15 वर्ष पहले जिस मां की नजर से उसके जिगर का टुकड़ा ओझल हो गया था वह अचानक से उसके आंखों के सामने आ गया। बस फिर क्या था माता की आंखों से करूणा के आंसू झलक पड़े। अपने बेटे को पाकर माता-पिता खुश थे। बुधवार की सुबह नवादा सदर प्रखंड के आंती पंचायत के अलकडीहा टोला में एक तरफ जहां लापता बेटे को पाने की अपार खुशी थी तो वहीं दूसरी तरफ यशोदा के रूप में वर्षों तक पालन-पोषण करने वाली माता और उनके परिवार के सदस्यों के समक्ष थोड़ी मायूसी थी। आंती गांव निवासी शिक्षक पंकज कुमार को भोला साल 2004 में गांव में ही मिला था। वह अपने गांव चकन्दरा, पोस्ट चेबाड़ा, जिला शेखपुरा से भटकर नवादा जिले के आंती पहुंच गया था। उस समय भोला की उम्र महज 8 वर्ष की थी। तब गांव के देवी स्थान के समक्ष यज्ञ हो रहा था। तबसे पंकज कुमार के घर में ही भोला पलता-बढ़ता गया। सबने उसे अपने बेटे जैसा प्यार दिया। आज जब उसकी आयु करीब 23 वर्ष की हुई तो उसके अपने माता-पिता अचानक से उसके पास आ गए। आखिरकार आंती पंचायत के सरपंच पंकज मिश्र की उपस्थिति में दोनों परिवार के बीच सहमति बनी। बांड भरवाया गया। शिक्षक पंकज कुमार ने खुशी राजी से भोला उर्फ नगीना को उसके पिता रामाशीष पंडित, माता रेशमी देवी को सुपूर्द कर दिया। शिक्षक पंकज कुमार ने कहा कि वह चाहते हैं कि भोला उर्फ नगीना जहां भी रहे खुश रहे। वह उनके परिवार में काफी घुल-मिल गया था। उनकी माता जी ने भोला को छोटी सी उम्र से ही हर तरह की सेवा सुश्रुवा की थी।

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मिलनसार स्वभाव का भोला सबके दिलों में रहेगा

-भोला की खासियत थी कि वह कभी भी लड़ाई झगड़ा नहीं करता था। गाना-बजाना सुनकर वह काफी खुश हो उठता था। घर में बाजा बजने पर वह नाचने लगता था। वह मिलनसार स्वभाव का था। वह अपने गांव जाकर भी आंती में परिवार वालों के दिलों में रहेगा। जानकारी के मुताबिक भोला अपने मां-बाप का इकलौता पुत्र है। उसके घर लौट आने से उसके अपने परिवार में खुशी है। इधर, आंती पंचायत के सरपंच पंकज मिश्र ने कहा कि बाउंड भरवाने के बाद भोला को उसके माता-पिता को सुपूर्द किया गया। उसके गांव से जाने के समय आंती गांव के अनेक परिवार के लोगों की आंखें डबडबाई हुई थी। जिस समय भोला आंती गांव से अपने परिवार के साथ विदा हो रहा था उस समय गांव के कृष्णबल्लभ पांडेय, रामाशीष सिंह, अरूण सिंह, पप्पु सिंह समेत कई गांव के लोग उपस्थित थे। राशन कार्ड दिखाकर भोला के बेटा होने का दिया सबूत

शेखपुरा जिला के चकन्दरा गांव निवासी रामाशीष पंडित ने भोला को पाने के लिए आंती के सरपंच के समक्ष अपने गांव परिवार का राशन कार्ड दिखाया। जिसमें भोला उर्फ नगीना को पुत्र के रूप में दिखाया गया था। बाउंड पेपर में उसके पिता ने लिखा है कि आज से करीब 15 साल पहले उनका पुत्र गुम हो गया था। काफी खोजबीन की। लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला। हाल ही में कादिरगंज के हसनपुरा गांव के मुनिरक पंडित उसी चकन्दरा गांव में विवाह संबंध को लेकर पहुंचे थे। इसी दरम्यान मुनिरक पंडित व भोला के पिता रामाशीष पंडित के बीच बातचीत हुई। जिसमें पता चला कि उनका लड़का नवादा जिला के आंती में रह रहा है। इसके बाद भोला के माता-पिता, चाचा अपने भोला को लेने के लिए आंती गांव पहुंचे।

Posted By: Jagran

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