पावापुरी अस्पताल का ‘सेंट्रल AC’ फेल, भीषण गर्मी में ICU जैसे वार्ड बने भट्टी; मरीज-डॉक्टर दोनों बेहाल
गिरियक के भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (पावापुरी अस्पताल) में सेंट्रल एसी बंद होने से मरीज, परिजन और डॉक्टर भीषण गर्मी ...और पढ़ें

भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान
HighLights
अस्पताल में सेंट्रल एसी बंद, वार्ड बने 'हीट चैंबर'।
मरीज, परिजन और डॉक्टर भीषण गर्मी से जूझ रहे।
समस्या हर साल दोहराई जाती, स्थायी समाधान नहीं।
संवाद सूत्र, गिरियक(नालंदा)। भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान में सेंट्रल एसी का दावा अब खोखला साबित हो रहा है। भीषण गर्मी के बीच अस्पताल के वार्डों और गलियारों में एसी बंद पड़े हैं। इससे मरीजों, परिजनों और डॉक्टरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
अस्पताल का माहौल उमस और गर्मी से बेहद असहनीय हो गया है। लोगों का कहना है कि इलाज से ज्यादा चुनौती यहां ठहरना बन गया है। सेंट्रल AC सिस्टम केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है।
कांच की इमारत बनी हीट चैंबर', बढ़ी उमस
अस्पताल की बनावट भी परेशानी को कई गुना बढ़ा रही है। चारों तरफ ग्लास और शीशे लगे होने से अंदर गर्मी फंस जाती है। एसी बंद होने पर वार्ड ‘हीट चैंबर’ जैसे महसूस होते हैं।
मरीजों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।
डॉक्टरों को भी इलाज करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि लंबे समय तक रुकना मुश्किल हो गया है।
सबसे ज्यादा परेशानी लंबे समय से भर्ती मरीजों को
अस्पताल में कई मरीज 15 से 20 दिनों से भर्ती हैं। खासतौर पर ऑर्थो विभाग के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बुजुर्ग, बच्चे और गंभीर मरीजों की हालत चिंताजनक बन रही है।
परिजनों का कहना है कि उमस के कारण नींद तक नहीं आ रही। इलाज के साथ-साथ गर्मी से जूझना मजबूरी बन गया है। मरीजों की तकलीफ अब खुलकर सामने आने लगी है।
हर साल गर्मी में फेल, फिर भी स्थायी समाधान नहीं
यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि हर साल दोहराई जा रही है। पिछले दो वर्षों से गर्मी आते ही एसी सिस्टम जवाब दे देता है। अस्थायी तौर पर आउटडोर एसी लगाए गए हैं, पर असर सीमित है।
पूरे अस्पताल को ठंडा रखने में यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। प्रबंधन की तैयारियां हर बार नाकाम नजर आती हैं। सवाल उठ रहा है कि स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा।
BMSICL पर जिम्मेदारी, कार्रवाई अब तक शून्य
अस्पताल प्रशासन ने इसकी जिम्मेदारी BMSICL पर डाली है। प्रबंधन का कहना है कि कई बार पत्र लिखकर सूचना दी गई है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
AC सिस्टम की मरम्मत और रखरखाव BMSICL के जिम्मे है। लंबे समय से शिकायत के बाद भी स्थिति जस की तस है। इससे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मरीजों में नाराजगी, 'अत्याधुनिक' दावे पर सवाल
मरीजों और परिजनों में इसको लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं। ‘सेंट्रल AC अस्पताल’ का दावा सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है।
सरकारी अस्पताल से राहत की उम्मीद लेकर आए लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने जल्द से जल्द सुधार की मांग उठाई है। मांग है कि गर्मी में मरीजों को राहत देने के ठोस इंतजाम हों।
प्रबंधन का दावा: पंखे दुरुस्त, पर राहत अधूरी
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर प्रयास किए हैं। जहां-जहां पंखे लगे हैं, उन्हें ठीक करा लिया गया है। लेकिन केवल पंखों से इतनी बड़ी समस्या का समाधान संभव नहीं है।
सेंट्रल AC बंद रहने से हालात पर खास असर नहीं पड़ा है। मरीज अब भी उमस और गर्मी से जूझ रहे हैं। जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
