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एक साथ पटना पहुंचे नालंदा जदयू के कई बड़े चेहरे, संजय झा से मुलाकात के निकाले जा रहे सियासी मायने

Published: Sun, 06 Sep 2026 02:49 PM (IST)

नालंदा जदयू में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच कई विधायकों और पदाधिकारियों ने कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से पटना ...और पढ़ें

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के साथ नालंदा के नेता। सौ:एक्स

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के साथ नालंदा के नेता। सौ:एक्स

HighLights

  1. नालंदा जदयू में अंदरूनी खींचतान की चर्चा तेज हुई।

  2. कई विधायक और पदाधिकारी संजय झा से मिले पटना में।

  3. मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया, पर राजनीतिक मायने गहरे।

संवाद सूत्र, हरनौत। नालंदा जिला जदयू में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान की चर्चा अब पटना तक पहुंचती दिख रही है। रविवार सुबह जिले के कई विधायक, पूर्व विधायक और पार्टी पदाधिकारियों के एक समूह ने कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से पटना में मुलाकात की।

नेताओं की ओर से इसे शिष्टाचार और औपचारिक भेंट बताया गया, लेकिन एक साथ हुई इस मुलाकात ने जिले की सियासत में चर्चाओं का तापमान बढ़ा दिया है।

संजय झा से मुलाकात करने वालों में पूर्व मंत्री व सभापति सरकारी उपक्रम संबंधी समिति के विधायक हरिनारायण सिंह, अस्थावां विधायक जितेंद्र कुमार, राजगीर विधायक कौशल किशोर, इस्लामपुर विधायक रूहेल रंजन, जदयू जिलाध्यक्ष मो. अरशद और जिला जदयू नगर अध्यक्ष प्रद्युम्न कुमार शामिल थे।

नेताओं के अनुसार, मुलाकात के दौरान जिले के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। विधायक हरिनारायण सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया कि जिले के सर्वांगीण विकास, जनहित से जुड़े मुद्दों और क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को नई गति देने को लेकर सकारात्मक एवं विस्तृत चर्चा हुई। नेताओं ने कहा कि जनसेवा, विकास और जनविश्वास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

शिष्टाचार मुलाकात, लेकिन राजनीतिक मायने निकाले जा रहे

भले ही नेताओं ने इसे सामान्य मुलाकात बताया हो, लेकिन एक साथ कई प्रमुख नेताओं और पदाधिकारियों के कार्यकारी अध्यक्ष से मिलने के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

जिला जदयू में अंदरूनी मतभेद की चर्चा पहले से राजनीतिक गलियारों में होती रही है। ऐसे में इस मुलाकात ने उन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है।

इस पूरे घटनाक्रम में हरनौत के पूर्व विधायक और जदयू के राष्ट्रीय महासचिव ई. सुनील कुमार की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, मुलाकात को लेकर नेताओं की ओर से किसी तरह के संगठनात्मक विवाद या मतभेद की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।

विधानसभा चुनाव के समय से खिंचाव की चर्चा

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नालंदा जदयू में चल रही खींचतान अचानक पैदा नहीं हुई है। इसके पीछे 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान से ही मतभेद की पृष्ठभूमि बनने की बात कही जा रही है।

चुनाव के बाद संगठन के विस्तार और पद-प्रतिष्ठा को लेकर भी नेताओं के बीच कथित तौर पर दूरी बढ़ने की चर्चा है। पार्टी के भीतर एक धड़ा खुद को अलग टीम के रूप में सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है, ऐसी भी चर्चा है।

इस धड़े से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों की ओर से कथित तौर पर कुछ फैसलों और संवाद के तरीके को लेकर असहजता जताए जाने की बात सामने आती रही है। वहीं, दूसरे खेमे का तर्क है कि पार्टी में जिस पद और जिम्मेदारी की व्यवस्था है, उसी के अनुरूप निर्णय और संवाद किए जाते हैं।

नीतीश कुमार की भूमिका पर भी निगाह

नालंदा की राजनीति में जदयू का प्रभाव लंबे समय से रहा है। ऐसे में पार्टी के भीतर किसी भी तरह की खींचतान का असर जिले की राजनीतिक दिशा पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर भी है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस घटनाक्रम को लेकर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।

हालांकि, पार्टी नेताओं की ओर से फिलहाल इसे विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों पर हुई बैठक बताया गया है। इसके बावजूद एक साथ कई विधायकों और संगठन पदाधिकारियों की संजय झा से मुलाकात ने नालंदा जदयू के भीतर चल रही राजनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।