‘G Ram G’ नाम बदला, हालात नहीं: मनरेगा में मजदूरों को तीन माह से नहीं मिली मजदूरी, 64 लाख से अधिक राशि बकाया
नालंदा के गोंदूविगहा पंचायत में मनरेगा मजदूरों को तीन महीने से मजदूरी नहीं मिली है, जिससे 64 लाख रुपये से ...और पढ़ें

64 लाख से अधिक राशि बकाया
HighLights
गोंदूविगहा मनरेगा मजदूरों को तीन माह से मजदूरी नहीं मिली।
64 लाख से अधिक राशि बकाया, आर्थिक संकट गहराया।
अधिकारी ने जल्द भुगतान का आश्वासन दिया, मजदूर परेशान।
संवाद सूत्र, करायपरसुराय (नालंदा)। मनरेगा का नाम बदलकर ‘G Ram G’ किए जाने की चर्चा के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। गोंदूविगहा पंचायत के दर्जनों श्रमिकों को पिछले तीन माह से मजदूरी नहीं मिली है, जिससे उनकी परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
64 लाख से अधिक राशि बकाया
श्रमिकों का कहना है कि कुल 64 लाख 39 हजार 148 रुपये की मजदूरी अब तक बकाया है। इतनी बड़ी राशि अटकने से मजदूरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना भी मुश्किल हो गया है।
त्योहार भी पड़े फीके
मजदूर जगदीश मांझी, गणेश राम और अजय पासवान ने बताया कि मजदूरी नहीं मिलने के कारण इस बार होली फीकी रही। अब चैती छठ भी नजदीक है, लेकिन पैसे के अभाव में त्योहार मनाने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कर्ज लेकर चल रहा गुजारा
श्रमिकों ने बताया कि घर का खर्च चलाने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ रहा है। दुकानदार भी अब उधार देने से मना कर रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है। कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
योजना का उद्देश्य हो रहा कमजोर
Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act का उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देना और पलायन रोकना है। लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने से यह मकसद अधूरा नजर आ रहा है।
आंशिक भुगतान के बाद भी संकट
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3 करोड़ 87 लाख से अधिक राशि स्वीकृत हुई, जिसमें से 3 करोड़ 22 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान हो चुका है। बावजूद इसके, गोंदूविगहा पंचायत के श्रमिकों का बड़ा हिस्सा अभी भी बकाया है।
अधिकारियों का आश्वासन
मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी देवकांत कुमार ने बताया कि तकनीकी और फंड ट्रांसफर प्रक्रिया में देरी के कारण भुगतान अटका है। उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी मजदूरों के खाते में बकाया राशि भेज दी जाएगी।
मजदूरों की मांग तेज
श्रमिकों ने प्रशासन से जल्द भुगतान की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर मजदूरी मिलने से ही वे अपने परिवार का भरण-पोषण सही तरीके से कर पाएंगे और आर्थिक संकट से बाहर निकल सकेंगे।
