बिहारशरीफ। कोरोना वायरस की दूसरी लहर का असर कम होने पर बड़ी राहत तो मिली लेकिन तीसरी लहर की आशंका ने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों के कान खड़े कर दिए हैं। इसी का असर है कि पावापुरी स्थित वर्धमान आयुर्विज्ञान संस्थान (विम्स) अलर्ट मोड में आ गया है। कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए यह अस्पताल तैयार है। संक्रमण से बचने के लिए लोगों को अभी से ही सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

पहली एवं दूसरी लहर में भी इस अस्पताल ने कोरोना से लड़ने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उस समय अस्पताल के पास साधन-संसाधन का अभाव था। आक्सीजनयुक्त बेड भी कम थे। आरटीपीसीआर जांच की सुविधा नहीं थी। आक्सीजन प्लांट नहीं थे। लेकिन अब एक हद तक इन सुविधाओं की बहाली कर ली गई है।

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212 डाक्टर्स की टीम है तैयार

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विम्स में जहां 112 डॉक्टर्स पोस्टेड हैं, वहीं 100 इंटर्नशिप वाले डॉक्टर्स हैं। कुल मिलाकर यह संख्या 212 पहुंचती है। ये सभी डॉक्टर्स मिलकर कोविड की तीसरी लहर को मात देने को तैयार हैं। बताया गया कि मेडिसिन विभाग में 12 विशेषज्ञ डाक्टर (एसआर एवं जेआर सहित) मौजूद हैं। पर्याप्त संख्या में नर्सेज एव अन्य स्वास्थ्य कर्मी की सेवाएं ली जा रही है।

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आरटीपीसीआर के लिए लैब हुआ तैयार : कोरोना संक्रमण की आरटीपीसीआर जांच के लिए अब सैम्पल पटना भेजने की जरूरत नहीं रहेगी। विम्स में आरटीपीसीआर जांच की दो स्थायी तथा एक चलंत इकाई काम करेगी।

प्रतिदिन 3400 नमूने की जांच का लक्ष्य है। जबकि मोबाईल लैब से एक हजार सैंपल की जांच होगी। इसके लिए 12 लैब टेक्नीशियन नियुक्त हैं। लैब की देखरेख करने के।लिए 6 माइक्रो बायोलाजिस्ट डाक्टर्स भी मौजूद हैं। इसकी रिपोर्टिंग के लिए डाटा इंट्री करने के लिए सात आपरेटर भी नियुक्त हैं।

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बच्चों के लिए नीकू-पीकू वार्ड

तीसरी लहर के दौरान बच्चों के संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए तैयारी की जा रही है। बच्चों के इलाज के लिए उपलब्ध आक्सीजनयुक्त बेड की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई गयी है। शिशु विभाग को सुदृढ़ किया जा रहा है। पिछली लहर से सबक लेकर इस बार विम्स अस्पताल मैं बच्चों के लिए नीकु और पीकू वार्ड बनाये गए हैं। इसमें 12 आइसीयू बेड बनाये गये हैं, जबकि सामान्य वार्ड में 60 बेड आक्सीजनयुक्त हैं। शिशु रोग विभाग के स्वास्थ्यकर्मियों को जूम एप्पलीकेशन के जरिये एम्स से प्रशिक्षण मिल रहा है।

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बन रहा है क्रायोजेनिक आक्सीजन प्लांट : तीसरी लहर से पहले आक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने के लिए योजना बनी है। विम्स में आक्सीजन का उत्पादन और सप्लाई से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनायी जा रही है।

प्रतिदिन 40 सिलेंडर आक्सीजन गैस का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा इस महीने के अंत तक क्रायोजेनिक आक्सीजन प्लांट भी तैयार हो जाएगा। 25 मई को क्रायोजेनिक आक्सीजन प्लांट के काम की शुरुआत हुई थी, तीन माह में पूरा होना था, अब तक बस बीस फीसद काम हुआ है।

---------------- बोले विम्स के प्राचार्य

प्राचार्य पीके चौधरी ने बताया कि अभी अस्पताल के पास दो सरकारी एंबुलेंस हैं। लेकिन यह कम है। कहा, लोगों की स्वास्थ्य रक्षा ही हमारी प्राथमिकता है। तीसरी लहर से जंग के लिए हम बिल्कुल तैयार हैं। हम सभी ने दो लहरों के दौरान बहुत कुछ अनुभव किया। कोविड महामारी के कई रूप दिखे। यहां आरटीपीसीआर जांच का तीन लैब काम करेगा। कोविड जांच की समुचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि विम्स अस्पताल में बेड, आक्सीजन, वेंटिलेटर व जीवन रक्षक अन्य उपकरण की व्यवस्था की गई। कहा, महामारी की पहली लहर से आदमी उबरा भी नहीं था कि कोविड की दूसरी लहर की चपेट में आ गया। आज हमारे अस्पताल, चिकित्सक अस्पतालों में बेहतर से बेहतर इलाज देने में, काउंसिलिग करने में सक्षम हैं और तीसरी लहर को लेकर किसी के अंदर कोई झिझक नहीं।इसका मुख्य कारण है वैक्सीनेशन। पहली व दूसरी लहर के दौरान डाक्टर, स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित हुए और स्वस्थ होकर दोगुने जोश से फिर कोरोना संक्रमितों की तीमारदारी में जुट गए हैं।

कोरोना वायरस महामारी के पहले चरण के बाद हम सभी को लगा कि हमने इसे हरा दिया है। लेकिन दूसरी लहर ने बता दिया कि हमें पहले से अधिक सतर्क रहना है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि सावधानी रखें और कोविड प्रोटोकाल का पालन करें। क्योंकि लोगों की सावधानी, सतर्कता, ट्रेसिग, टेस्टिग, ट्रीटमेंट और ट्रैकिग से ही कोरोना पर जीत संभव है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने विम्स प्रबंधन से तीसरी लहर को लेकर जो भी संसाधनों की कमियों का ब्यौरा मांगा गया था, दे दिया गया है। जल्द ही संसाधन उपलब्ध हो जाएंगे। अभी नवादा, नालंदा और जमुई जिले की जांच विम्स में हो रही है।

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इमरजेंसी में मात्र 20 बेड, कभी - कभी स्ट्रेचर पर करना पड़ता है इलाज : सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को गिरियक पुलिस सीधे विम्स में इलाज के लिए लाती है। लेकिन यहां ट्रामा सेंटर नहीं रहने के कारण इमरजेंसी वार्ड में उनका इलाज होता है। इमरजेंसी वार्ड में मात्र 20 बेड हैं। जो अमूमन भरे रहते हैं। इस कारण कभी - कभी मरीजों को जमीन पर ही लिटाना पड़ता है। तो कभी स्ट्रेचर पर ही प्राथमिक इलाज करना पड़ता है। इन अभावों के कारण जरूरी सर्जरी में देरी हो जाती है, जिससे मरीज की जान पर बन आती है।

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ट्रामा सेंटर के लिए अलग से बिल्डिग की जरूरत : विम्स के अधीक्षक डा. ज्ञान भूषण ने बताया कि ट्रामा सेंटर के लिए एक अलग से बिल्डिग की आवश्यकता है। अधिकांश समय इमरजेंसी फुल रहता है। दिन भर में यदि सड़क दुर्घटना में घायल 10 मरीज भी आ जाते हैं तो मुश्किल हो जाती है।

-- ------------------ तैयारी एक नजर में

-------------------- * क्रायोजेनिक आक्सीजन प्लांट का काम 20 फीसद पूरा

* एकमात्र शव वाहन

* पोस्टमार्टम की सुविधा नहीं

* कंट्रोल रूम नंबर -- 80926 10960

* आपातकालीन नंबर-- 80925 22147

----------------------- ब्लड बैंक में उपलब्धता औऱ रक्त की आयु

------------------------ 1. विम्स में ब्लड ( पूर्ण रक्त) 35 दिनों तक सुरक्षित

2. पीआरबीसी ब्लड 42 दिनों तक सुरक्षित

3. प्लेटलेट्स 5 दिनों तक सुरक्षित

4. फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा साल भर तक रखा जा सकता है।

5 . सीपीपी प्लाजमा 5 साल तक रखा जा सकता है।

Edited By: Jagran