नालंदा। सदर अस्पताल में लाखों की लागत से खरीदी गई अल्ट्रासाउंड मशीन इन दिनों धूल फांक रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास इस मशीन को चलाने के लिए एक एस्पर्ट यानी रेडियोलाजिस्ट नहीं है। नतीजन चार माह से यहां पर अल्ट्रासाउंड के कमरे में ताला लगा है। बताया जाता है कि पूर्व में सदर अस्पताल के तत्कालीन उपाधीक्षक डा. आर एन प्रसाद इस मशीन को संचालित करते थे। लेकिन उनके स्थानांतरण होते ही यह व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ गई। आज अल्ट्रासाउंड के लिए सदर अस्पताल में आने वाले गरीब मरीजों को बाहर जाकर कराना पड़ता है। इस कारण गरीब मरीजों के जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

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क्या है परेशानी

राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को चुस्त-दुरूस्त रखने के लिए हर वर्ष करोड़ों की राशि खर्च कर देती है। लेकिन हैरान इस बात की है कि मशीन के संचालन के लिए कोई भी स्पेस्यलिस्ट नहीं रखा गया है। नतीजन सरकार का लाखों रुपये की मशीन रद्दी की टोकरी में फेंक दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों की मानें तो सितम्बर माह से अल्ट्रासाउंड मशीन बंद है। इसकी मुख्य वजह रेडियोलाजिस्ट का नहीं होना है। अब सवाल उठता है कि यदि इस मशीन के संचालन को कोई एक्सपर्ट नहीं रखा गया तो फिर लाखों की लागत से इस मशीन को खरीदी क्यों गई। इस तरह के कई सवालें सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों की जुवां से सुनी जाती है।

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कहते हैं अधिकारी

सदर अस्पताल के अलावा जिले में सरकारी अस्पतालों में एक भी रेडियालाजिस्ट नहीं है। इस कारण अल्ट्रासाउंड मशीन में ताला लगा है। मशीन को चलाने के लिए विभाग के वरीय पदाधिकारियों से कई बार मांग की गई लेकिन कोई भी एक्सपर्ट की व्यवस्था नहीं की गई। वैसे इस मशीन को चालू कराने के लिए अपने स्तर से पूरी कोशिश की जा रही है। रेडियोलाजिस्ट मिलते ही सारी समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा।

सुबोध कुमार ¨सह

सिविल सर्जन, सदर अस्पताल

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