांच व्यवस्था को लेकर है। लोगों का आरोप है कि लंबे समय से बाजार में नियमित सैंपलिंग नहीं हो रही है।

छापेमारी और दुकानों के लाइसेंस की जांच भी पर्याप्त नहीं होने की बात कही जा रही है। कई व्यापारी बिना बिल और बिना ब्रांड के सामान बेच रहे हैं, जिससे खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी मुश्किल हो जाती है।

शहर के बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी से नियमित जांच अभियान चलाने की मांग की है। लोगों ने सैंपल फेल होने पर संबंधित प्रतिष्ठानों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है।

दो जिलों की जिम्मेदारी, अब छापेमारी का भरोसा

प्रभारी खाद्य संरक्षा पदाधिकारी डॉ. परमेंद्र कुमार ने कहा कि पर्व-त्योहार के दौरान अधिक मुनाफे के लिए खाद्य सामग्री में मिलावट की आशंका रहती है।

उन्होंने व्यापारियों से मिलावट के कारोबार से बचने की अपील की। उन्होंने बताया कि फिलहाल वे नालंदा जिले में खाद्य संरक्षा पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं और एक सितंबर से नवादा का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है।

दो जिलों का प्रभार होने से काम में परेशानी होने की बात उन्होंने कही। उन्होंने कहा कि मिलावट करने वालों के खिलाफ छापेमारी की जाएगी और खाद्य सामग्री के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे जाएंगे। जांच में सामग्री गलत पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।