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गांव वाले उड़ाते थे मजाक, अब दूरदर्शन दिखाएगा नालंदा के किसान की सफलता की कहानी; बारहमासी कटहल बना पहचान

Published: Tue, 06 Oct 2026 09:02 PM (GMT+05:30)

चंडी प्रखंड के मोकीम पुर के किसान गौतम कुमार की बारहमासी कटहल की बागवानी पर दूरदर्शन ने एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म ...और पढ़ें

कटहल दिखाते गौतम कुमार। फाइल

कटहल दिखाते गौतम कुमार। फाइल

HighLights

  1. किसान गौतम कुमार की बारहमासी कटहल खेती पर डॉक्यूमेंट्री।

  2. दूरदर्शन पर 13 सितंबर को कृषि दर्शन में प्रसारण।

  3. जैविक खेती, बायोगैस, अमरूद बागवानी भी फिल्म में शामिल।

संवाद सूत्र, चंडी (नालंदा)। चंडी प्रखंड के मोकीम पुर के किसान गौतम कुमार की बागवानी की कहानी 13 सितंबर की शाम साढ़े पांच बजे दूरदर्शन पर कृषि दर्शन नामक कार्यक्रम में प्रदर्शित की जाएगी।

मंगलवार को अजय कुमार के नेतृत्व में दूरदर्शन के चार सदस्यीय टीम सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक डाक्यूमेंट्री फिल्म की शूटिंग की।

दैनिक जागरण ने 21 सितंबर को गौतम कुमार के बागवानी की कहानी में प्रमुखता से प्रकाशित की थी जिसमें बारहोमासी कटहल उगाने की सफलता बताई गई थी।

कटहल के उत्‍पादन ने द‍िलाई प्रसिद्ध‍ि 

दूरदर्शन की टीम के साथ नालंदा कृषि विज्ञान केंद्र की विज्ञानी प्रमुख डाॅ.सीमा कुमारी, मृदा विज्ञानी डाॅ. उमेश नारायण उमेश और उद्यान विज्ञानी डाॅ.कुमारी विभा रानी एवं पौधा संरक्षण विज्ञानी उपस्थित थे।

दूरदर्शन की टीम ने देसी गाय पालन, बायो गैस प्लांट, वर्मी कंपोस्ट यूनिट, अमरूद की प्राकृतिक बागवानी केला की बागवानी आदि पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई गई। बारहमासी कटहल डॉक्यूमेंट्री फिल्म के केंद्र में रहा।

किसान गौतम ने बताया कि शुरुआती तौर पर वियतनामी प्रभेद के कटहल के दस पेड़ लगाया था। इनमें फल आ रहे हैं। पेड़ अभी छोटा है। फिर भी संतोष जनक फल लगे हैं।

एक पेड़ में पंद्रह से बीस किलोग्राम कटहल टूटने की उम्मीद है। इसकी अग्रिम बिक्री भी हो चुकी है। उन्होंने दूरदर्शन टीम को बताया कि इस वर्ष फल कम लग रहे हैं।

अब हर सीजन में कटहल की उपलब्‍धता 

बताता कि कटहल के सीजन (गर्मी) का भी पेड़ है। अब हर सीजन में कटहल उपलब्ध है। गौतम कुमार ने बताया कि शुरुआत में जब बागवानी की तो गांव वाले हंसते थे। लेकिन जब सफलता देखी तो कई किसान जुड़ गए।

नालन्दा कृषि विज्ञान केंद्र हरनौत की प्रमुख डाॅ.सीमा कुमारी ने प्रशिक्षण, सरकारी प्रोत्साहन और सहायता की जानकारी दी।

बताया कि मोकीम पुर में मुख्य रूप से अमरूद की बागवानी प्राकृतिक खाद और प्राकृतिक कीटनाशी का उपयोग कर होता है। इस गांव में लगभग 18 एकड़ में अमरूद की बागवानी होती है।